मेरी बीवी मुल्लो की दीवानी पार्ट 1

इन कटवो ने तो हालात ख़राब कर रखे है। इनकी वजह से आज देश पीछे है। इनकी वजह से ही हमारी माँ बहने सुरक्षित नही है। मेरे ससुराल में अक्सर ऐसी बातें मैं सुनती रहती थी। आपको मैं डिटेल से सबके बारे में बता दू। मेरा नाम रेखा है। मेरी शादी को अभी 3 साल हुए है। मेरे ससुराल में मेरे पति के अलावा सास ससुर मेरी ननद है। ननद की शादी नही हुई है। उसकी उम्र अभी 19 साल है। मेरी उम्र 21 है मेरे पति की 23 और मेरे ससुर की 45 और मेरी सास 40 साल की है।

अगर आप केवल सेक्स के हिसाब से पढ़ने आये है तो मैं पहले बता दू इसमें केवल सेक्स नही बल्कि अभी तक की मेरी ज़िन्दगी और उसमे मुस्लिमो के साथ आपसी समझ से जुडी हुई है। हा तो मैंने आपको शुरुआत में बताया था की मेरे परिवार में कैसा माहोल है। मेरे ससुर और पति हिंदूवादी सोच वाले थे और वे हमेशा मुस्लिमो को गाली देते रहते थे। जबकि मेरे मन में कभी भी मुस्लिम लोगो के प्रति गलत विचार नही रहे। मैंने अपने अनुभव में पाया की मुस्लिम लड़को का स्वभाव बड़ा हेल्पफुल होता है वे हमेशा मदद के लिए आगे रहते है।

और उनके लिए इंसान का महत्व पैसे से अधिक होता है यही वजह है की हिन्दू लडकिया उन्हें अधिक पसंद करती है। अगर आज हिन्दू लडकिया मुस्लिम लड़को से शादिया कर रही है तो इसमें मुस्लिम लड़को से ज्यादा हम हिन्दू लड़कियो की मर्जी होती है। सेक्स पॉवेर में तो वो हिन्दू से बढ़कर होते है साथ ही उनका नेतुरे भी अच्छा होता है। मेरा ये मन्ना है की हिन्दू लडकिया तो मुस्लिमो से सेट होने के लिए हमेशा तैयार रहती है बल्कि थोडा समाज के डर से घबराती है। नही तो अगर खुली छुट दे दी जाये तो आधी से ज्यादा हिन्दू लडकिया किसी मुस्लिम को अपना बना ले और मैं भी उनमे से एक हु।

तो अब मै बताती हु अपनी कहानी
मेरा नाम तो मैंने आपको बता ही दिया लेकिन एक बार और बता दू रेखा। मेरे स्तन की साइज 34 है। रंग मेरा गोरा है। हैम ब्राह्मण परिवार से है। जैसा की मैंने बताया हमारे घर में एंटी मुस्लिम माहोल था। एक दिन जब मै अपने पति के साथ मंदिर जा रही थी जो की पास की ही कॉलोनी में था। मंदिर जाने के रस्ते में मुस्लिमो की बस्ती भी पड़ती थी। रस्ते में जाते हुए मेरे पारी हरदम की तरह मुस्लिमो को कोसते जा रहे थे जो की मुझे बिलकुल भी अच्छा नही लग रहा था मैंने भी सोच लिया था आज घर छलके ये पुचुगि की उन्हें मुस्लिमो से इतनी नफरत क्यों है। हैम गर आ गए और मैंने अपने पति से पुछा की आखिर किस वजह से आपको मुस्लिमो से।इतनी नफरत है।

तो उन्होंने कहा की ये होते ही ख़राब है। मैंने पुछा की आप कैसे जानते है क्या आपने कभी किसी मुस्लिम से बात की है। तो उन्होंने कहा नही बात तो मेरी कभी किसी मुस्लिम से नही हुई। फिर मैंने कहा की जब आपकी उनसे बात ही नही हुई तो आप उनके बारे में जानते नही उनका नजरिया आपको नही पता तो आप बिना वजह ही उनसे नफरत करते है।तब मेरे पति ने कहा की हमें तो हमारे सगठन के लोगो ने बताया था। मैंने कहा की आप क्या बैल बूढी है जो खुद के दिमाग की बजाय औरो के दिमाग से चलते है। अब उनके पास कोई जवाब नही बन रहा था। तब मैंने कहा की उनसे मिलो बात करो तब तुम्हे पता चलेगा की वो तुम्हारे हिन्दू दोस्तों से कितने अच्छे है। उन्होंने उस दिन कुछ जवाब नही दिया और ऑफिस के लिए चले गए। लेकिन उस दिन के बाद उनके नेचर में थोडा बदलाव आया अब जब मुस्लिमो की बात आती तो वो इतना ज्यादा बुराई नही करते थे।

