मुस्लिम काॅलेज नई शुरवात भाग 3

आब आगे

चार दिन बाद अंकल का कॉल आया- स्वाती कहाँ है?
“घर पर ही हूँ अंकल.”
“वीडियो कॉल पर आ सकती है बहुत दिन हो गए तुझे देखे हुए.”
“नहीं.. अभी मम्मी हैं.”
“कमरे में जाकर आजा न.”
“नहीं मम्मी सामने बैठीं हैं. रात को कॉल करूँगी.”
“अरे यार मैं तेरे लिए एक गिफ्ट लाया हूँ देखेगी?” गिफ्ट का नाम सुनकर मैं थोड़ा लालच में आ गई. मैं दबे पाँव छत पर बढ़ गई. वीडियो कॉल की तो अंकल के हाथ में एक आई फोन था. लेकिन उनके साथ एक तकरीबन साठ साल का व्यक्ति बैठा था दिखणे मे सफेद टोपी काला आदमी मुह पर बीना मुच्छो की दाढी थी मे समज गयी ये भी मुस्लिम ही है .
“वाओ आई फोन.. मेरे लिए?”
“हाँ मैं जानता था तुझे जरूरत है. यह मेरे पाकिस्तान का दोस्त है. फिल्म डायरेक्टर है. तुमसे मिलना चाहता है.”
“लेकिन अंकल मुझसे ही क्यों?”
“बेबी यह एक फिल्म बनाना चाहता है. जिस कारण इंडिया घूमने आया है. तुम आओगी तो तुमको जो चाहोगी वह मिलेगा? अब आगे तुम्हारी मर्ज़ी.. लड़कियां तो और भी हैं.”

अंकल की बात पर मैं सोच में पड़ गई. मैं जानती थी कि वह पाकिस्तानी मुझे छोटी सी जान को चोदना चाहता है. लेकिन मैं भी तो कोई मासूम बच्ची नहीं थी. सिर्फ शक्ल से लगती मासूम थी. मैं जाने के लिए तिकड़म भिड़ाने लगी.

कुछ ही देर में मैंने अपनी एक सहेली से मम्मी को कॉल करवाया. उसने मम्मी को बोला कि उसके घर आज रात को जागरण है. फिलहाल मम्मी राज़ी नहीं हुईं, वह समझ गईं कि मैं झूठ बोल रही हूँ. उनको मालूम था कि जागरण में मैं घंटा नहीं जाती.

मैंने अंकल को कॉल करके मजबूरी जता दी. उसके बाद जो हुआ वह मुझे बाद में मालूम पड़ा. मैं आई फोन लेना चाहती थी, जिसके लिए गांड का दर्द भी सहने को तैयार थी. लेकिन मम्मी सर्दी और धुंध में मुझे जाने ही नहीं देना चाहती थीं.

धीरे धीरे शाम हो रही थी. मेरी नज़रें बालकनी से बाहर सड़क पर कुत्ता कुतिया की घमासान चुदाई पर थी, सड़क के किनारे एक कुत्ता बुरी तरह से एक कुतिया को चोद रहा था और फिर थोड़ी देर बाद उसकी चुत में कुत्ते का मुस्लिम लंड फँस गया था. मेरा हाथ अपने आप से मानो मेरी हिन्दु चुत पर पहुँच गया और उसे सहलाने लगी, मैं इतनी बेखबर थी कि मम्मी आकर पीछे खड़ी हो गईं, मुझे पता ही नहीं चला.

माँ ने नीचे झुक कर सड़क के किनारे देखा और फिर मुड़ कर मेरी तरफ देख कर बोलीं- स्वाती बड़ा दिल कर रहा क्या घूमने जाने का?
हालाँकि पहले वो मुझसे इस तरह की बात नहीं करती थीं.
मैंने न में सर हिला दिया.

