बिलाल और पढौसी गुप्ता परिवार

बिलाल अहमद, शहर के तरबगंज मौहल्ले से गुज़रने वाली रोड पर ट्रको का पंचर बनाता था। तरबगंज शहर का एक सबसे पुराना और घना बसा वहुआ मौहल्ला था, समय के साथ बहुसंख्यक आबादी मुसलमानो की थी, हिंदू शहर के अधिक विकसित ईलाकों की ओर पलायन कर गए थे। और रहने वाले मुसलमान बढती आबादी के साथ और भी कट्टर हो गए थे।

बढ़ती उम्र के साथ बिलाल नशा भी करने लगा था, साथ ही बिलाल की उम्र जैसे जैसे बढ़ रही थी वो और ज्यादा छिन्द्रा होता जा रहा था, उसकी आँखों में हर समय हवस भरी रहती थी, खासकर घर से बाहर निकलने वाली हिन्दू औरतों के प्रति क्योंकि बिलाल का मानना था कि घर से बाहर निकलने वाली हिन्दू औरतें मुसलमान मर्दों के उकसाती है और पाकीजा मुसलमान औरतों को भड़काती हैं।

बिलाल अपने घर में तीन बीवी और इमामबाड़े मे और भी कई औरतों को रखें हुए था, तरबगंज का बच्चा बच्चा जानता था कि बिलाल बहुत बडा छिन्द्रा है, बढती उम्र के साथ बिलाल धीरे धीरे नशा भी करने लगा था, और नशे के बाद बिलाल की हवस भयंकर रूप से बढ़ भी जाती थी। वैसे तो बिलाल ट्रक का पंचर बनाता था पर उसका असली धंधा चोरी का सामान बेचना और खरीदना था, जो इमामबाड़े और कसाईबाड़े की आड मे पुलिस की नज़र में नहीं आता था और इस ज़रायमपेशे के कारण ही बहुत सारे मुस्लिम परस्त नेताओं का संरक्षण बिलाल मिलता था।

सडक के पार बिलाल की दुकान के सामने एक संदीप गुप्ता का मकान था। संदीप एक ट्रांसपोर्ट कंपनी के लिए ट्रक चलाता था, अधिकतर घर से बाहर। संदीप की बीवी सरिता 28-30 साल की जवान खूबसूरत औरत थी, इकहरा बदन, तीखे नैन नक्श, लम्बे काले बाल। सरिता का रंग बहुत गोरा तो नहीं था पर साफ था। पति अधिकतर बाहर रहता था, और सरिता अधिकार खाली तो सरिता ने पहले तो एक दुकान खोल ली, बिसातखाने की और क्योंकी सरिता पढी लिखी भी थी तो उसने डाकखाने मे बीमा का काम भी करने लगी।

सरिता जब भी सुबह और दोपहर डाकखाने आती जाती थी, अच्छे से तैयार हो कर इठलाती हुई जाती थी। कमर से नीचें कसी हुई साडी, स्लीवलेस ब्लाउज, गले में मंगलसूत्र, बिंदी चूडियां आदि। सरिता को हमेशा से बडा मज़ा आता था जब मर्द उसे देखकर आहे भरते थे, वो अंदर ही अंदर उत्तेजित होती थी पर उपर से नाक सिकोड़ते हुए चली जाती थी। उधर तरबगंज के मुसलमान आदमियों के बेहद गंदे भद्दे कटाक्ष पहले तो उसे बहुत घिनौने लगते थे पर अब उसे उन बेहद गंदे छिछोरे भद्दे आवाजों से बहुत मज़ा आने लगा था शायद इसलिए भी क्योंकि उसका पति अब सरिता की जवानी की सुलगती आग को बुझा नहीं पाता था।

बिलाल भी उन मुसलमान मर्दों मे से एक था, जो आते जाते सरिता पर बेहद गंदे इशारे करता था। जब भी सरिता उसकी दुकान के सामने से गुजरती तब बिलाल अपनी लुंगी अपनी जांघ पर से हटा लेता और सरिता को इशारे करके बोलता

“आजा रानी, तेरी असली जगह तो यहां हैं, आजा असली मरद का केला खाले”
“आजा साल्ली गुप्ताइन तेरी आग ठंडी कर दू, तेरा मरद तो भडुआ है साला”

मुसलमानो की फब्तियां पर सरिता और बाकी हिन्दू औरते ज्यादा ध्यान नहीं देती थीं, क्योंकि एक तो उनकी आदत हो गई थी ऐसी गंदी आवाजों की और साथ ही उनके हिन्दू आदमी झगड़ा करने से डरते थे। सुनकर मजा सारी हिन्दू औरतों को आता था, चूत सबकी गीली हो जाती थी, चूचियां सारी हिन्दू औरतों और लड़कियों की टाइट हो जाती थी पर सब दूसरों से कहती थी, “ध्यान न दे, साले कटुए बहुत हरामी होते है,।

“आजा साली गुप्ताइन तेरी चूत की आग बुझा दू, बहुत चुल्ल सवार है तेरे हिन्दू बदन में”
“”ले ले साली गुप्ताइन, जवानी का मज़ा ले ले,एक असली मुसलमान मर्द से, एक बार चुदेगी तो वापस नहीं जाएगी, चड्ढी खोल के इस मुसलमान मर्द के बिस्तर पर ही लेटी रहेगी”।

