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मैं मेरी मां और करीम

हेलो दोस्तों मेरा नाम रामू है , मै अपनी मा के साथ रहता हूं,मेरी मा का नाम मधु देवी है ,मेरे पिताजी का देहांत बहुत समय पहले ही हो चुका है,और अब हम दोनों मा बेटे एक छोटे से गांव में अपना गुजारा करते है हम दोनों सुबह खेतों में काम पर निकल जाते थे और फिर रात को घर आते थे,में कभी कभार खेतो पर ही रुखता था,और फसल खटने के समय हम दोनों ही खेतो पर रुका करते थे,
मेरी मा का शरीर बहुत गदराया हुआ था,बड़ी बड़ी चूचियां ,और भारी भरकम गांड थी,और मेरी मा घाघरा और ब्लाउस में रहती थी और ऊपर से चुन्नी दाल लेती थी,और दिन भर खेतो में काम करने की वजह से मा का शरीर बहुत सुडोल ही गया था,अक्सर गाव के लोग बड़े हो या छोटे सब मेरी मां के शरीर को देखकर आहे भरते थे,में भी मा पर फिदा था में अक्सर मा को काम करते हुए देख कर उनकी गांड़ को देखकर अपना लन्ड मसल लिया करता था लेकिन में कभी मा को पटाने की हिम्मत नहीं कर सका
इसी बीच हमारे गाव में एक वैध आए उनका नाम करीम था ,उमर कोई होगी 55 साल अस पास वो 55 साल की उम्र में भी काफी तगड़े लगते थे,भारी भरकम शरीर था,और यह बात खुशी की थी कि हमारे गाव के आस पास कोई वैध भी नहीं था,अब हमारे गाव के लोगो को कोसो दूर नहीं जाना पड़ता था
सबका जीवन ऐसे ही चलता रहा,लेकिन कुछ दिनों बाद मुझे साख हुआ कि कुछ गडबड है ,मुझे करीम की नजरो में हवस दिखाई दे रही थी,जो भी औरत उसके पास आती वो उसको ऐशे देखता जैसे खा जाएगा और औरतों के जाते वक्त वो उनकी घागरे में छुपी हुई गांड को निहारता
करीम गाव से सबसे दूर रहता था ,और उसके पास हर चीज का इलाज था ,जो भी उसके पास आता था वो उसका इलाज जरूर करता था ,लेकिन एक बात तो थी जो भी औरत उसके पास इलाज के लिए जाती थी चाहे वो कुंवारी लड़की हो या बहरपुर औरत करीम उसके मज़े ले ही लेता था ,लेकिन कुछ तो करीम के जाल में फस ही जाती थी और फिर करीम उनकी ऐसे रगड़ कर चुदाई करता था कि उनकी हालत खराब हो जाती थी ,करीम पूरी तरह औरतों के शरीर की नशे खोल देता था और खास कर गांड का छेद ,क्योंकि करीम को औरतों की बड़ी गांड बहुत पसंद थी और गाव में लोग गांड मारते नहीं है ,इसलिए करीम को कुवारी गांड चोदने को मिलती थी और फिर करीम के लिए तो ये सोने पे सुहागा था कि उससे हिन्दू औरतें चोदना पसंद था और फिर गांड मारना भी पसंद था ऊपर से कुवारी गांड और चोदने को मिलती थी,करीम अपनी जिंदगी से बहुत खुश था,जो औरते जिनका पति उन्हें ढंग से नहीं चोदता था या फिर उन्हें संतुष्ट नहीं कर पाता था उन्हें कतिम बड़ी आसानी से अपने जाल में फसा लेते था,फिर चूत की रगड़ रगड़ के चुदाई के बाद वो उनकी कुंवारी गांड मारता था,बेचारियों की इतनी बेरहमी से गांड मारता था कि वो पूरी चुदाई के दौरान रोती रहती थी एक तरह से कहे तो करीम हिन्दू औरतों को बलात्कार करता था ,उसके बाद औरतों ढंग से चल भी नहीं पाती थी
लेकिन वो बेचारी किसी से कह भी नहीं पाती थी इसलिए करीम मस्त रहता था कि कोई औरत से उसे खतरा नहीं है,बेचारिया चुप चाप अपने काम पर लग जाती जाती
कुछ औरतों की तो ये हालत होती वो घर जाकर रोती थी क्योंकि उनके अपने किए पर पछतावा होता था और करीम भी उन्हें बहुत जलिल करके चोदता था ,करीम इतना जलील करता था कि और अंदर से टूट जाती थी और फिर बुरी तरह से चुदाई से और पूरी तरह टूट जाती थी लेकिन वो ये बात किसी को बता भी नहीं सकती थी ,गाव के लोग इससे बे खबर थे की उनकी पत्नियां की बुरी तरह चुद चुकी है करीम से और उनकी गांड़ फाड़ दी गई है
करीम कभी कभार गाव में घूमने आया ,जिस जिस को करीम ने चोदा था उसे वो देखकर बड़ा मुस्कुराता था और वो बेचरीय अपना सिर झुका लेती थी
एक दिन करीम की मुलाकात मेरी मा से हुई ,मा और में दोनों खेती की तरफ जा रहे थे ,तभी करीम बीच में मिला
करीम – नमस्ते मधु जी
मां – नमस्ते करीम जी
करीम – आजकल दिखते नहीं हो
मां – हा आजकल खेतो में काम कुछ जड़ा ही रहता है
करीम – हा खेतो पर भी नजर रखनी जरूरी है,नहीं तो कोई भी जानवर आकर फसल बर्बाद कर देगा
मां – तभी तो सारा समय खेतो पर ही निकलता है
करीम – तबीयत कैसी है,कुछ दिक्कत तो नहीं है
मां – नहीं करीम जी कोई दिक्कत नहीं है
करीम – कोई दिक्कत हो तो बता देना ,में आधी रात को भी तैयार हूं
मां जी करीम जी ,अगर कोई दिक्कत हुई तो जरूर आपको याद करोगी
करीम – जी बिल्कुल
मां – चलो अब हम खेतो की तरह जा रहे है
करीम – जी बिल्कुल जायेगे ,वो तो सबसे जरूरी काम है