लेकिन एक घटना ने मुस्लिमो के प्रति सोच को बिलकुल बदलकर रख दिया। मेरे पति मुझसे बहुत प्यार करते है और मेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकते है। एक दिन जब मैं अकेले मंदिर जा रही थी जब मैं उस मुस्लिम बस्ती से निकल रही थी तब एक पीछे से आती एक मोटर्सयले ने मेरे टक्कर मार दी। मैं वही सड़क पर गिर गयी मेरी पूजा की थाली भी वही गिर गयी। मेरे पांव में चोट आई थी और घुटना थोडा चिल भी गया था। थोड़ी देर के लिए मेरी आँखों के आगे अँधेरा सा च गया था। लेकिन तभी मुझे अहसास हुआ की किसीने मुझे फूल की तरह गोदी में उठा लिया है। मैंने गौर से देखा तो वो एक मुस्लिम लड़का था जिसने अपने सर पर टोपी पहनी हुई थी।

इतनी चोट के बावजूद उसके स्पर्श का एक अलग ही अहसास मुझे हुआ। वह लड़का पास के ही घर में मुझे ले गया और जहा एक बिस्तेर पर मुझे लिटाया वह एक औरतऔर एक बुजुर्ग आदमी ने मेरे घुटने से खून साफ किया और वहाँ पट्टी बांध दी। इसके बाद उन्होंने मुझे पानी पिलाया और बड़े ही प्यार से मेरा ध्यान रखा। तब उन बुजुर्ग ने मेरेपैर पर है लगाया तो मुझे दर्द हुआ। तो उन्होंने कहा की बेटा चोट तो ज्यादा नही है तुमसे चला नही जायेगा। मोच ठीक होने की एक पट्टी तो मैंने कर दी है लेकिन इसको ठीक होने में 10 दिन लगेंगे। तुम कहो तो असलम तुम्हे छोड़ आएगा। तब मुझे पता चला की जो लड़का मुझे उठा के लाया है उसका नाम असलम है। तब मैंने कहा की अच्छा। लेकिन तभी असलम की अम्मी सलमा जिन्होंने कहा की बीटा तुम्हारी सदी फैट गयी है ऐसे में तुम कैसे जाओगी जाओ जाकर मेरा सलवार सुट पहन जाओ।

ऐसा कहकर मैंने उनका सलवार सूट पहन लिया। अब दिखने मैं बिलकुल एक मुस्लिम लड़की की तरह लग रही थी। क्योंकि मेरे लगी हुई थी इसलिए असलम के पापा सलीम चाचा ने अपने दूसरे बेटे इमरान को भी साथ जाने के लिए कहा। अब आगे असलम गाड़ी चला रहा था बिच में मैं बैठी थी और मेरे पीछे इमरान बैठा था। हैम तीनो आपस में इतना सटे हुए थे की हवा जाने की भी जगह नही थी। मेरी चुचिया असलम के सटी हुई थी वही इमरान का लण्ड मेरी गांड पर लग रहा था। दोनों मुस्लिम मर्दों के बीच में बैठकर मज्झ जैसी हिन्दू औरत की प्यास जग गयी थी। दोनों का स्पर्श मुझे इतना आनंद दे रहा था की जिसकी तो मैं कल्पना भी नही कर सकती थी लेकिन यह सुख मुझे असलियत में मिल रहा था। वासना के कारन मेरी आँखे बंद हो चुकी थी लेकिन तभी ब्रेक लगे मेरी अचानक खुली तो मैंने देखा की मेरा घर आ चूका था। मुझे ऐसा लगा क्यों ये रास्ता इतना छोटा था काश उन दोनों के बीच में मई कई घंटो तक ऐसे ही सफ़र करती रहती। दोनों ने मुझे सहारा देकर उतारा। और इमरान ने घर की घंटी बजायी। मई असलम का सहारा लेकर खड़ी थी और मेरी बायीं चूची उससे टच हो रही थी। मेरे पति ने दरवाजा खोल मेरे हालात देखकर वे परेशां हो गए उन्होंने पूछा क्या हुआ।

मेरे पति ने असलम और इमरान को देखकर क्या सोचा।
क्या मेरे पति की मुस्लिमो के प्रति नफरत कम हुई।
और क्या मुझे सेक्स संतुस्ती मिली जानिए अगले पार्ट में। लेकिन अगर आको मेरी वास्तविक कहानी अछि लगी तो कमेंट करे। अगला पार्ट मैं कमेंट आने पर डालूंगी।

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2 Comments

  1. हो सके तो इस कहानी को धीरे धीरे अंदर तक ले कर जाना सीधा ही उन लोगों के साथ हमबिस्तर मत हो जाना तो सारा मजा किरकिरा हो जाएगा वह जो तड़पाना प्यासा रहना जो नखरे वगैरह है वह ज्यादा करना

  2. dhire dhire kahani aage badhana kasei tum chudi bad me tumhri nanad acche se dhire dhire age badhavo bahot maja aayega

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