पर सबसे ज्यादा इशारे और आवाजें सरिता को ही मिलते थे एक तो वो सबसे ज्यादा सलीके से तैयार होती थी और फिर कामकाजी भी थी। पर सरिता को मज़ा भी सबसे ज्यादा आता था, सरिता वैसे भी अपने पति संदीप से दुखी थी, जहां एक ओर सरिता के जिस्म की आग बड़ती ही जा रही थी, वहीं संदीप उसे प्यासी ही छोड़ देता था, बल्कि सरिता के मदमस्त हिन्दू जिस्म की आग और भी भडक जाती थी।

धीरे धीरे बिलाल की हिम्मत और खुलने लगी, वो अकेले में सरिता के पिछवाड़े चलते चलते एक चपत लगा देता था, सरिता कुछ कसमसाकर और कुछ घबराकर दबी मुस्कान के साथ निकल जाती थी। बिलाल उसके पास आकर बोलता था
“एक बार मेरी बन जा सरिता, तेरे बदन की सारी आग बुझा दूंगा”
“असली जन्नत दिखाउंगा”

एक दिन सरिता दोपहर करीब 12 बजे अपनी किराने की दुकान पर बैठी थी कोई ग्राहक नहीं था, सामने बिलाल भी बिल्कुल खाली बैठा था, मार्केट बहुत डाउन था। सरिता के जिस्म मे आग बहुत दिनों से भड़की हुई थी, और जिस्म की आग दिन-रात, धर्म-अधर्म, पाप-पुन्य कुछ नहीं जानती। बिलाल ने सरिता को अपनी आंखों से इशारा किया, सरिता ने भी ज्यादा कुछ सोचे बिना अपनी भोहों के इशारे से बिलाल के बुलावे को कबूल किया। गुप्ताइन आज पूरे मूड मे थी। उसने अपने चंचल आखों से बिलाल को इशारा किया कि बगल का दरवाजा खुला है, बिलाल अंदर आ सकता है।

बिलाल झट से रोड पार कर के गुप्ताइन के घर मे घुस गया। गुप्ताइन ने अपनी 8 साल की लड़की को दुकान पर बैठा दिया और खुद अंदर बिलाल के पास चली गयी। अब सरिता और बिलाल का कोई प्रेम मोहब्बत का रिश्ता तो था नहीं, संबंध विशुद्ध रूप से जिस्म की हवस का था, भड़कती हुई आग का था। बिलाल का वैसे भी इश्क मोहब्बत से कोई मतलब नहीं था, वो सिर्फ जिस्म की भूख को समझता था, औरतें उसके लिए सिर्फ और सिर्फ चुदाई का सामान होती थी, खासकर हिन्दू औरतें। बिलाल को ज़बरदस्त मज़ा आता था जब वो किसी हिंदू औरत या लड़की को पा जाता था तो बिलाल वहशी जानवर बन जाता था, हिंदू औरतों को चोदने मे बिलाल का कट्टरपन और भी ज्यादा बड़ जाता था, बिलाल को लगता था कि उसे हिन्दू औरतों को चोदने मे मजहबी सबाब मिल रहा था।

बिलाल के बारे मे कहा जाता था कि वो एक बार में तीन तीन औरतों को चोदता था। रोज़ वो एक से डेढ़ किलो भैसे का गोश्त खाता था और उसे औरतों को पूरा नंगी करके बेदर्दी से चोदता था, एक बार में 2-3 घंटे । अधिकतर गरीब औरतें ही उसे मिलती थी, इमामबाड़े मे मुसलमान आबादी थी, और गरीब मुसलमान औरतों मे से बहुत सारी जिस्मफरोशी का धन्धा करती थी जिन्हें बिलाल 200/- से 300/- रुपये दिन के देता था, बिलाल की वहशी ज़मीनतोड़ चुदाई के बारे मे सारा मोहल्ला जानता था।, नाज़ुक कमजोर औरते तो कभी बिलाल के पास आती नहीं थी पर अगर कोई नाजुक औरत हिंदू होती थी तो बिलाल और भी ज्यादा बेदर्दी, से चोदता था।

इमामबाड़े मे बिलाल को हज़ार रुपये में तीन औरतें दिन भर को मिल जाती थी। बिलाल तीनों को पूरा नंगा कर के एक साथ चोदता था, तीन औरतों पर एक बिलाल भारी पडता था। उसके बारे मे औरतों का कहना था कि बिलाल इतना ज्यादा चोदता था कि अगर बिलाल किसी मुर्दा औरत को भी चोद दे तो औरत की चूत मे आग लग जाए और वो औरत जिन्दा हो जाए। सरिता गुप्ताइन को इतनी बातें नहीं पता थी, वो बिलाल को छोटा मोटा चोदू समझती थी, जिसे वो अपने जिस्म की प्यास बुझाने के लिए इस्तेमाल करना चाहती थी। बिलाल सबकी नज़रें चुरा कर चुपचाप गुप्ताइन के घर में घुस गया फिर भी कुछ दुकानदारो ने उसे देख लिया।

वो दुकानदार आपस मे बात कर रहे थे “आज साली गुप्ताइन की चूत का भोसड़ा बनेगा”
“साला बिलाल इस छिनाल को अइसा चोदेगा कि साली ज़िन्दगी भर याद रखेंगी”
“बनेगी आज से ये साली छिनाल भी मुसलमानो की रण्डी बनेगी”

बिलाल को जैसे ही सरिता अपने सामने मिली तो उसने सरिता को कस के पकड़ लिया, जैसे एक बाज अपने शिकार को पकड़ता है।
बिलाल “बोल साली, तेरा पति छक्का है क्या”
“तुझे अच्छे से चोद नहीं पाता है क्या”
बहुत चुल्ल सवार हैं साली तुझे,”
और बिलाल ने सरिता के चूतड़ो को साडी के उपर से कस कर मसला और सीधे उसके होठों को चूम लिया। बिलाल का दूसरा हाथ गुप्ताइन की साडी के उपर से ही उसकी पनियाइ चूत को छेडऩे लगा।

