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में मेरी मा और करीम पार्ट 3

अगले दिन जब सुबह सुबह मम्मी खेतो में आयी तो बोली उठ जा रामू बेटे सुबह हो गई है
मैने आंखे खोली और मां को देखा ,मेरी मां को देखकर मैने आंखे मूंदी और उठ गया, मां ने हमेशा की तरह घाघरा और ब्लाउस पहन रखा था और ऊपर से एक चुन्नी दाल लेती थी लेकिन अक्सर खेतो में हम दोनों होने की वजह से मा चुन्नी को निकाल देती थी जिससे काम आराम से कर सके
कल रात सुधिया और करीम के बीच हुई घटना से मुझ पर इतना असर हुआ था कि में मा के शरीर को निहारने लगा था ,मा का शरीर बहुत गदराया था ,बड़ी बड़ी चूचियां जो कि एक बेहद कसा हुआ ब्लाउस के अंदर था ,मा के लंबे लंबे बलों की चोटी जो उनके नितंब तक थी ,फिर एक सपाट पेट जहा बिल्कुल भी जरूरत से ज्यादा चर्बी नहीं थी और फिर एक पतली कमर के बाद बड़े बड़े नितम्ब,जिससे मा के एक पतले रेशमी घागरे ने ढक रखे थे
में खाट पर बैठे बैठे ही सोच रहा था और मा काम करते हुए बोली बेटा कहा खो गए जाओ जल्दी से घर जाकर हाथ मुंह धो कर आ जाओ
मै – हा मा अभी जाता हूं
फिर में खाट से उठ गया और घर की तरफ जाने लगा ,मैने एक बार फिर मूड कर मा की गांड़ को देखा और अपना लंड मसल कर घर की ओर जाने लगा