“चल मेरी बिटिया रानी तुझको घुमा कर लाती हूँ.” कहते हुए मम्मी ने मुझे बांहों में भरकर चूम लिया.
“मुझे नहीं जाना.” मैंने इन्कार किया.
मैं जानती थी कि मम्मी बहुत ज्यादा किसी कॉफ़ी शॉप या रेस्टोरेंट तक ही जाएँगी.

“स्वाती तुमको मेरे साथ चलना है. नाटक नहीं.. जाओ फटाफट तैयार होकर आ जाओ, मैं भी तैयार हो लेती हूँ.”
“कहाँ चलना है मम्मी? मैं क्या पहनूं?”
“एक दोस्त के घर जाना है. तुम कोई सेक्सी सी ड्रेस पहन लो. इतना सेक्सी कि देखने वाले हम माँ बेटी को मुड़ कर देखें. मैं भी रेड साड़ी पहनूंगी.”

मैं सोच नहीं पा रही थी कि मम्मी को अचानक कहाँ जाने का प्लान सूझा है. कुछ ही देर में मैं तैयार थी. मैंने स्कर्ट पहनी थी, नीचे सर्दी से बचने के लिए काली लेग्गिंग डाली हुई थी. मम्मी ने एक लाल साड़ी पहनी हुई थी.. जिसके छोटे से ब्लाउज से उनके कसे हुए मम्मे बाहर आने को मचल रहे थे. साथ ही बेहद भड़काऊ मेकअप किया हुआ था. आज वह अलग ही रूप में थीं. वह मेरी मम्मी कम, कोई हाई प्रोफाइल रंडी ज्यादा लग रही थीं.

कुछ ही देर में हम दोनों निकल गए. सर्दी और कोहरे में घर से बाहर सड़क तक जाते हुए वाकयी लोग हम दोनों को घूर घूर कर देख रहे थे.

“चलेगी क्या?” दो लड़कों ने बाइक धीमी करते हुए, साड़ी में कसी मम्मी की हिप को छूकर पूछा.
“नहीं आज रात बुकिंग है.” मम्मी ने किसी रंडी वाली अदा में जवाब दिया.
हम दोनों खिलखिला कर हंस दिए.

फिर हमने ऊबर ली हुई थी, कुछ ही देर में कैब एक सुनसान सड़क के बाद फॉर्म हाउस में जाकर रुकी. तब तक रात का नौ बज चुका था.
नौकर के साथ मैं मम्मी का हाथ पकड़े अन्दर गईं. लेकिन सामने जो व्यक्ति खड़ा था, उसको देखकर मेरी गांड फट गई. यह वही अंकल थे जिन्होंने मेरी कई बार ली थी और आज रात के लिए बार बार कॉल कर रहे थे.

“कैसी हो रंजना डार्लिंग.” कहते हुए अंकल ने मम्मी को कस कर अपनी बाँहों में भर लिया.
मम्मी “अच्छी हूँ..” बोल कर मुस्कुरा दीं.

उन्होंने मम्मी के गालों पर एक ज़ोरदार किस किया. उसके बाद अंकल मेरी तरफ बढ़े. तब तक एक सुनहरे बालों वाला ल्मबी दाढी वाला आकर मम्मी के गले लग चुका था. अंकल ने मुझे लगभग भींचते हुए अपने गले लगाया.
“आप मेरी मम्मी को कैसे जानते हो? और मुझे मम्मी के संग क्यों बुलाया?” मैं गले लगे हुए फुसफुसाई.
अंकल के हाथ मेरी छोटी सी हिप को दबा रहे थे.
“सब बताऊंगा डार्लिंग. कहा था न तेरी मम्मी भी एक नंबर की माल है. आज तुझको तेरी मम्मी के साथ ही चोदूँगा और साथ ही साथ फिल्म भी बनाऊंगा.
“क्या फिल्म मतलब?” मैं मम्मी की फिल्म का सुन कर चिहुंक सी गई.
“हाँ जब मैंने तेरी मम्मी का फोटो देखा था तब से ही मेरा मूड बन गया था कि तेरी मम्मी को ज़रूर चोदूंगा. ऐसी भरी हुई जवान हिन्दु औरत को चोदने का मज़ा सबसे ज्यादा है.”

