नीतू बनी मुस्लिम मर्द की दीवानी

नीतू ने हाल ही में अपना 21वाँ जन्मदिन मनाया था। दिखने में लाखों में एक नीतू की छह महीने पहले ही शादी हुई थी।
5 फ़ीट 5 इंच लंबी, 34-28-36 एकदम कोक बोतल जैस फिगर, गोरा रंग, घने काले बाल कोई भी जान देने के लिए झट से तैयार हो जाता। उसको भी पता था कि वो कितनी सुंदर है, उसको भी मर्द लोगों का अटेंशन अच्छा लगता था।
नितिन, उसका पति भी उसको बहुत सूट करता था, 27 साल का एक हैंडसम लड़का था। उनकी सेक्स लाइफ भी बहुत अच्छी तरह से चल रही थी। नीतू बहुत छोटे शहर में पली बढ़ी थी। 10वीं तक पढ़ी नीतू ने कॉलेज के बेफिक्र जीवन का अनुभव ही नहीं लिया था। नितिन से भी शादी से पहले अकेले में नहीं मिली थी। अपना कौमार्य भी उसने नितिन के साथ सुहागरात में खोया था। उनके घर में नितिन और सासू माँ थी। नितिन की बहन की 1 साल पहले शादी हो गई थी। नितिन की माँ नीतू को बेटी की तरह प्यार करती थी; दोनों की आपस में बहुत बनती थीं।

उनका शहर में दो मंजिला बंगला था, ऊपर का फ्लोर दो साल से खाली ही था। नितिन एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था, उसकी कंपनी ने उसे दो साल के लिए एक प्रोजेक्ट पे काम करने के लिए अमेरिका भेज दिया, वो नीतू को साथ नहीं ले जा सकता क्योंकि माँ अकेली पड़ जाती। और दोनों को साथ ले जाने की उसे अनुमति नहीं मिली, तो वो अकेला ही चला गया।

नीतू वैसे ही शर्मीली टाइप की थी, अड़ोस पड़ोस में ज्यादा जान पहचान नहीं थी; नितिन के जाने के बाद वो तो एकदम अकेली पड़ गयी थी।

अमेरिका जाने से पहले नितिन ने अपने ऊपर का फ्लोर एक अन्य धर्म की फैमिली को किराये पे दिया था। वह फैमिली नितिन के जाने के एक हफ्ते बाद रहने को आई थी। सलीम और उसकी पत्नी सलमा। सलीम मजबूत शरीर का साँवले रंग का 45 साल का आदमी था, उसकी हाइट 6 फ़ीट 1 इंच थी। सलमा भी 40 साल की थी, उसका रंग साँवला था, थोड़ी मोटी थी, वो भी नीतू की तरह घर में ही रहती थी। उनको कोई बच्चा नहीं था। सलीम पास के ही एक फैक्टरी में सुपरवाइजर था। सलीम दिखने में इतना अच्छा नहीं था पर रंगीला किस्म का आदमी था। जब से वो वहाँ रहने आया था तब से नीतू पर उसकी गंदी नजर थी।

कुछ ही दिनों में सलमा ने नीतू से जान पहचान बनाई। अब तो वो रोज नीतू के घर जाकर उसके साथ और उसकी सास के साथ बातें करती। शुरू शुरू में नीतू उससे ज्यादा बातें नहीं करती थी। पर अकेलेपन की वजह से नीतू को उसकी बातें अच्छी लगने लगी। कभी कभी नीतू भी दोपहर को उसके घर पे बाते करने जाने लगी; दोनों मार्केट साथ साथ जाने लगी।

सलमा अब अपने पति के बारे में बहुत बातें करने लगी। उसने नीतू को यह भी बताया कि सलीम उसके प्रति आकर्षित हो गया है और उसी मूड में वह सलमा को रातभर तंग करता है। कभी कभी तो उसे नीतू नाम से बुलाते हुए रात भर जगाता है।
नीतू उसकी बातों को मजाक में ले लेती थी। पर अब उसे अपने बदन पर सलीम की गंदी नजर महसूस होती थी। पहले पहले तो उसे घिन आती थी पर अब उसे अच्छा लगने लगा था, एक अलग ही सुरसुरी होती थी।