सरिता : – “आऊचच् .. वो मेरी अच्छे से ले नहीं पाता है”
“कइ कइ दिनों बाहर ही रहता है”

बिलाल :- ” साली छिनाल, तो ऐसे ही किसी भी मर्द का लण्ड खाने को तैयार हो जाती हैं तू”
“कैसी चुदासी हिंदू रण्डी है तू, तेरे तो दो दो बच्चे हैं”

सरिता :- “तुम्हें इससे क्या, तुझे मेरे बदन से मतलब है, या रिश्तेदारी से”

बिलाल :- ” बडी हल्टर औरत हैं तू तो साली” बिलाल आश्चर्य से बोला
“हाँ साली, मुझे तो सिर्फ तेरी चूत चाहिए, तेरा ये बदन चाहिए साली, सच तेरी जैसी छिनाल को चोदने मे बहुत मज़ा आएगा”
“तुझे तो साली रण्डी की तरह चोदूंगा साली गुप्ताइन”
कहकर बिलाल ने सरिता की साड़ी पूरी खोल दी और सरिता की सफेद चड्ढी मे अपना हाथ डाल दिया”

बिलाल सरिता की चूत मे ज़ोर ज़ोर से अपनी दो उंगलियां करने लगा। सर्दी में भी बिलाल को गुप्ताइन की चूत की गरमी महसूस हो रही थी। जल्दी ही बिलाल ने अपनी तीन उंगलियां सरिता की चूत मे डाल दी, सरिता चिहुँक रही थी। सरिता की चूत गीली होने लगी थी, एक प्यासी औरत को मर्द का साथ मिल जाए तो माने अंधे को आंखें मिल गई। सरिता गरमाने लगी।

बिलाल :- “मै भी देखता हूँ कि कितनी बड़ी अल्टर हैं तू साली छिनाल” कहते हुए बिलाल बेदर्दी से सरिता की चूत को मे अपनी उंगलियां पेलने लगा, वो अपनी उंगलियों को फेटने लगा। सरिता की चूत से फच्च फच्च की पनीली आवाज़ आने लगी, उत्तेजना के मारे सरिता का जिस्म ऐठने लगा था। सरिता इतनी बड़ी छिनाल निकलेंगी, किसी ने सोचा नहीं था । किसी ने ये भी नहीं सोचा था कि भरी दोपहर में सरिता गुप्ता जैसी पढी लिखी अच्छे घर की हिंदू महिला एक अजनबी मुसलमान मर्द से चुदेगी। गजब होती हैं जिस्म की आग, गुप्ताइन का सारा धरम-संस्कार सब चूत की गरमी मे पिघल गया था। बिलाल 15-20 मिनट तक सरिता की चूत मथता रहा पर गुप्ताइन पीछे नहीं हटी, बहुत गरमी थी गुप्ताइन के जिस्म मे।

बिलाल :- “चल साली ……. चल अब अपनी चूत दे, देखें साली कितनी गरमी है तेरे अंदर” कसकर बिलाल ने सरिता को एक ही झटके में गोद मे उठा लिया। बिलाल बहुत पागल हो रहा था, उसने अब तक सैकड़ों औरतें चोदी थी सब 10-15 मिनट में बोल जाती थी, पर गुप्ताइन अब तक पीछे नहीं हटी थी, गजब चुल्ल सवार थी सरिता को। बिलाल सरिता को उठा कर पीछे के कमरे की ओर ले गया। वो गुप्ताइन का बैडरुम था, वहां गुप्ता के बिस्तर पर बिलाल ने सरिता को पटक दिया। और कहीं गुप्ताइन के बच्चे कमरे में न आ जाए तो बिलाल ने कमरे की कुंडी अंदर से बंद कर दी।
“बड़ी छिनाल औरत है साली” बिलाल ने मन ही मन सोचा ।

बिलाल ने तुरंत ही सरिता की साड़ी उतार कर भेंक दी, पीली साड़ी के नीचे पीला पेटीकोट था, बिलाल ने सरिता के पेटीकोट को ऊपर कर दिया सरिता के कमर पर और सरिता की सफेद चड्ढी को एक ही झटके में खींच फेका। सरिता दो बच्चों की मां थी फिर भी उसकी चूत अभी बहुत टाइट थी, किसी भी गैर मर्द ने उसे हाथ नहीं लगाया था, उसकी काली काली झांटो के बीच से गुप्ताइन की दूधिया चूत पनिया रही थी। बिलाल ने अपने भी कपडे तुरंत निकाल कर नंगा हो गया।

और अपने खतना किए हुए विशालकाय मुसलमानी लण्ड को सेक्स के लिए तड़पती शादीशुदा सरिता गुप्ता की पनियाइ चूत मे ठेल दिया। सरिता चिहुँक उठी, जब तक सरिता समझती तब तक बिलाल ने दो तीन ज़बरदस्त झटकों मे अपना मूसल लण्ड आधें से भी ज्यादा सरिता की चूत मे घुसेड़ दिया। सरिता ने सुना था कि बिलाल का लण्ड लम्बा और मोटा है, पर इतना बड़ा होगा सरिता ने सपने में भी नहीं सोचा था । शुरुआत में तो सरिता की आँखें बंद थी पर बिलाल की बेरहम चुदाई ने उसके होश ही उडा दिये, सरिता को चोदते चोदते बिलाल ने अपनी बुशर्ट और बनियान दोनों उतार दी और साथ ही सरिता के ब्लाउज और ब्रा को भी ऊपर से खोल दिया।