अंकल ने मुझे गोद में उठा लिया था. फॉर्म हाउस का गेट बंद हो गया. मम्मी पाकिस्तानी मुस्लीम का हाथ पकड़े और मैं अंकल की गोदी से चिपके अन्दर बढ़ गए. यह वही था, जो वीडियो कॉल पर आया था.

अन्दर कमरे में मैं देखकर हैरान रह गई अन्दर दो व्यक्ति और मौजूद थे. जिनमें एक काला था और एक सुनहरे बालों वाला पाकिस्तानी मुस्लीम था.

हम दोनों सोफे पर बैठ गए. नौकर सलिम अन्दर आया और उसने महंगी शराब की कुछ बोतलें गिलास टेबल पर रख दिए. मैं मम्मी का मुँह देख रही थी. मुझे डर लग रहा था कि यह हो क्या रहा है.

“हाय रंजना यह मौलाना बशीर खान मेरा दोस्त है. पाकिस्तान से और यह मौलाना करीम पठाण, यह भी पाकिस्तानी ही है.”

उन दोनों ने मेरा और मम्मी का हाथ अपने हाथों में ले लिया. वह दोनों मेरी मम्मी और मुझे देखकर कुत्ते की तरह लार टपका रहे थे. मैं सुनहरे बाल वाले मौलाना बशीर खान के पास बैठी थी.. उसके बाद अंकल और फिर मम्मी थीं. मम्मी की तरफ काला मौलाना करीम पठाण था.

अंकल ने पैग बनाया, एक मम्मी को दिया एक मेरी तरफ बढ़ा दिया.
मम्मी ने झिझकते हुए थाम लिया- वह नहीं पीती है.
मम्मी ने कहा.

मैंने मम्मी की तरफ देखा.
“यह तो सब कुछ पीती है. बस आप बेखबर हो.” कहते हुए अंकल ने अपने हाथ से पैग मेरे मुँह में लगा दिया.
“सॉरी मम्मी.. मैं बताने ही वाली थी.” मैंने अपना पैग लेते हुए कहा.

मम्मी मुस्कुरा दीं. वह काला साडं मौलाना करीम पठाण मम्मी की साड़ी से झांकती सफ़ेद कमर को सहला रहा था. मम्मी थोड़ा शर्मा रही थीं, लेकिन मम्मी भी अपने पैरों को खोल कर उसको सपोर्ट भी कर रही थीं. इधर मौलाना बशीर खान भी मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा. मैं कसमसा कर घबराने लगी. ऐसा पहली बार हो रहा था. मैं कई लोगों के सामने थी. हालांकि कॉलेज के क्लास में और बॉयज हॉस्टल के रूम में मैं कई दोस्तों के साथ ग्रुप में चुदवा चुकी थी. मुझे वही सब याद आ रहा था.

मुझे मिन्नतें करते हुए “प्लीज़ स्वाती प्लीज़..” बोल कर पार्टी में कभी किसी दोस्त के घर में बुलाना और फिर कभी मेरी लेग्गिंग तो कभी सलवार तो कभी स्कर्ट के नीचे से चड्डी निकाल कर मुझे बारी बारी से चोदना. मैं भी ख़ुशी ख़ुशी चुदवाती थी. पूरी सहमति से, लेकिन वह सब मेरे दोस्त थे.

मम्मी के सामने इस हालत में मैं पहली बार थी. मेरे होंठ मौलाना बशीर खान चूस रहा था. मैं भी सहयोग करते हुए उसको थामे हुए थी.

मौलाना बशीर खान ने मेरी जांघ से हाथ सहलाते हुए चड्डी में डालकर मेरी गर्म छोटी सी हिन्दु चुत को सहलाना चाहा. मैं मचल कर उछल गई.
“व्हाट हैपन्ड बेबी?”
“वाशरूम जाना है.” मैंने मम्मी की तरफ देखकर ठुनकते हुए कहा.
मम्मी मौलाना करीम पठाण से अलग हुईं और अंकल के इशारे पर मुझे लेकर वाशरूम को बढ़ गईं.