आज भी वो दोनों मार्केट गयी थी कि अचानक बारिश हो गयी और दोनों पूरी तरह से भीग गयी।
सलमा ने वहाँ से अपने पति को फोन लगाया- सलीम, मैं और नीतू मार्केट में है और बारिश शुरू हो गई है। हम दोनों भी पूरे भीग गए हैं। प्लीज हमें घर पे छोड़ दो!
“ठीक है, मैं 10 मिनट में आया” वह बोला।

सलीम दस मिनट में रिक्शा लेकर वहा पहुँचा। बारिश में भीगा नीतू का नशीला बदन देखकर मानो जैसे पागल ही हो रहा था। लो कट स्लीव लेस ब्लाऊज पहनी नीतू की साड़ी उसके बदन से पूरी चिपकी हुई थी। उसकी पूरी जवानी साफ साफ नजर आ रही थी। ठंड की वजह से उसके निप्पल भी उसके सफेद ब्रा में से दिखाई दे रहे थे। सलीम के ऐसे देखने से नीतू शर्मा गयी थी। सलीम ने तो मानो उसको आँखों से नंगी कर दिया था।

जैसे तैसे नीतू घर तक पहुँची, फिर दौड़ कर अपने कमरे तक गयी। तभी उसकी सासू माँ ने उसको बताया कि कल शाम को उसे अपनी बेटी के घर जाना है, उसकी बेटी के प्रेग्नेंट होने की वजह से। पहले ही पति दूर गया था अब सासू माँ भी जा रही है. सुन कर, अपने घर में उसको अकेले रहना पड़ेगा सोचकर वो थोड़ा घबरा गई।

दूसरे दिन शाम को उसकी सासू माँ ’15 दिन बाद आती हूँ.’ बोलकर अपनी बेटी के घर चली गयी।

उसके जाने के बाद नीतू सलमा के घर यह पूछने गयी कि ‘वह उसके घर रहने के लिए आ सकती है क्या?’
उसके दरवाजा बजाने के बाद सलीम ने दरवाजा खोला और पूछा- अरे नीतू, तुम कैसे आ गयी हमारे घर!
वह नीतू के आंखों में ऐसे देख रहा था कि जैसे कोई शेर अपने शिकार की तरफ देख रहा हो।

“कुछ नहीं, मुझे जरा सलमा से मिलना था, वह है क्या घर में?” नीतू ने पूछा।
“वो तो घर पर नहीं है, तुम्हें बताया नहीं उसने? वो अपनी माँ के गांव गयी है दो दिन के लिए… उसकी मां की तबियत खराब है, उसको कुछ बताना है क्या?” सलीम बोला।
“नहीं न… नहीं कुछ काम नहीं था, मेरी सासू माँ अपनी बेटी के यहाँ गयी है ना पंद्रह दिन के लिए, तो सोचा सलमा से बात करूँ!”

नीतू अब नर्वस हो गयी थी। उसकी सास भी घर पर नहीं थी और उसकी पड़ोसन… उसकी खास दोस्त सलमा भी घर पर नहीं थी। अकेले घर पे रात गुजारने के ख्याल से उसे डर लगने लगा था।
सलीम ने उसे अंदर बुलाया।
नीतू भी टेंशन में उसको ना नहीं बोली।
वह एकदम जेंटलमैन कि तरह पेश आ रहा था।

नीतू ने भी पिंक कलर की साडी और मैचिंग ब्लाऊज़ पहना हुआ था।
“सलीम भैया… सलमा घर पर नहीं है… अब आपके लिए खाना कौन बनाएगा?” उसने ऐसे ही पूछ लिया।

“मैं कुछ मंगवा लूंगा बाहर से, मुझे तो चाय भी बनानी नहीं आती, खाना कहा से बनाऊंगा।” सच में तो सलमा तुम्हारी सासू माँ को पूछने वाली थी मेरे खाने के बारे में… पर मैंने ही मना कर दिया, क्योंकि तुम दोनों को तकलीफ होगी!”