रास्ते में मेरी मुलाकात करीम से हुई ,जो अक्सर घूमने निकाल जाता है
करीम – अरे रामू आज तो सुबह सुबह ही मुलाकात हो गई
में – मेरे घर का रास्ता यही है ,यह तो मिलेगा ही में
करीम – आज मधु जी किधर रहा गई
में उसकी बातो पर मुस्कुरा बैठा और बोला वो रात को घर पर ही ,उनकी तबीयत थोड़ी खराब थी
करीम भी मेरी मुस्कुराहट को समझ गया था वो बोला मुझे बताना चाहिए था कि मधु जी की तबीयत सही नहीं है
में – इतनी जादा भी नहीं थी कि आपको परेशान करना पड़े
करीम – मेरा काम ही यही है कि में सबकी हर समस्या का समाधान करू खास कर औरतों की
में – खास कर औरतों की क्यों
करीम मुस्कुराते हुए बोला रामू बेटे औरतों की बहुत सी समस्या रहती है लेकिन उनके मर्द लोग भी उन पर ध्यान नहीं देते तो क्यों तो होना चाहिए तो इस समस्या का समाधान कर सके
में करीम की बातो को समझ रहा था कि वो औरतों की किस समस्या की बाते कर रहा थामै – बहुत अच्छा काम करते हो करीम जी मैने जब से करीम का काला मोटा मुसलमानी लंड देखा है देखा है तब से मेरी भी इच्छा थी कि में करीम से अपनी मा को चुदवा उ में जानता था मेरा 6 इंच के लंड से तो मे मा के भारी शरीर को नहीं संभाल सकता उसके लिए तो कोई करीम जैसे बड़े लंड के मालिक की ही जरूरत है जो चुदाई में बहुत दमदार हो और कल रात तो मैने करीम का दम भी देख लिया था कि किस तरह करीम ने सुधिया की हालत खराब की थी ,तो मैने सोचा अगर में इससे बता दू की मेरी मा खेती में अकेली है तो ये जरूर वहा जाकर मेंरी मा को फसाने की कोशिश करेगा
में बोला करीम जी मेरी मा खेती में अकेली है और में घर जा रहा हूं नहाने ,तो आपने से बाद में मिलता हूं
करीम ये बात सुनकर खुश हो गया
में अपने रास्ते निकल गया और करीम भी तेज तेज चलकर हमारे खेतों की तरफ जाने लगा,मैने तुरंत अपना अपना रास्ता बदला और में भी दूसरे रास्ते से अपने खेतों की तरफ जाने लगा
कुछ देर में करीम हमारे खेतों में बनी कुटिया पर पहुंच गया ,जब करीम दरवाज़ पर पहुंचा तो उस समय मा की गांड़ दरवाज़ की ओर थी और मा झुक कर कुटिया की सफाई कर रही थी मधु देवी का गदराया शरीर और खास कर उसकी सुडौल गांड जिसने जिसने करीम को पागल कर रखा था वो कुछ ही दूरी कुटिया की सफाई कर रही थी पर इस बात से अंजान की कोई दरवाजे पर खड़ा है वहीं करीम मा की गांड़ को निहार रहा था कुछ देर में मा सफाई करते करते मुंह दरवाज़ की तरफ हुआ तो देखा करीम उससे ही निहार रहा है ,और मा ने कोई चुन्नी नहीं पहन रखी थी जिससे मा के केस हुए ब्लाउस में से चूचियां दिख रही थी जो बाहर आने को थी ,करीम को देखकर मा तुरंत खड़ी हो गई और चुन्नी ढूंडने लगी ,चुन्नी ढूंडने के बाद मा करीम से बोली अरे करीम जी आप कब आए
करीम – बस अभी अभी आया ही हूं
मां – आइए बैठिए ,आज इधर कैसे आना हुआ
करीम – बस इधर से निकाल रहा था तो सोचा आपसे मिलता चालू
मा – अच्छा किया
करीम – रामू बता रहा था कल आपकी तबियत सही नहीं थी
मा – हा कल थोड़ी थकान हो गई थी
करीम – मुझे बता दिया होगा
मा – में चोटी मोटी बातो लिए आपको परेशान नहीं करना चाहती थी
करीम – अरे इसमें परेशानी कैसी यही तो मेरा काम है , ऐसे कभी भी दिक्कत आए तो बता दिया करो
मा – वैसे जादा बड़ी दिक्कत नहीं थी ,अगर आगे से हुई तो जरूर बताऊंगी
करीम – वैसे एक बात बोलूं
मा – बोलिए
करीम – अब आपको रामू की शादी कर देनी चाहिए, आपकी बहू आ जाए तो आपको काम में मदद मिल जाएगी और आपको आराम भी मिल जाएगा
मा – रामू की अभी इतनी उम्र नहीं है की शादी करा दी और फिर आज कल के लड़के लड़कियों के गुलाम होते है क्या पता जिससे शादी करवाऊ रामू उसका गुलाम हो जाए तो मेरी दिक्कत तो और बाद जाएगी
करीम – तो फिर आप खुद क्यों शादी नहीं कर लेती
मा – इस उम्र में किं शादी करेगा
करीम – आपके पीछे तो पूरा गाव पड़ा है एक बार नजर उठा कर तो देखिए ,कोई आपको माना नहीं करेगा
मा – अब आपसे क्या छुपाऊ करीम जी,वो सब मुझे बस काम में लेना चाहते है शादी कोई नहीं करना चाहता
करीम – काम में लेने क्या मतलब
मा – वो सब बस अपनी हवस शांत करना चाहते है
करीम – हवस तो सब में होती है
मा – होती है लेकिन सब को मर्यादा में रहना चाहिए
करीम — में आपकी इस बात से सहमत नहीं हूं मधु जी ,
मा भी थोड़ी घांबिर होते हुए बोली – क्यों
करीम – इस जिंदगी में सबका हक है सब खुशी से जिए ,एक ही तो जिंदगी मिली है उसमे में दुखी रहकर जिए तो क्या मतलब और फिर अगर एक औरत और एक आदमी दोनों अपनी हवस मिटाने के लिए एक दूसरे का इस्तमाल करते है तो इसमें कोई बुराई नहीं है ,हा अगर एक अपनी हवस मिटाने के लिए दूसरे के साथ जबरदस्ती करे तो वो सही नहीं है
मा – हा वैसे ये बात भी सही है,लेकिन हर किसी पर भरोसा भी तो नहीं कर सकते
करीम मन ही मन सोचता है साली के शरीर में आग तो लगी है लेकिन किसी को दिखाती नहीं ,इतने सालो से जो बिना चुदाई के रह रही है मानना पड़ेगा बहुत ही अकड़ वाली औरत है लेकिन जब ये मेरे मुसलमानी लौड़े के नीचे आएगी तब साली की सारी गर्मी शांत कर दूंगा