अन्दर मैंने अपना स्कर्ट सम्हालते हुए चड्डी पैरों पर खींची और ज़ोर से छुल्ला दिया. मेरी मूतने की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि मम्मी को भी सुसु लग गई. मेरे खड़े होते ही मम्मी भी अपनी साड़ी सम्हाल कर मूतने लगीं.
“मम्मी?”
“बोलो?”
“यह सब क्या है? आप कैसे जानती हो अंकल को?”
“तुम्हारी कॉलेज की हर छिनाल हरकत से मैं वाकिफ़ हूँ बेटा. तुम कब और किस किस लड़के के साथ चुदवाती हो. लेकिन इस अंकल के साथ भी तुम आजकल चुदवा रही हो, ये नहीं जानती थी. लेकिन जब तुम लास्ट टाइम इससे चुदवाने जा रही थीं तो मैंने तुम्हारे सेल में इसकी और तुम्हारी चैट देखी थी.”
“उफ़्फ़ सॉरी मम्मी.”

“इसमें सॉरी की कोई बात नहीं.. स्वाती तुमको खुद नहीं अंदाजा है कि तुमने कितनी बड़ी मुर्गी को फांसा है, वो भी अपनी मासूम हिन्दु चुत के दम पर. मैंने तुमको रोका नहीं, जिसकी दो वजहें थीं. पहली कि तुम फिर मुझसे छुप कर जाती और ज्यादा बिगड़ जातीं. दूसरी वजह यह शहर का नामी बिज़नसमैन मौह्हमद दीवान है. तुम नहीं जानती अक्सर टाइम्स ऑफ़ इंडिया में इसके बारे में आता रहता है. इसके साथ होने से मैं तुम्हारी तरफ से बेफिक्र हो गई थी.”

“ओह ऐसा क्या लेकिन यह सब? फिल्म बनाना, आपको भी बुलाना.”
“इसने तुमसे मेरे बारे में जो भी चैट की वह सब मैंने पढ़ी है. तेरी मम्मी माल है. एक नंबर की चुदक्कड़ दिखती है.. वगैरह वगैरह..”
“ओह आप जासूसी करती हो मेरी.”

“जासूसी नहीं बच्ची, हिन्दु माँ हूँ नज़र रखना फ़र्ज़ है. जासूसी तब होती जब मैं कुछ तुमको बोलती.”
“उस दिन मैं तुम्हारे हॉस्टल की फीस घर का रेंट और बाकी सब खर्चों को लेकर काफी परेशान थी. यह एक ऐसा चाभी है, जिससे मैं हर दरवाज़ा खोल सकती हूँ. इसलिए मैंने एक फैसला लिया. मैं इसके बाद से तुमको अपने सेक्सी सेक्सी फोटो भेजने लगी थी. क्यूंकि मुझे मालूम था कि यह तुमसे मेरे फोटो मांग रहा है.”
“ओह मम्मी आप भी कमाल की हो.”

“तुमने मेरे फोटो इसको भेजे. लेकिन इसके बहुत कहने पर भी तुमने मेरा कांटेक्ट नम्बर नहीं दिया.. जिस समझदारी पर मुझे नाज़ है. फिर एक दिन मैंने इससे बात की धीरे धीरे हमारी बात बढ़ी. इसने मुझे सेक्स की फरमाईश की. मैंने ग़रीब अकेली हिन्दु विधवा ओरत होने का बहाना करके टाल दिया.”
“ग़रीब अकेली हिन्दु विधवा.. वाह मम्मी मतलब क्लियर बता दिया सारे रास्ते खुले हैं.” मैंने हंसते हुए कहा.
मम्मी मिरर के सामने बाल ठीक करती हुए मुस्कुरा दीं.