उसको नीतू की सहानुभूति हासिल करनी थी जिसकी वजह से नीतू उसको अपने घर पर खाने को बुलाये। नीतू के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था, उसने सलीम को रात के खाने पर बुलाया। सलीम झट से राजी हो गया।

नीतू अब किचन में खाने की तैयारी करने लगी थी। पंद्रह मिनट बाद घर की बेल बजी। उसने दरवाजा खोला तो सामने सलीम खड़ा था।
किचन में काम करते वक्त उसने अपनी साड़ी का पल्लू कमर में फंसा दिया था जिस वजह से उसकी गहरी नाभि साफ साफ दिखाई दे रही थी। उसको बहुत पसीना भी आया हुआ था.

सलीम को देखते ही नीतू बोली- अरे सलीम भैया… आप आ गए… मैंने अभी खाना बनाना शुरू किया है… अभी आधा घंटा और लगेगा खाना बनाने के लिए!
उस पे मुस्कुराते हुए सलीम बोला- कोई बात नहीं, मैं भी घर बैठे बैठे बोर हो रहा था, तो सोचा यहाँ आकर के तुम्हारी मदद कर दूँ!

नीतू के पास अब कोई रास्ता नहीं बचा था। उसने सलीम को घर के अंदर लिया और किचन में जाते हुए उसको बोली- उसकी कोई जरूरत नहीं, मैं बना लूंगी खाना… आप आराम से टीवी देख लो!

पर उसकी बातों को नजर अंदाज करते सलीम किचन में आ गया, वो खाना बनाने लगी। सलीम उसके साथ बातें करने लगा।
कुछ देर के बाद नीतू को सलीम के साथ बात करना अच्छा लगने लगा। थकान की वजह से उसके शरीर पर रेंगती सलीम की नजर को उसने इग्नोर कर दिया।

खाना परोसते वक्त झुकने पर उसके दिखते हुए उसके गोल स्तनों पे सलीम की नजर अटक गई और परोसने की बाद पीछे मुड़ी नीतू के गोल गोल नितम्बों को वो आंखें फाड़ कर देख रहा था।
सलीम बहुत मुश्किल से अपने आप को कंट्रोल कर रहा था, उसके लंड ने अब उसके पजामे में तंबू बना दिया था।

पूरे टाइम नीतू के सुंदरता की तारीफ कर रहा था। नीतू भी अपनी तारीफ सुनकर खुश हो रही थी।
“नीतू, तुम साड़ी में बहुत सुंदर दिखती हो, तुम्हारा पति बहुत लकी है जो उसको तुम्हारे जैसी पत्नी मिली है. पता नहीं कैसे वो तुम्हें यहाँ छोड़ कर इतनी दूर चला गया। मैं होता तो तुम्हें कभी छोड़ कर नहीं जाता। तुम खाना भी बहुत अच्छा बनाती हो। सच में तुम एक परिपूर्ण स्त्री हो.”

इस पे जरा शर्माते हुए नीतू बोली- ऐसा नहीं है सलीम भैया… मैं इतनी भी ग्रेट नहीं हूँ!
उसकी तारीफ से नीतू शर्मा कर लाल हो गयी थी। अपने पति के अलावा किसी ने भी उसकी इतनी तारीफ नहीं की थी।

“इतना स्वादिष्ट खाना खिलाने के लिए मैं तुम्हें एक गिफ्ट दे कर थैंक्स बोलना चाहता हूं। पांच मिनट में, मैं तुम्हें घर से लाकर देता हूं, रुको!” ऐसा बोलकर सलीम उठने लगा.
तो नीतू ने उसे रोकते हुए बोली- रहने दो… नहीं… इसकी कोई जरूरत नहीं है सलीम भैय्या!
पर उसकी बात पूरी होने से पहले ही सलीम घर से बाहर निकल गया था।

नीतू थोड़ा कंफ्यूज हो गयी थी और वो क्या गिफ्ट लाता है यह देखने के लिये आतुर भी हो रही थी।