मा भी जानती थी कि उन्होंने क्या बात छेड़ दी है और ये बात आगे बढ़ती रही तो पता नहीं कहा पहुंच जाएगी और मा करीम को बहुत अच्छा इंसान मानती है क्योंकि मा को पता है कि करीम अक्सर बीमारी का इलाज का मुफ्त में करते है लेकिन ये बात मधु देवी का पता नहीं थी कि मुफ्त में बीमारी का इलाज के बदले बहुत कुछ ले लेता था ,इसलिए उस बात को बदलने के लिए उन्होंने करीम से चाई के लिए पूछा
मा – करीम जी चाई पियोगे
करीम जादा से जादा वक्त मधु देवी के साथ निकालना चाहता था जिससे जब भी मोख़ा मिले मधु देवी को अपने जाल में और गहराई में फसा सके इसलिए करीम ने हा कह दी
मधु देवी वहीं कुटिया में बने चूल्हे में आग लगने के नीचे बैठ कर चाय बनाने लगी
थोड़ी देर बाद में भी पहुंच गया था लेकिन फिर मा और करीम के बीच जादा बात नहीं हुई,करीम चाई पिके निकला गया
करीम ने भी जादा कुछ करने की नहीं सोची क्योंकि वो जानता था ऐसी मधु जैसे औरत इतनी जल्दी नहीं फसेगी लेकिन करीम को भी मधु जैसी औरतों को फसा कर रुला रुला कर चोदने में बहुत मज़ा आता था और फिर करीम कोई खतरा भी नहीं लेना चाहता था कि वो मधु जैसी मस्त हिन्दू औरत का गदराया हुआ हुआ शरीर को पूरी तरह निचोड़ सके ,और ऊपर से करीम को हिन्दू औरतों की कुंवारी गांड मारना भी बहुत पसंद था और मधु देवी के गदराया शरीर ने करीम को पागल कर रखा था इसलिए करीम ने अपने कदम पीछे हटा लिए नहीं तो अगर मधु देवी की जगह कोई साधरण हिन्दू औरत होती तो करीम कब का आगे बढ चुका होता और या तो उससे चोद चुका होता या फिर वो औरत भाग जाती

फिर में मा के पास पहुंच गया जब करीम निकाल गया
मा कोई आया था क्या जो तुमने अभी चाई बनाई है
मा – हा बेटे वो करीम जी आए थे
में – अच्छा क्या कह रहे थे वो
मा – वो बोल रहे थे कि तुम उन्हें रास्ते में मिले थे और तुमने बताया की मेरी तबियत सही नहीं है तो वो मुझसे मिलने आ गए
में – कितनी परवाह करते है
सच कहूं तो में खुद चाहता था कि में मेरी मा मधु देवी को करीम के 13 इंच के भयानक मुसलमानी लंड से चुदता देखू इसलिए में हर संभव कोशिश कर रहा था कि में करीम की तारीफ कर सकू जिससे करीम जल्दी से जल्दी मा को चोद सके
मा – हा रामू तुम सच कह रहे हो ,परवाह तो बहुत है उन्हें ,नहीं तो आज के जमाने में कों इतनी परवाह करता है,करीम सच में बहुत अच्छे इंसान है