फिर मा और में दोनों खेतो की तरफ निकाल जाते है और करीम वहीं खड़ा खड़ा मां की गांड़ को देखता रहता है
में एक बार पीछे मूड कर देखता हूं तो करीम की नजरे मां की घागरे के अंदर बड़ी गांड की और थी करीम खां जाने वाली नजरो से देखते हुए अपना लंड मसल रहा था
मेरी मा थी ही ऐसी,एक दम गद राया हुआ शरीर बड़ी बड़ी चूचियां और सुडौल बड़ी गांड और फिर एक अप्सरा जैसा चेहरा ,जिससे देख करीम तो पागल हो चुका था वो किसी भी तरह मेरी मां को पाना चाहता था लेकिन मेरी मा किसी को भी जादा भाव नहीं देती थी

मुझे शक हुआ कि करीम में कुछ गडबड तो है तो मैने इसके पीछा करना जरूरी समझा लेकिन मां मेरे साथ रहती थी इसलिए जड़ा पता नहीं कर पाया एक दिन मां ने कहा कि आज तू खेतो पर रुक में घर जाती हूं,और हमारा खेत दूर भी था इसलिए मां को मैने घर पर भेज दिया और रात को में करीम की कुटिया की और निकाल गया ,जब मैने करीम की कुटिया के पास पहुंचा तो मुझे चुदाई की आवाजे सुनाई दी जब में कुतिया के पास पहुंचा तो देखा में आंखे खुली की खुली रह गई ,वाहा करीम बुरी तरह किसी औरत की चूत चोद रहा था था और वो औरत और कोई नहीं मेरी काकी थी ,और करीम गाचा गाच सुधिया काकी को चोद रहा था,
काकी — करीम और कितना चोदोगे
करीम – अरे मेरी रांड अभी तो में शुरू हुआ हूं
काकी – आज तो कुछ जड़ा ही जोर से चोद रहे जो ,मुझे मारने का इरादा है क्या
करीम – अरे नहीं मेरी रांड ,वो आज सुबह सुबह मधु से मुलाकात हो गई उसकी गांड देखकर में पागल हो गया हूं
काकी – तो करीम मधु को देखकर पागल हो गया है,सब लोग उसके पीछे पागल है ,सबसे मस्त माल है वो गाव का
करीम – हा सबसे मस्त माल है ,क्या गांड है उसकी एकदम सुडौल ,अब और नहीं रहा जाता सुधिया मुझे मधु को चोदना है
काकी – मधु को सब चोदना चाहते है ,क्या गद राया हुआ शरीर है मधु देवी क्या,और ऊपर से इतने दिनों से बिना चुदाई के रह रही है,उसको तो रगड़ रगड़ के चुदाई करनी चाहिए
करीम – सही कहा सुधिया ,उसको तो पटक पटक कर चोदना चाहिए,तब जाकर शांति मिलेगी उसको और करीम अपने मुसलमानी लंड से सुधिया काकी की हिन्दू चुद को और कस कस कर चोदने लगा
काकी – आह करीम आज तो फाड़ ही डालोगे मेरी चूत
करीम – क्या करू जब भी मधु देवी का शरीर मेरे सामने आता है तो में पागल हो जाता हूं ,
काकी – मधु भी मिल जाएगी ,और उसके जैसे भारी शरीर की औरत को संभालने के लिए मुसलमान लंड की जरूरत है ,गाव के किसी ने भी इतना दम नहीं की वो मधु देवी जैसी औरत को संभाल सके
करीम – बस एक बार मधु देवी फस जाए तो उसे तो ऐसा चोदूंगा कि उससे जिंदगी भर याद रहेगा कि किस मुसलमान मर्द से चुदी थी
काकी — ये तो तय है कि जब तुम मधु को चोदोगे तो बेचारी की हालत खराब कर दोगे