पांच मिनट बाद सलीम वापस आ गया- यह लो तुम्हारे लिए गिफ्ट!
बोल कर उसने एक कैरी बैग नीतू को थमा दी।
“क्या है यह?” नीतू ने पूछा तो वो मुस्कुराते हुए बोला।
“खोलो न सरप्राइज है तुम्हारे लिए!”
नीतू ने बैग से वह गिफ्ट बाहर निकाला, एक सुंदर, महंगी लगभग पारदर्शी स्लीवलेस नाइटी थी। गिफ्ट देख कर सच मैं तो नीतू को थोड़ा शॉक लगा, उसने अपनी पूरी लाइफ में ऐसे कपड़े नहीं पहने थे।
“सलीम भैया…म…मैं… नहीं ले सकती यह गिफ्ट!”
“प्लीज नीतू… मना मत करना! एक बार दुकान में बाहर से देख कर ही मैंने उसे खरीद लिया था। पर सलमा थोड़ी मोटी होने के कारण उसको नहीं आ रही थी, अब तो दुकानदार ने भी इसको वापस लेने से मना कर दिया! सलीम नीतू को रिक्वेस्ट करने लगा।
फिर सलीम अपने ही जोक पर ज़ोरों से हँसने लगा।

नीतू को रियेक्ट करना मुश्किल हो रहा था, वो भी जोक पे थोड़ी सी मुस्कुरा दी।

“प्लीज नीतू… ले लो ना… मुझे पता है तुम पर बहुत सुंदर लगेगी। सच तो यह है कि तुम्हारी खूबसूरती की वजह से इस नाइटी की सुंदरता और बढ़ेगी!”
सलीम के जरा और जोर देने के बाद नीतू शर्माते हुए बोली- वैसे तो मैं किसी से कोई गिफ्ट नहीं लेती, पर आप इतना आग्रह कर रहे हो तो…

उसकी बात को बीच में ही तोड़ते हुए सलीम बोला- नीतू, तुम्हें ऐतराज ना हो तो तुम इसे पहन सकती हो क्या? सलमा ने एक बार ट्राय किया था पर उसे बैठी ही नहीं। मुझे डर है कि उसकी वजह से यह बड़ी नहीं हो गयी हो, और अगर तुम्हें लूज़ हो गयी तो?
“अभी नहीं… कल पहन कर आपको बताती हूँ… अभी नहीं!”नीतू बोली.

पर सलीम को ना सुनने की आदत नहीं थी; उसके और जरा फ़ोर्स करने पर नीतू राजी हो गयी और नाइटी पहनने के लिए बैडरूम में चली गई, उसने साड़ी पेटीकोट उतारकर उस नाइटी को पहन लिया। नाइटी तो मानो उसके शरीर के नाप से ही बनाई थी; एकदम पतली गुलाबी रंग की नाइटी थी। स्लीव लेस नाइटी में से उसके स्तनों का आकार बिल्कुल साफ साफ दिख रहा था।

वो आईने में अपने आप को देख ही रही थी कि बाहर से सलीम ने दरवाजा खटखटाया और बोला- ठीक से बैठ रही है ना?
“अ…ह…हां, बैठ रही है.” उसने हड़बड़ाते हुए बोला।
“साइज बराबर है ना?” उसने पूछा।
“हां… बराबर है.” नीतू ने बोला।
“मैं देखूँ क्या?”
“नहीं… मैं नहीं आ सकती आपके सामने इन कपड़ों में!” वो डरती हुई बोली।

वो उसको ना बोल ही रही थी कि हॉल में रखा उसका मोबाइल बजा। रिंगटोन से उसे पता चला कि उसके पति नितिन का फ़ोन है।
‘है भगवान… सलीम ने फ़ोन उठाया तो…’ रात के 10 बजे कोई अनजान आदमी अपने घर में है… यह सोचकर ही उसके जिंदगी में भूचाल आ सकता था; वो वैसे ही भागते हुए हॉल में गयी और फ़ोन उठाया।
वह अकेली है और उसके साथ नितिन नहीं है इसकी माफी मांगते हुए ही नितिन ने बातें शुरू कर दी। वो अकेली है यह सोचकर नितिन उसके साथ खुलकर बात कर रहा था। उसको चिढ़ा रहा था, उसको पर्सनल सवाल पूछ रहा था।