“दो दिन बाद मैं इससे मिलने गई. होटल रॉयल फोर्ट में मेरी मुलाक़ात हुई. मैं नखरे करती रही. लेकिन मेरे भरे हुए गोरे जिस्म को देखकर इसने मुझे बीस हज़ार से पचास हज़ार का ऑफर कर दिया. तुम्हारे पापा की डेथ को दो महीने हो चुके थे. मेरी हिन्दु चुत अन्दर से चरमरा रही थी. चुदाई की जरूरत मुझे भी थी. तुम्हारे अंकल कई बार मुझे बुला चुके हैं. खानदान भर में कौन ऐसा है जिसकी तुम्हारी मम्मी पर नज़र न खराब हो. उन नामर्द हिन्दु कंगलों को हिन्दु चुत देने से अच्छा मैंने मुस्लीम दीवान के साथ जाना पसंद किया. मैं मान गई. घर से दूर होटल के कमरे में उस दिन पहली बार तुम्हारी मम्मी को किसी गैर मर्द ने जमकर चोदा.
“लेकिन मम्मी इस तरह से किसी से पैसे लेकर अपने जिस्म को बेचना धंधा करना कहलाता है.”

“बेटी जवान हिन्दु विधवा औरत पर हर मर्द की बस खा जाने वाली नज़र ही होती है. कोई और क्यों तेरे पापा के मुस्लीम दोस्त ही कई बार मदद के बहाने मुझे बुला चुके हैं. लेकिन मैं सही तलाश के कारण टालती रही.”

“तो अब क्या होगा आज रात यहाँ फॉर्म हाउस पर?”
“मैंने अपनी ब्लू फिल्म बनवाने का पांच लाख में कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है. साथ ही साथ तुमको भी साथ देना होगा, तुम्हारे लिए दस लाख का ऑफर है. क्या बोलती हो.. फ्री में लड़कों को देने से अच्छा है. बैंक ऑफ़ पैंटी-वाला का खाता खोला जाये. अगर अपनी नीचे चड्डी में छुपी एटीएम मशीन का हम माँ बेटी सही इस्तेमाल करें, तो रातों रात फिर से करोड़पति बन सकते हैं.”
“ठीक है मम्मी. लेकिन मुझे अकेले डर लगेगा. आप साथ रहोगी न..?”
“तू फिकर मत कर तुझे अपनी गोद में लेकर सब करवाऊँगी मेरी जान.. म्म्मुआह्ह..”

फिर हम वहां से निकल गए, अन्दर गए तो देखा बेड के आस पास कमरे में सफ़ेद रिफ्लेक्टर और कैमरे लगाए जा चुके थे. आप सभी को बता दूं कि हमारी बातचीत सभी पाकिस्तानी मुस्लीमी और कुछ कुछ हिंदी में हो रही थी. लेकिन मैं यहाँ हिंदी ही लिखूंगी.

“रंजना तुम किसके साथ जाओगी पहले. कहानी यह है कि तुम इंडियन हिन्दु संस्कारी पत्नी हो मौलाना करीम पठाण तुम्हारा पड़ोसी है जो कि तुम्हारे घर आया है.”
“सर.. शायद मैं यह सब नहीं कर पाऊँगी. मुझे बेहद अजीब सा लग रहा है.”
“अरे पहली बार है इसलिए थोड़ी घबराहट होती ही है. मौलाना करीम पठाण बहुत जेंटलमैन बन्दा है.”
“डोंट शाई बेबी.” अंकल ने मम्मी को मौलाना करीम पठाण की तरफ करते हुए कहा. मौलाना करीम पठाण ने मम्मी को पकड़ कर जवाब दिया.
“वो बात यह है कि मैंने देखा है इन लोगों का बहुत मोटा और लम्बा होता है.”
“अरे नहीं.. मोटा और लम्बा पूरी संतुष्टि देगा आपको, मैं बोल दूंगा मौलाना करीम पठाण को वह आपके साथ अनाल सेक्स नहीं करेगा.”
“हाँ, मैं इस काला साडं से गांड नहीं मरवा सकती. लेकिन बाकी ठीक है. मैं करती हूँ लेकिन दर्द तो नहीं होगा?”