में हल्का सा मुस्कुरा और मन ही मन बोला की मा तुम नहीं जानती कि करीम कितने अच्छे इंसान जब तुम उनसे चुदोगी तब पता चलेगा कि करीम कैसा इंसान है,वो अपने 13 इंच के भयानक मुसलमानी लंड से तुम्हारी हालत खराब ना कर दे तो तब बोलना

में – हा मा करीम सच में बहुत अच्छे इंसान है बस तुम ही हो उन्हें मदद के लिए नहीं बुलाती
मा – अरे बेटा तुम नहीं समझोगे
में – क्या नहीं समझोगे
मा – बेटा में एक औरत हूं ,और करीम एक आदमी ,और मेरी शादी हो चुकी है और अब में किसी और मर्द को मेरे शरीर को छूने नहीं दे सकती ,ये पाप होगा
में – मा पापा तो कब के छोड़ के चले गए और तुम अभी भी अपने धर्म का पालन कर रही है
मा – बेटा हर औरत को ऐसा करना पड़ता है
में – लेकिन में तो अपनी मा को तकलीफ में नहीं देख सकता
मा – अरे बेटा क्यों चिंता करते हो ,में ठीक हो जायगी जल्दी ही
में – अगर आपको मर्दों के छूने से इतनी तकलीफ है तो सुधिया काकी को ही बुला लो
मा – अरे वो खराब औरत है
में – क्यों करें है ,वो अपनी काकी ही तो है
मा इस बात पर थोड़ा गुस्सा ही जाती है और गुस्से में बोलती है कि “”मैने कहा खराब है तो खराब है जादा सवाल जवाब मत कर “”
में भी थोड़ा गुस्सा का नाटक करके बोला “”अपनी मा का ध्यान रखना भी एक मुसीबत ही गया है””
मा थोड़ी भावुक ही गई और बोली अरे बेटा ऐसी बात नहीं है,अगर तुम कहते हो तो आज दिन में बुला लेना सुधिया काकी को ,वो थोड़ी मालिश कर देती तो थोड़ा शरीर सही ही जाएगा
में – ठीक है में अभी जा रहा हूं
मा – इतनी भी क्या जल्दी है आराम से बुला लेना
में – नहीं मा अभी नहीं तो कभी नहीं
और फिर में निकाल गया आज मुझे बहुत खुशी हो रही थी कि आज मैने मा और करीम की चुदाई की ओर पहेली सफलता पा ली है
में सुधिया काकी के घर पहुंचा
सुधिया वाहा खाट पर बैठी हुई थी ,शायद अभी अभी उठी ही थी क्योंकि कल करीम ने सुधिया काकी की हालत खराब कर दी थी बहुत रगड़ रगड़ के चोदा था
सुधिया – अरे रामू ,क्या हुआ आज इधर कैसे
में – मा ने बुलाया है थोड़ी मालिश करनी है
सुधिया – अरे वाह आज मेरी जरूरत पड़ ही गई
में — हा काकी
सुधिया – ठीक है में कुछ देर में आती हूं
में – ठीक है काकी
और फिर में वाहा से निकाल गया
में मा के पास पहुंचा तो मा बोली “”बूल आया काकी को””
में – हा मा में बोल आया ,कुछ देर में आती होगी ,और काकी जब तक आएगी और मालिश करेगी जब तक में घर जाकर आराम कर लेता हूं

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4 Comments

  1. Next part jaldi post kro

  2. next part posted

  3. Wow nice story
    Dharmik rup se dono ko karim aur kisi budhe musalman se karwao.
    Jaisa mohit manager bana gulam and pyasi pavi aur mullon ka sath 8 me hota h.

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