नीतू थोड़ा डरते हुए ही पांच मिनट नितिन से बात की; फ़ोन काटने के बाद उसने नोटिस किया कि सलीम उसको भूखे शेर की तरह देख रहा है।
“वाह… नीतू तुम तो पूरी अप्सरा लग रही हो… उस लिंगरीज के विज्ञापन में मॉडल रहती है ना… बिल्कुल वैसे ही लग रही हो तुम!” उसको देखते हुए सलीम बोला।

नीतू अब ऐसे आदमी के सामने खड़ी थी जो हमेशा से उसको कामुकता भारी नजरों से देखता था।

सलीम आगे बढ़ा और अपना हाथ नीतू के नंगे कंधों पर रखा- तुम्हारी स्किन कितनी सॉफ्ट है… काश मेरी सलमा की स्किन भी इतनी सॉफ्ट होती तो मजा आ जाता।

नीतू अब ऐसे आदमी के सामने खड़ी थी जो हमेशा से उसको कामुकता भारी नजरों से देखता था।

सलीम आगे बढ़ा और अपना हाथ नीतू के नंगे कंधों पर रखा- तुम्हारी स्किन कितनी सॉफ्ट है… काश मेरी सलमा की स्किन भी इतनी सॉफ्ट होती तो मजा आ जाता।

नीतू अब सलीम से दूर जाने लगी।
पर अचानक से सलीम ने उसको कस कर बांहों में जकड़ लिया; नीतू अब उसके चंगुल से छूटने की कोशिश करने लगी, उसके बड़े बड़े स्तन सलीम की चौड़ी छाती पर रगड़ खा रहे थे।
“आज मैं तुमको अपनी बनाऊंगा नीतू… ऐसा मौका मैं नहीं छोड़ सकता… प्लीज मेरा साथ देना… क्योंकि कुछ भी हुआ तो मैं आज तुमको अपना बना…” सलीम बड़बड़ाने लगा।
सलीम उसको खींच कर बैडरूम में लेकर आ गया और उसको बैड पर लिटा दिया, उसने नीतू पे कूदते हुए अपने वजन से नीतू को दबोच लिया। वो अब अपने खुरदरे होठों से नीतू के चेहरे पे किस करने लगा। बीच में वह अपनी जीभ नीतू के मुख में घुसाने की कोशिश करने लगता।

सलीम ने अभी गिफ्ट की हुई नाइटी की गांठ खोली और खींच कर नाइटी नीतू की बदन से अलग कर दी। नीतू अब उसके सामने सफेद ब्रा और पैंटी में बेड पर लेटी हुई थी। सलीम अब घुटनों पर बैठ कर उसकी सुंदरता का आँखों से रसपान करने लगा; सपनों में देखी हुई सुंदरी को आज भोगने को मिलेगा इस ख़याल से ही खुश हो रहा था।

वह झट से नीतू के ऊपर जा बैठा और नीतू के सुडौल स्तन ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा। नीतू को यह अहसास हो गया था कि यह सब होने ही वाला है तो वो इसके लिए मानसिक रूप से तैयार थी… उसे जरूरत भी थी इसकी क्योंकि उसके पति से अलग हुए कई महीने हो गये थे.

सलीम अभी भी उसके स्तनों को ब्रा के ऊपर से ही दबा रहा था, चूस रहा था, मसल रहा था। बीच बीच में वह उसके होठों को चूम रहा था। उसका दूसरा हाथ नीतू के पूरे बदन पर घूम रहा था, गले से लेकर पेट तक और चूत तक। जो कुछ हो रहा है, उस सुख से वंचित उसके शरीर ने अब बगावत करनी शुरू कर दी थी। नीतू को भी यह अहसास होने लगा था.