सरिता ने इतने करीब से आजतक सिर्फ अपने पति को ही देखा था, बिलाल की छाती उसके पति से दुगुनी चौड़ी थी जिसपर घने काले सफेद बाल थे, जो सरिता की टाइट चूचियो को रगड़ रहे थे। बिलाल किसी राक्षस की तरह सरिता को चोद रहा था, सरिता ने अपनी दोनों टांगे फैला दी, जिससे बिलाल का मुसलमानी लण्ड उसकी पनियाइ चूत मे और अंदर तक सटासट जा सके। बिलाल अब लम्बे गहरे झटके मार रहा था, सरिता के पति ने तो कभी भी इतना गहरा और इतनी देर तक कभी सरिता को नहीं चोदा था। सरिता को तो भरी दोपहर एक जडियल कट्टर मुसलमान मर्द के नीचे स्वर्ग का मज़ा मिल रहा था।

सरिता आज से पहले कभी किसी गैर मर्द के साथ नहीं फसी थी, पर पता नहीं क्या असर था बिलाल की मर्दानगी मे सरिता गुप्ता जो आज तक एक सती-सावित्री हिन्दू औरत थी पर आज वो भरी दोपहर खुलकर एक कट्टर मुसलमान मर्द से चुदने का मज़ा ले रही थी। धीरे धीरे चुदाई और भी तेज़ हो गई, पलक झपकते ही आधा घंटा हो गया बिलाल को भी बहुत मज़ा आ ने लगा। सालों से बिलाल को कोई फ्रेश औरत नहीं मिली थी और आज यह गुप्ताइन एकदम ताज़ा और फिर खूबसूरत हिन्दू शादीशुदा, बिलाल हपक के सरिता गुप्ता को चोद रहा था। इमामबाड़े की सारी रण्डियो की चूत तो बिलाल के फटे टायरों की तरह थी जिन्हें बिलाल रोज़ बनाता था पर एक खूबसूरत हिन्दू औरत को उसी के घर में नंगा कर के चोदने मे मज़ा भी था और सबाब भी था।

बिलाल वहशी राक्षस की तरह सरिता को चोद रहा था
“ले साली रण्डी, साली हरामजादी, और चुदवा”
“ले ले साली अपने यार का लौड़ा, ले साली, चुदवा अपनी चूत”

सरिता “आहहहहहहह ………… उमममममममममम …………. आहहहहहहहहह ” करते हुए खूब चुदवा रही थी।
बिलाल ने बडी बडी रण्डियो को चोद कर पानी पिला दिया था पर सरिता तो बहुत बडी छिनाल निकली, बिलाल ने दम लगा कर उसे एक घंटे तक चोदा पर सरिता ने उफफफ् नहीं की। बिलाल का लण्ड गुप्ताइन की चूत मे खूंटे जैसा घुस जाता था, फस जाता था, बिलाल फिर निकाल कर और जो़र से फिर ठांस देता था, इस लगातार ज़बरदस्त चुदाई से सरिता की चूत का भोसड़ा बन रहा था, पर सरिता स्वर्ग मे उड़ रही थी, वो दो बार झड़ गई पर डटी रही।

आखिरी समय में तो लग रहा था कि सरिता की पनियाइ चूत से चिंगारी निकल रही हो और वो छिनाल कहेगी “उफफफ् बस करो” पर अंत मे बिलाल थक कर सरिता की ही गरम चूत मे ही झड गया। बिलाल सरिता के ही बगल में निढाल होकर लुढक गया और उसकी सांसे धोकनी की तरह चल रही थी। बिलाल भी समझ गया कि सरिता बहुत बडी छिनाल हैं, साली रण्डी को बिलाल ने इतना चोदा पर साली ने उफफफ् तक नहीं की।

उधर सरिता की आग अब भी ठंडी नहीं हुई थी,
बिलाल “साली छिनाल रण्डी, बहुत आग है साली तेरी चूत मे”
“साली तूने तो मुझे भी पानी पिला दिया”

करीब आधे घंटे तक बिलाल सुस्ताता रहा, उधर सरिता जल्दी ही उठ कर कमरे से बाहर गई और बिलाल के लिए बिस्किट, नमकीन और माजा दुकान से ले आई। बाहर सरिता की बेटी को नहीं समझ था कि अंदर उसकी मां क्या रंण्डीपना कर रही हैं भरी दोपहर एक मुसलमान सांड से चुदवा रही हैं। उधर बिलाल खा पीकर फिर से सरिता गुप्ता को चोदने को तैयार हो गया। पहले उसने सरिता को पूरा नंगा किया, फिर जम के सरिता की बड़ी बड़ी चूचियो को मसला, चपत लगाई और निप्पल को मरोड़ा। सरिता की चूचियां फूल गई।