करीम – ऐसा चोदुगा की वो 2 दिन तक ढंग से चल नहीं पाएगी,बस एक बार फस जाए
काकी – उससे फसाना बहुत मुश्किल है वो किसी को भाव नहीं देती
करीम सब औरत की मजबूरी होती है कि वो औरत है और वो चुदाई की ईच्छा चुपा सकते है लेकिन ख़तम नहीं कर सकते ,बस हमें उसकी दबी हुई इच्छा को बाहर निकालना है
काकी – कैसे करोगे
करीम – बस तू उससे कैसे भी करके मेरे पास ले आ
काकी – फीर क्या करेगा
करीम – तू देखना फिर तो वो मेरे से बिना चुदे नहीं जाएगी
काकी – चल में देखती हूं क्या करना है

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22 Comments

  1. I love your story.

  2. Awesome story…

  3. next part will come soon
    reply ke liye thanks

  4. Dusra part jaldi bhejo

  5. Bahut mast story h next part long aur bhi jyda mart likho yr next dalna jarur aur jaldi

  6. agla part aaj likhuga,kisi ko apni rai deni ho to reply kare ya email kare
    [email protected]

  7. Jaldi post krna

  8. Story lambi honi chahiye mast story h

  9. Superb story dude. Continue the story with the pace and intensity. Want to see how Madhu handles Karim’s stamina.

  10. i wish i could write my own experience

  11. Bhal agla part agle year me ayega kya kal likhne wale the yr likho ya na likho par jhunth na bolo

  12. Dusra part post kro jldi

  13. sorry dosto,me jaanta hu tum logo ko badi jaldi hai agla part padne ki lekin story likhna aasaasn kaam nahi hai,time lagta hai or jab yak meri doctor fatima wali story ka 4th part pad le jo shayad jaldi hi publish ho jayegi

  14. Gaon dehat me aisa aksar hota hai.. mera bachpan gaon me hi beeta hai isliye mujhe achhe se maloom hai. Aj bhi us chudai ka scene yad ata hai to chut gilli ho jati hai..

    Kik: deviarti
    Hangout: [email protected]

  15. dosto aaj ke Baad me is site par koi update nahi duga,koi matlab nahi hai ,kai dino tak story ko pst nahi karte hai ,me jo story likhta hu wo is site ke alawa kahi nahi milegi fir bhi itna late karte hai ,mood off jata hai
    me iske liye maafi chahta hu ,maze karo

  16. or mene us story ka agla bhag post kar diya hai ,ab kab tak aayega muje nahi pata or ab me aage nahi likhuga jab tak yaha ka admin is site par dhyan nahi deta
    me email par bana rahuga

    [email protected]

  17. meri doctor fatima wali story abhi tak kyo publish nahi hui,10 din ho gaye ,admin kaha mar gaya

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