सलीम भी नीतू की चुत पे गीलापन महसूस कर रहा था, वह झट से खड़ा हो गया। उसने नीतू की पैंटी पे वह गीला धब्बा देखा और उसको समझ में आ गया कि यह परी अब तैयार हो गई है।

सलीम ने अब नीतू की पैंटी में उंगली घुसा दी और नीचे खींचने लगा। नीतू ने भी अनजाने में अपनी कमर उठा कर उसको पैंटी उतारने में मदद की। सलीम धीरे से पैंटी उतार रहा था तब नीतू सलीम को देख रही थी।
पैंटी घुटनो तक आने के बाद सलीम ने एक झटके में उसको पैरों से उतार दी और बैडरूम के किसी कोने में फेंक दी।

नीतू को अब आश्चर्य हो रहा था कि कितनी आसानी से उसने सलीम को अपनी पैंटी उतारने दी। वह एक आदर्श पत्नी थी, एक आदर्श बहू थी, सलीम तो उसे बिल्कुल पसंद नहीं था। फिर भी उस आदमी को अपनी मर्जी के बगैर वह सब कुछ करने दे रही थी जो सिर्फ उसने अपने पति को करने दिया था।

पैंटी उतरने के बाद नीतू ने अपने पैर जोर से भींच लिए ताकि उसकी चुत सलीम को ना दिखे। पर सलीम ने ताकत लगा के नीतू के पैर खोल दिये, उसकी ताकत नीतू से कही अधिक थी। अपने सामने के दृश्य से सलीम आश्यर्य चकित हो गया; गोरी गोरी टाइट चुत उसके सामने थी; उसकी चुत पर बहुत ही कम बाल थे, उन काले बालों में उसकी गुलाबी पंखुड़ियों का दीदार हो रहा था। नितिन को भी उसकी बालों वाली चुत अच्छी लगती थी।

सलीम अब बेड से नीचे उतरा, नीतू के पैरों को पकड़ा और खींचते हुए उसको बेड के कोने तक ले आया। वह जमीन पर अपने घुटनों के बल नीतू के टाँगों के बीच बैठा और अपना सिर उसकी चुत पे ले आया।
नीतू अपने दोनों हाथो से उसको अपने पैरों से दूर धकेलने लगी।

अपने दोनों हाथों से उसकी जांघें सहलाते हुए सलीम ने नीतू की चुत के इर्द गिर्द अपने बड़े होठों से चूमने लगा, चाटने लगा। चुत के आस पास चाटते चाटते उसने नीतू के नीचे के खड़े होठों की तरफ जाने लगा। अपनी नाक उसके छेद पे घिसते हुए एक लंबी सांस लेते हुए एक जवान चुत की खुशबू अपने फेफड़ों में भरी। उस खुशबू से उसको नशा होने लगा था। उसने अपनी खुरदरी जीभ बाहर निकाली और उसकी गुलाबी चुत में हल्के से घुसा दी।

जो कुछ भी हो रहा था वो उसके लिए बिल्कुल नया था। उसने पहले कभी यह अनुभव नहीं लिया था। सलीम ने अपनी जीभ से नीतू की चुत को छेड़ते हुए अपनी जीभ को ऊपर नीचे घुमाना चालू कर दिया फिर उसकी चुत के दाने को अपने मुंह में पकड़ कर चूसने लगा।
नीतू की चुत का नमकीन स्वीट टेस्ट बहुत मादक था। सलीम ने अपनी जीभ और अंदर घुसाकर नीतू को जीभ से चोदना शुरु किया। नीतू की सांसें अब तेज होने लगी, अब वह सब कुछ भूल गयी थी, धीरे धीरे वो स्वर्ग में पहुँचने लगी, उसके मुँह से मादक सिसकारियाँ निकलने लगी आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह…
उसके हाथ अब सलीम को दूर धकेलने के बजाय उसके बालों को पकड़ कर जांघों के बीच दबाने लगे। सलीम की जीभ उसको वो सभी अनुभव दे रही थी जो उसने अपने जीवन में कभी अनुभव नहीं किया था।

नीतू ने कभी भी ओरल सेक्स का अनुभव नहीं लिया था। शादी के बाद नितिन से जो भी सेक्स हुआ था उसमें उन्होंने कभी भी ओरल सेक्स का प्रयास नहीं किया था। नीतू अब यह सोच रही थी कि नितिन के साथ उसने यह सब ट्राय क्यों नहीं किया, पर अभी… अपने से दोगुने उम्र का आदमी उसके टाँगों के बीच बैठ कर उसको स्वर्गिक सुख दे रहा था।