फिर बिलाल ने सरिता की पनियाइ हिन्दू चूत को खूब चाटा, अपनी तीन उंगलियों से जम के मसला। सरिता को ऐसा स्वर्ग का मज़ा कभी नहीं मिला था, उसका पति अपना लण्ड डालने के अलावा कुछ भी नहीं करता था। सरिता बेहद तडप रही थी। बिलाल की उंगलियां अब सरिता की चिपचिपाती चूत मे सटासट अंदर बाहर हो रही थी। सरिता की चूत से एक बार फिर “पिच्च पिच्च” की पनीली आवाज़ आ रही थी। सरिता अब अपनी गांड उपर उठाकर बिलाल की लम्बी खुरदुरी उंगलियों से ही चुदने की कोशिश कर रही थी, बिलाल समझ गया उसने अपनी स्पीड और भी बढादी। सरिता के अब बर्दाश्त के बाहर हो गया था और सरिता ने अपना मीठा पानी छोड़ दिया, आज सरिता जिंदगीमे पहली बार।इतना अच्छा झडी थी बिलाल का मूंह ठीक उपर था तो बिलाल ने बिना हिचकिचाहट सरिता की चूत का सारा मीठा पानी पीने लगा।

बिलाल : ” साली रण्डी, सरिता, तू भी साली गजब की चुदासी रण्डी है, पर तेरी इस चूत की आग अब मैं ही बुझाऊगा।”
बिलाल सरिता की चूत का पानी चाटते हुए बोला। औरतों को सिर्फ रण्डी और छिनाल समझने वाले बिलाल को सरिता की चूत से प्यार हो गया था।
बिलाल : “क्या गजब चीज़ है तू साली”
“तुझे तो अब मै रोज़ चोदूंगा साली”
“साली भरी दोपहर एक मुसलमान मर्द से चुदवा रही हैं, रण्डी तेरा पति कुछ बोलेगा नहीं”

सरिता तड़पती हुई बोली : ” तुम चोदो राजा, अपने पति को मैं देख लूंगी”
“आहहहहहहहहह मेरे राजा, …………… असली….. उमममम् ज़न्नत है…… और…… और राजा !”

बिलाल :” क्या साली, तू शादी के पहले भी अल्टर थी क्या गुप्ताइन?”
सरिता :” नहीं, मेरे राजा…….. पर अब हो गई हूँ”

बिलाल जल्द ही सरिता के दोनों जांघों को चौड़ा करके उनके बीच आ गया। काली काली भीगी झांटो के बीच पनियाइ गुलाबी हिन्दू चूत पर अपना मुसलमानी लण्ड फिट किया और एक ही झटके में अंदर तक पेल दिया। अबकी बार बिलाल पूरी तरह तैयार था, वो ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहा था सरिता की चूत पर उसकी उम्र से दुगुनी और वज़न मे दुगने से भी ज्यादा भारी मुसलमान मर्द के बदन की ज़बरदस्त ठोकरें पड़ रही थीं। बिलाल, सरिता को पूरी बेरहमी से चोद रहा था और अपनी आंखें बंद कर ली।

फिर बिलाल ने सरिता को बिस्तर पर थोड़ा टेढा किया फिर अपने मूसल लण्ड से भरपूर चोदना चालू रखा जैसे बढई लकड़ी को चिकना करने को रंदा करता है, सरिता की चूत जल्द ही बहुत गरम हो उठी जैसे रंदा करने से लकड़ी गनम हो जाती हैं, सरिता की चूत मे वैसी ही आग लग गई जैसे किसी ने माचिस से आग लगा दी हो। बिलाल फिर भी गुप्ताइन को चोदता रहा। “गपागप-गपागप गचागच-गचागच” बिलाल विराट कोहली के तरीक़े से सिर्फ चोके छक्कों की धुवांधार बैटिंग कर रहा था । ये बिलाल का वहशी रुप था।

बिलाल अब आंखें बंद कर सरिता को चोदते हुए मन ही मन ऊपर वाले की इबादत कर रहा था ” या खुदा आज तेरी रहमत से एक हिन्दू औरत चोदने को मिली है, इसे मैं जम के चोदूंगा। इस साली को चोद चोद के इस शादीशुदा हिन्दू औरत को अपने मुसलमानी लण्ड की पालतू कुतिया बनाऊंगा, मुसलमान बना दूंगा, अल्लाह के दीन मे एक और मुसलमान बढ़ जाएगा। या अल्लाह मुझे इस काफिर औरत को मुसलमान बनाने का सबाब दे।”

बिलाल मन ही मन खुदा की इबादत करता रहा और फुल स्पीड सरिता की काफिर चूत को चोदता रहा। बिलाल का लण्ड आउट होने का नाम नहीं ले रहा था और सरिता की चूत फटने का नाम नहीं ले रही थी। घनघोर बारिश के समान घनघोर चुदाई भरी दोपहिया गुप्ता के घर में हो रही थी। सरिता बिलाल की बमपिलाट चुदाई के मारे एक बार फिर से झड़ गई, पर बिलाल रुका नहीं, थोड़ी देर बाद बिलाल ने सरिता को पलट दिया, अब सरिता का मूंह और सीना नींचे था और गाँड और चूतड़ हवा में, बिलाल सरिता को अब पीछे से कुतिया की तरह चोदने लगा, सरिता की गोरी मांसल कमर को हाथ से कस के पकड़ कर हपक हपक कर चोद रहा था।

इस बार सरिता की चुदाई को एक घंटा से अधिक हो चुका था, सरिता थक चुकी थी, दो बार झड़ भी चुकी थी, वो चीखने चिल्लाने लगी। उसका पति तो सरिता को कभी इतना भी नहीं चोद सका कि वो झड़ सके। और बिलाल का हलब्बी लण्ड गुप्ताइन की चूत के हर कोने, हर गली में जा रहा था। गुप्ताइन को आज मस्त लण्ड मिला था। बिलाल की रफ्तार तूफान मेल की तरह थी और वो बीच बीच मे सरिता के चूतड़ो पर ज़ोर ज़ोर से थप्पड़ मार रहा था। सरिता अब उफफफफफफ् आहहहहह कर रही थी, उसे लग रहा था कि कहीं वो इस चुदाई से मर न जाए। पर बिलाल बदस्तूर पेलता रहा।