उफ्फ्फ मम्मी इस लम्बे तगड़े काला साडं से चुदेंगी. सोचते हुए मैं सिहर गई.

मम्मी का हाथ मौलाना करीम पठाण के हाथ में देते हुए अंकल ने कहा- नहीं बिल्कुल नहीं. तुम्हारी पहली ब्लू फिल्म है न.. इसलिए तुम्हारी गांड नहीं मारी जाएगी.
“हाई मौलाना करीम पठाण वेलकम ब्रदर तुम्हारे लिए ही बेड खाली रखा है. ये रंजना है. शादीशुदा बढ़िया हिन्दु माल है. अब इसको जम कर चोदो.”
अंकल से उससे अब उर्दु में कहा.

मैंने देखा मम्मी अपने बारे में ऐसी बातें सुन कर वो फिर से नर्वस होने लगीं, लेकिन मौलाना करीम पठाण ने मम्मी को अपने बांहों में भर कर उनके होंठों को चूसना शुरू किया. मैं मौलाना बशीर खान के साथ खड़ी देख रही थी. कैमरे मम्मी और मौलाना करीम पठाण पर फोकस कर रहे थे. सोफे पर बैठा वह काला साडं मौलाना करीम पठाण मम्मी की साड़ी से झांकती जांघ को सहलाते हुए चूम रहा था. मम्मी धीरे धीरे नॉर्मल होने लगीं.

हमको पैसों की सख़्त ज़रूरत थी. दूसरा कोई रास्ता नहीं था. अब जैसे भी हो मम्मी को ये काम करना ही था. वो भी मौलाना करीम पठाण को रिस्पोन्स देने लगीं.
थोड़ी देर बाद मौलाना करीम पठाण ने मेरी मम्मी को बेड पर बिठाया और कहा- डार्लिंग मेरी ज़िप खोलो और मुस्लिम लंड बाहर निकालो.
मौलाना करीम पठाण जान बूझ कर ओपन बातें कर रहा था, ताकि मम्मी का डर जाता रहे और उन्हें आदत पड़ जाए.

मैंने देखा कि मम्मी ने अपनी साड़ी घुटनों तक ऊपर कर रखी थी और अब उस काला साडं के होंठ चूस रही थीं और मौलाना करीम पठाण एक हाथ से मम्मी की मोटी मोटी जांघें सहला रहा था.
अब मुझे यकीन हो गया था कि लोग जो कहते थे, वो सच था. मुझे बहुत बुरा लगा कि मेरी मम्मी को वह काला साडं मेरे सामने ही चोदने जा रहा था.

इतनी देर में मम्मी ने मौलाना करीम पठाण की पेंट की जिप खोली और मुस्लिम लंड बाहर निकाला.
“बाप रे..” मैं देख के चौंक गई कि इतना बड़ा और मोटा.. सच में बहुत बड़ा था.

मम्मी उसे हाथों में लेकर सहलाने लगीं. मम्मी ने अपने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोल रखे थे, जिससे उनकी चूचियाँ रह रह के बाहर निकलने के लिए उतारू थीं. मम्मी दोनों हाथों से मौलाना करीम पठाण के मुस्लिम लंड को सहला रही थीं और उसके मस्त मुस्लिम लंड की मालिश भी कर रही थीं.

काफी देर तक मम्मी ऐसा ही करती रहीं, इतनी देर में उसने मम्मी के शरीर से ब्लाउज को आजाद कर दिया. मम्मी कच्छी और ब्रा नहीं पहनती थीं. सच में इस उम्र में इतने लोगों से चुदने के बाद भी मम्मी की चूची कितनी कड़क थीं.

पहले मुझे बहुत अजीब सा लग रहा था, मगर अब धीरे धीरे मुझे भी मजा आने लगा. मैं गौर से अपनी मम्मी की चुदाई देखने लगी.