उसको अब ऐसे बैठना मुश्किल हो रहा था, उसने अपना हाथ सलीम के कंधों पर से हटा दिया और धीरे धीरे पीछे लेट गयी। उसके पेट में अब खलबली मच गई थी। एक तेज लहर उसके पेट से बाहर निकलने को मचल रही थी। उसे समझ में आ गया था कि वो अब झड़ने वाली है।

सलीम ने फिर से उसके दाने को दाँतों में पकड़कर हल्के से काटा, नीतू ने हल्के से सिसकी भरी फिर कमर उठाकर अपने बदन को धनुष के आकार में लाते हुए सलीम के चेहरे को अपनी चुत के काम रस से भिगोने लगी।
सलीम ने भी पूरा रस लपालप चाट लिया और नीतू के शांत होने की राह देखने लगा। नीतू को हर पल एक साल की तरह लग रहा था, अपनी जिंदगी के कामसुख के परम बिंदु को छू के वह वापस लौटी थी।

आंखे बंद करके उस सुख की अनुभूति करती नीतू सोच रही थी… ‘यह आदमी बिल्कुल राक्षस की तरह लगता है, मुझे बिल्कुल पसंद नहीं है। फिर भी उसने आज मैंने कभी सोचा भी न हो इतना असीमित कामसुख दिया है।’

नीतू के मुख से कामुकता भरी सिसकारियाँ सुनकर सलीम को यह भरोसा हो गया था कि यह सोनपरी अब उसके वश में आ गयी है। अब वो उसको अपनी जिंदगी का सबसे बढ़िया चोदन सुख देने को तैयार था।
सलीम अब नीतू की टांगों के बीच में से उठा और उसके पास बैठ गया; नीतू भी उठ कर बैठ गई थी।
नीतू की आंखों में उसके प्रति प्यार देख कर वह अपनी उंगलियाँ उसके होठों पर घूमाने लगा। उसी वक्त उसने अपना दायाँ हाथ कमर से ले जाते हुए उसकी पीठ तक पहुँचाया। उसने बड़ी सफाई से नीतू की ब्रा खोल दी और आगे से कंधों पर से अलग कर दी।

नीतू के स्तन अब खुली सांस ले रहे थे, 34सी होते हुए भी गोरे सीने पर तन कर खड़े थे… उसकी हर सांस के साथ ऊपर नीचे हो रहे थे।

सलीम अब उसके दोनों मम्मों को हाथों से पकड़कर मसलने लगा।
नीतू के मम्मे सच में बहुत बड़े थे। सलीम के बड़े बड़े हाथों में भी मुश्किल से समा रहे थे।

सलीम ने अब अपनी जीभ बाहर निकाली और नीतू के बायें मम्मे पे चलाने लगा। उस ठंडे स्पर्श से नीतू थरथरा उठी। सलीम उसके ऐरोला के आस पास चाटने लगा, फिर धीरे धीरे पूरा मम्मा चाट, चूस कर पूरा गीला कर दिया। वह जान बूझ कर ऐरोला और निप्पल को छू नहीं रहा था, उसको तरसा रहा था।

नीतू को यह अब सहन करने के परे था, उसने अपने दोनों हाथों से सलीम के सिर को पकड़ा और अपने निप्पल की तरफ खींचा। सलीम को नीतू का इशारा समझ में आ गया, उसने झट से उसके निप्पल पर हमला किया, उसके निप्पल को अपने दाँतों से पकड़ कर काटने लगा।
वह बेहरमी से उसके निप्पल को चूसने, काटने लगा तो नीतू और भी सिसकने और तड़पने लगी। सलीम उसके निप्पल को मुँह में पकड़ कर ज़ोरों से खींचता, वह उसके दोनों निप्पल्स को अपनी जीभ से गीला करता और उस पे फूंक मरता। उस ठंडे स्पर्श से उसके निप्पल्स और भी कड़े हो गए थे।