सरिता :” अबबब् बससस् करो”
“बस करो…… मेरे राजा”
“मर गई मैं………. अब बस करो” सरिता अब बिलाल के मिन्नतें करने लगी

पर बिलाल को तो अब मज़ा आ रहा था, वो गुर्राते हुए बोला
“चुप साली रण्डी, छिनाल, बहुत बडी अल्टर है ना तू साली”
“तेरी जैसी कितनी छिनालो की मैं मां चोद चुका हूं, तू साली किस खेत की मूली है”
“साली रण्डी छिनाल, बिलाल नाम है अपना, मौहल्ले की कोई हसीन औरतो नहीं है जिसे सारी रात न चोदा हो मैंने, तुझे भी साली काफिर रण्डी, सारा दिन, सारी रात चोदूंगा”

गुप्ताइन की टांगों के बी आग लगी हुई थी, जो धीरे धीरे उसके पूरे जिस्म मे फैल गई थी, सरिता तड़प रही थी पर बिलाल अब रुकने के मूड में नहीं था। वो धोबी की मुगरी की तरह ठोकर पर ठोकर मार रहा था।
सरिता :” अबबब् बससस् करो”
“बस करो…… मेरे राजा भगवान के लिए बस करो”
“मर गई मैं………. अब बस करो”

गज़ब की चुदाई चल रही थी कमरे में, जहां दीवारों पर चारों ओर देवी देवताओं के फोटो और तसवीरें लगी हुई थी वहीं बिस्तर पर एक शादीशुदा हिन्दू औरत एक ज़ालिम मुसलमान मर्द से भरी दोपहर जम के चुदाई का मज़ा ले रही थी, सरिता की चुल्ल उसे कहा ले आई। सरिता का पूरा जिस्म तडप रहा था पर सरिता की तडप और चीखों से बिलाल का वहशीपन और भी बढ़ गया था । वो और भी कस कस कर सरिता को चोदने लगा, जैसे ही सरिता की चीखें निकलती वैसे ही बिलाल सरिता के दो चार झापड़ और मारता।

सरिता :” अबबब् बससस् करो, प्लीज़”

बिलाल और ज़ोर से धक्के मारते हुए : ” बससस् फट गई साली रण्डी, अब बोल कि तू साली रण्डी है मेरी, बोल साली कुतिया गुप्ताइन?” चटाक
सरिता :” बसस् हाँ … हाँ … मेरे राजा, ये गुप्ताइन तुम्हारी ही रण्डी हैं, आहहहहहहह ”

बिलाल :”बोल साली रण्डी, तू इस मुसलमान मर्द की चुदासी हिन्दू रण्डी है, बोल साली कुतिया गुप्ताइन?” चटाक!, चटाक!
सरिता :” हाँ … हाँ … मेरे राजा, ये गुप्ताइन तुम्हारी ही चुदासी हिन्दू रण्डी हैं, आहहहहहहह, बस करो मालिक ”

बिलाल :”बोल साली चुदासी हिन्दू रण्डी सरिता, बोल तू आज से इस मुसलमान मर्द बिलाल की चुदासी हिन्दू रण्डी है, बोल साली कुतिया रण्डी ?” चटाक!, चटाक!
सरिता :” हाँ … हाँ … मेरे राजा, ये सरिता गुप्ता आज से अपने मुसलमान मालिक बिलाल की चुदासी हिन्दू रण्डी हूँ, आहहहहहहह, बस करो मालिक, रहम करो ”

बिलाल को अब भरपूर मज़ा आ रहा था, फिर भी बिलाल ने सरिता को और अपने कंट्रोल में करते हुए बोला “साली रण्डी, आज से मै ही तेरा मालिक हूँ, और अगर मुझे कभी मना किया तो तुझे भैसा काटने वाले बाँके के काट डालूंगा, और फिर भैसे के गोश्त मे मिलाकर सारे इमामबाड़े मे बिकवा दूंगा। समझी साली , अब चुपचाप बर्दाश्त कर अपने मुसलमान मालिक को” कहते हुए बिलाल ने चार-पांच झापड़ सरिता की चूचियो और कमर पर कस के जड़ दिये। नई नई छिनाल सरिता की तो गाँड ही फट गई।

बिलाल अपने मुसलमानी लण्ड के लम्बे गहरे तेज़ शाँट मारते हुए बोला :”बहुत चुल्ल सवार थी ना तुझे साली, अपनी दुकान पर बैठे बैठे इशारे करते थी इस मुसलमान मर्द को, अब देख मुसलमान मर्द का दम। कब देख साली तुझे भी चोदूंगा और तेरी लौन्डियो को भी” बिलाल चिल्ला कर बोला और ज़ोर ज़ोर से इस शादीशुदा हिन्दू औरत की चूत का बेदर्दी से भोसड़ा बनाने लगा। सरिता एक बेरहम मुसलमान मर्द से दिल लगाने का मज़ा उठा रही थी।