मेरी मम्मी रंजना ने हिचकिचाते हुए उस काला साडं के बॉक्सर को पूरी तरह से निकाल दिया. उसके बाजू में ही मैं, मौलाना बशीर खान और अंकल के बीच बैठी थी. ऐसे माहौल की मम्मी ने कभी कल्पना तक नहीं की थी.

“सक इट बेबी.” मौलाना करीम पठाण ने खड़े होते हुए मम्मी की गांड पर ज़ोरदार हाथ मारा.
मम्मी नीचे बैठ गईं. अब मौलाना करीम पठाण का तनतनाता हुआ मुस्लिम लंड एक बार फिर उनकी आँखों के सामने लहरा रहा था. मम्मी सम्मोहित सी होकर उसके मुस्लिम लंड को देखने लगीं. अब मम्मी की शर्म कम होने लगी थी और उत्तेजना बढ़ने लगी थी.

मेरी मम्मी रंजना कोई कुंवारी बच्ची तो थीं नहीं, उन्हें पता था कि ऐसे फनफनाते हुए मुस्लिम लंड के साथ क्या करना है. मेरी मम्मी ने उस काला साडं के मुस्लिम लंड को अपने उंगलियों से धीरे से पकड़ा, उसकी आगे की चमड़ी को पीछे को किया, तो फूला हुआ.. बिल्कुल मशरूम जैसा दिखने वाला सुपारा बाहर निकल आया.

मम्मी रंजना ने उसे अपने मुँह के पास किया, सूंघ कर देखा, पति की मौत के एक लम्बे अरसे बाद मुस्लिम लंड की जानी पहचानी खुशबू पाते ही, उनकी गदराई हुई हिन्दु चुत गरम पाणी छोडणे लगी. मम्मी ने धीरे से जीभ निकाल कर सुपारे पर फेरी.
“ओह.. यस सक इट बेबी.” कहते हुए मौलाना करीम पठाण ने मेरी मम्मी के चेहरे को पकड़कर उनके मुँह में अपना मुस्लिम लंड दे दिया.

मम्मी ने उसके काले मुस्लिम लंड का ज़ोरदार चुम्बन लेते हुए कहा- वाउ इट टेस्ट सो गुड.

अगले ही पल मौलाना करीम पठाण का मुस्लिम लंड मेरी मम्मी रंजना के मुँह में घुस गया था. मम्मी गपागप उसका मुस्लिम लंड मुँह में ले रही थीं.

मेरी मम्मी रंजना ने मुस्लिम लंड चूसते चूसते ही पोजीशन बदली और मौलाना करीम पठाण की टी-शर्ट को भी खींच कर उतार दिया. जिसे मौलाना करीम पठाण ने अपने शोल्डर से निकाल कर, दूसरी तरफ उछाल दिया. रंजना का मुस्लिम लंड चूसना बदस्तूर जारी था, साथ ही साथ वो उसकी गोलियों से भी खेल रही थीं.

मौलाना करीम पठाण का मुस्लिम लंड पूरे गले के नीचे तक पहुँच रहा था. एक कैमरामैन मम्मी को उस काला साडं पाकिस्तानी मुस्लीम का मुस्लिम लंड चूसते हुए साइड से फिल्म बना रहा था तथा दूसरा उनके मुँह के पास क्लोजअप शॉट ले रहा था. मम्मी अपने चेहरे पर आते बालों को समेटते हुए हुए रंडी बनी उसके मुस्लिम लंड को गटागट अपने कंठ तक ले रही थीं.

Related Post

This post was submitted by a random interfaithxxx reader/fan.
You can also submit any related content to be posted here.

5 Comments

  1. Good
    Continue

  2. Ufff ye to mst story hai .

  3. Gajab hai lambi story likha karo yaar erotic mast hai jaldi age ki kahani dalo

  4. please fuck me!! nice story

  5. Kabhi kabhi to aisa lagata ke muslim lund ke bich me hi rahu sab mujhe pyar kare

Leave a comment

Your email address will not be published.


*