सरिता के मूंह से अब बेबस आहे ही निकल रही थी पर वो जानती थी कि बिलाल को कुछ भी कहने का कोई फायदा नहीं था, फालतू मे बिलाल के लात घूंसे और खा जाएगी। सरिता अब अपने नये मुसलमान यार की मर्दानगी को बर्दाश्त कर रही थी। फिर थोड़ी देर बाद बिलाल का बदन अकड़ने लगा, तो बिलाल ने सरिता के चूतड़ो पर तीन चार झापड़ मारे और फिर अपना विशालकाय मुसलमानी लण्ड को सरिता की चूत से निकाल कर सरिता के नंगे जिस्म पर मुट्ठ मारकर अपनी ढेर सारी मणि निकालने लगा और सरिता के गदराए हिन्दू जिस्म पर निकालने लगा। सरिता का पूरा जिस्म बिलाल के गीले माल से नहा चुका था। पर सरिता ऐसी संतुष्ट पूरी ज़िंदगी में कभी नहीं हुई थी।

कुछ देर बाद बिलाल देर दोपहर गुप्ता के घर से निकला जैसे मुगलों ने कोई राजपूत किला जीत लिया हो। अब तो सारा मोहल्लख, सारी रोड, सारा तरबगंज जान गया था कि बिलाल ने एक नई रखैल एक शरीफ पढीलिखी शादीशुदा सरिता गुप्ता थी। सरिता की तो सारी जिंदगी ही बदल गई थी। उसका घर से निकलना ही बंद हो गया था, मोहल्ले के सारे मुसलमान उसे देखते ही हवस भरे इशारे करते थे और हिन्दू उसको हिकारत से देखते थे। अगल बगल की औरते जो पहले सरिता की दोस्त थी, सरिता की इज्ज़त करती थीं अब सरिता से बात नहीं कर रही थी। सबने गुप्ताइन से तौबा कर ली, सारे हिन्दुओं ने सरिता से किनारा कर लिया।

इस सब के वाबजूद सरिता के हिंदू जिस्म मे जिन्दगी मे पहली बार चरम सुख की संतुष्टी मिली थी, वो अंदर से खिल रही थी। दो दिनों की जलन और दर्द के बाद अब सरिता की चूत फिर से पनियाने लगी थी। सरिता के लिए अब पति, परिवार, धर्म, संस्कार सब बेमानी हो रहे थे। जब कोई मुसलमान मर्द या खातून उसे हिंदू रण्डी या छिनाल बोलते तो सरिता को गुस्सा कम आता था और गुदगुदी ज्यादा होती थी, चूचियां टाइट हो जाती थी, चूत गीली हो जाती थी।

5 दिनों बाद जब सरिता का पति, संदीप ट्रक चलाकर वापस आया तो उसके पड़ोसियों ने उससे सरिता की शिकायत की, संदीप को बहुत गुस्सा आया और उसने आनन फानन में सरिता को बलभर मारा। संदीप को सिर्फ इसलिए ही गुस्सा नहीं आ रहा था कि उसकी पत्नी ने व्यभिचार किया है बल्कि इसलिये औल भी ज्यादा था कि उसकी पत्नी पढीलिखी, संस्कारित पतिव्रता थी एक कट्टर अनपढ़ जाहिल मुसलमान से चुदी, भरी दोपहर, बिना लाज शरम के। संदीप को बेहद शरम आ रही थी। संदीप को वैसे भी मुसलमानो से नफरत थी, और फिर बिलाल तो उससे उम्र में करीब 20-25 साल बड़ा भी था। संदीप यह सोच सोच के पागल और नफरत से जल रहा था कि सरिता को कोई और नहीं मिला , मिला तो एक कट्टर गंदा कसाईबाड़े का चोर बिलाल।

सरिता को मारने के थोड़ी देर बाद, जब अगल बगल के सारे लोग खडे तमाशा देख रहे थे तो संदीप ने सरिता से बोला
संदीप :” अच्छा कोई नहीं, चलो थाने चलो, बिलाल पर तुम्हारे बलात्कार की रपट लिखवा देते हैं, अकल ठिकाने लगेगी साले हरामजादे कटुए की !”
सरिता थोडी देर चुप रही, तो संदीप फिर बोला

संदीप :” अब चल ना साली थाने चल, उस साले बिलाल पर बलात्कार की रपट लिखवा देते हैं, साला हरामजादा कटुवे की तो!”
सरिता काफी देर चुप रहकर बोली :”नहीं, कोई ज़रूरत नहीं है, कोई जबर्दस्ती नहीं की है उसने” । और उठ के अंदर को चल दी।

संदीप की तो ज़बरदस्त बेइज्जती हो गई सबके सामने। संदीप फिर से सरिता को मारने उठा। तब तक बिलाल को खबर हो गई कि उसकी नई हिन्दू माल मारी जा रही हैं तो वो गुस्से से राक्षस बन गया। बिलाल ने कसाईबाड़े से चालीस पचास लड़कों को इकट्ठा किया, सब के सब लाठी, डंडे, चाकू, कट्टे से लैस और फिर बिलाल ने संदीप को उसके घर से निकाल कर सबके सामने हाकी हाकी खूब मारा। संदीप का हाथ टूट गया। संदीप के चक्कर में आस पास के पढौसी भी मार खा गए, बाकी भाग गए।

बिलाल ज़ोर ज़ोर से गरजा :” सुन लो सारे गांडुओ, मादरचोदो, ये सरिता गुप्ता आज से इस मुसलमान मर्द बिलाल अहमद की माल है, बिलाल की रखैल है, और बिलाल अपनी रण्डी को जब चाहे चोदेगा, रोज़ चोदेगा, कोई और बीच में आया तो उस मादरचोद कुत्ते की मां वही चोदूंगा, देखता हूं कोन माई का लाल रोकता है, जिसको दिक्कत हो वो मौहल्ला छोड़ दें”

फिर बिलाल ने सबके सामने सरिता का हाथ पकड़ कर उसे खींच कर ज़बरदस्ती अपने सीने से चिपका लिया। सरिता ने कसमसाते हुए अपना पिटा हुआ चेहरा बिलाल के काले सफेद घने बालों वाले सीने मे शरम से छुपा लिया। फिर बिलाल संदीप को घूरते हुए सबके सामने अपने हाथों से सरिता की साड़ी के उपर से उसकी चूतड़ो को कस कस के मसलने लगा, जैसे संदीप को ललकार रहा हो, “जो उखाड़ सकता है तो उखाड़ लो”। सरिता बेहद शरमा रही थी।

बिलाल फिर ज़ोर से बोला :”देख मादरचोद गांडू गुप्ता, देख ले, साला भड़वा, औरत पे हाथ उठाता है, जो उठाना चाहिए वो तो तेरा उठता नहीं, अपनी बीवी सम्हलती नहीं, भोसड़ीवाला, अब तो गुप्ताइन को तो मैं रोज़ चोदूंगा, देखे कौन रोकता है, मादरचोद”

“चल गुप्ताइन साली तू जाके चेहरा धो अपना”
“मै फिर आऊंगा, तू तैयार रहना”

थोड़ी देर बाद पुलिस आई तो मोहल्ले वालों की शिकायत पर बिलाल और कसाईबाड़े के कुछ लोगों को पकड़ कर ले गई। पर बिलाल की दहशत इतनी थी कि किसी ने उस दिन के बाद से सरिता को डर के मारे कुछ नहीं कहा। एक हफ्ते बाद बिलाल की बेल पर रिहाई हुई तो बिलाल रात नौ बजे तरबगंज वापस आया और सीधे गुप्ता के घर पहुंचा।

संदीप घर पर ही था पर बिलाल ने उसे एक हाथ से किनारे कर दिया और सरिता के कमरे को चल दिया। सरिता बिलाल को देखकर कुछ घबराई कुछ सहमी और कुछ उत्तेजित हुई। संदीप डर के मारे चुपचाप बच्चों के कमरे में चला गया। वो समझ गया कि आज उसकी बीवी एक भैसा खाने वाले कट्टर मुसलमान से रात भर चुदेगी। और सच में रात में जब भी संदीप की नींद खुली तो उसके अपने कमरे में बिलाल और सरिता की चुदाई की मादक आवाजें ही सुनाई दे रही थी। पर संदीप लाचार था।

सुबह छह बजे जब मौहल्ले भर की औरते झाड़ू लगा रही थी तो बिलाल अपनी लुंगी पहनते हुए संदीप गुप्ता के घर में से बाहर निकला। सारा मौहल्ला जान गया कि संदीप के रहते बिलाल ने अपनी हिन्दू रण्डी सरिता को रात भर चोदा है। सरिता थकान की वजह से दोपहर तक सोती रही। सारी औरते “राम राम” कहने लगी।

अब बिलाल की दहशत पूरे मौहल्ले मे जम गई। बिलाल हर दूसरे तीसरे दिन रात नौ-दस बजे गुप्ता के घर पहुंच जाता और रात भर अपनी हिन्दू रण्डी सरिता को जी भर के चोदता। अब इस घटना को करीब तीन साल हो चुके हैं और सभी मौहल्ले वालो की तरह संदीप गुप्ता ने भी मान लिया है कि गुप्ता परिवार का असली मालिक एक मुसलमान मर्द मो० बिलाल अहमद है, गुप्ताइन का दिन पर दिन निखरता हिन्दू जिस्म इस बात की रोज़ गवाही देता था।

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10 Comments

  1. अब इसे कहते हैं हिंदू मुस्लिम संबंधों के ऊपर एक खूबसूरत स्टोरी निहायत ही बढ़िया तरीके से आपने इसे बयान किया है

  2. muslim mardo k lund jaisa kuch nahi.. unke mote lund aur gazab ka stamina badan tod kar rakh deta hai.. Gupta bhabhi ko to lat lag chuki hogi bilal se chote lund to ab use pasand hi nahi aane wale heheh
    kik: deviarti
    hangout: [email protected]

  3. अच्छा रहेगा अगर अगले भाग में गुप्ता जी की बीवी बिलाल के तगड़े मुस्लिम लंड से प्रेग्नेंट हो जाए… उसके बाद बीवी लाल जी गुप्ता जी के घर पर रेगुलर ली आते जाते रहे अपनी रखेल और उसके पेट में पल रहे अपने बच्चे के लिए

  4. कोशिश करुंगा कि बिलाल की मुसलमानी मर्दानगी की दीवानी सरिता गुप्ता की कहानी का अगला भाग भी आप लोगों को बताऊ।

  5. Manish meri married didi ki kahani bhi kisi bilal jaise muslim k sath likho please.kik I’d rrraj1

  6. Woooow guptain ji ap ne hum hindu married aurto ka name roshan kardiya billal ji muje bhi ap ki seva karne ka moka dena …. ed mubarak mere maliko

  7. wow nice stroy.. i like it..

  8. Ye story padh Kr muje apni jeevan ki sachi ghtna yaad Aa gyi Jb Hmare lower class Muslim padosi firoz Ne meri upper class seedi saadi Brahmin mummy ko bhla fusla Kr chod diya or Maine meri mummy jo pyaj b nhi khaati thi unko karwachoth ki raat beef khate huye or drink krte huye dekha or puri raat fr meri mummy apne marital bed pr firoz se chudi or b bht gandi cheeze krte huye maine mummy ko dekha jo m Apni story m jald likhne vala hu. Firoz uncle ko kbi maanf nhi krunga

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