सलीम ने नीतू के स्तनों पर इस तरह हमला किया था कि सिर्फ उसी उत्तेजना से वह फिर से अपनी कामोत्तेजना के शिखर पर पहुँची।
बहुत दिन से सेक्स से दूर रही नवविवाहिता के लिए यह कुछ ज्यादा ही था, कामरस से नीतू की चुत पूरी भर चुकी थी, जहां वह बैठी थी,वह चादर भी अब गीली हो गई थी।
सलीम ने नीतू की निप्पल्स को अपने होठों से पकड़ कर चूस काट कर उसके निप्पल्स से दूर हुआ। वह अब बेड से नीचे उतरा और अपने कपड़े उतारने लगा। वह एक एक कपड़ा अपने बलशाली शरीर से उतारने लगा, नीतू मोहित होकर उसको देख रही थी।

उसने अपना आखिरी कपड़ा अपनी अंडरवीयर उतारी तो उसका बड़ा सा अजगर उछल कर बाहर निकला और उसके पेट पे टकराया।

उसका बड़ा मूसल देख कर नीतू को शॉक ही लगा, वो उसकी तुलना अपने पति के लंड से करने लगी। नितिन का लंड भी लंबा मोटा था लेकिन सलीम का लंड मानो अजगर ही था। अपनी जिंदगी का दूसरा लंड देख रही थी।

नीतू का यहाँ से वापस लौटना अब नामुमकिन था, उसके शरीर ने बगावत कर दी थी, वासना ने उसके मन पर कब्जा कर लिया था।

सलीम अब बैड पे घुटनों के बल बैठ गया, अपने सामने डोलता हुआ उसका बड़ा मूसल नीतू आंखें फाड़ कर देख रही थी। सलीम का लंड लंबा था… साधारण छह सात इंच लांबा। रिवाज की वजह से पूरी तरह से खुला चॉकलेटी रंग का टोपा हल्के से प्रीकम की वजह से चमक रहा था, लंड की नसें फूली हुई थी; लंड बिल्कुल किसी नीग्रो के लंड जैसा लग रहा था।

नीतू ने नजर उठा के सलीम की तरफ देखा और धीरे से उसके लंड को अपने दायें हाथ से पकड़ लिया। वह लंड उसके हाथों में पूरी तरह समा भी नहीं रहा था। नीतू ने हल्के से अपना हाथ उसके पूरे लंड पर घुमाया फिर लंड को अपने नाजुक हाथों से पकड़ कर मुठ मारने लगी।
सलीम को तो मानो ऐसा महसूस हो रहा था कि उसका लंड कोई नाजुक चुत के अंदर बाहर हो रहा हो।

बीच में ही वो सलीम के दोनों बॉल्स को पकड़ कर हल्के से मसाज करती और सोचती इसमें कितना रस भरा होगा।

नीतू ने अब दोनों हाथों से लंड को पकड़ा और ज़ोर से मुठ मारने लगी; सलीम सिसकार उठा; एक कामुक लहर उसके लंड से दिमाग तक पहुंची। दोनों ने उसी वक्त एक दूसरे की तरफ देखा। दोनों की ही आंखों में हवस बह रही थी।

थोड़ी देर ऐसे ही मुठ मरवाने के बाद सलीम अपना हाथ नीतू के सर के पीछे ले गया, उसके बालों को पकड़ते हुए उसका मुंह अपने लंड की तरफ धकेलने लगा। नीतू का मुंह उसके लंड के पास आते ही सलीम को क्या चाहिए समझ में आ गया, उसने भी ज्यादा विरोध ना करते हुए अपना मुंह जितना खुलता है उतना खोला और लंड का टोपा अपने मुंह में लिया।

आखिरकार सलीम का लंड नीतू के मुँह में बिना विरोध चला गया।

सलीम ने धीरे से धक्का दिया उससे उसके लंड का टोपा नीतू की नाजुक होठों में और अधिक घुस गया। धीरे धीरे उसने अपना लंड तीन इंच तक अंदर घुसा दिया और उससे ही नीतू की साँसें अटक गई।
उसने झट से लंड बाहर निकाला और खाँसने लगी।

सलीम इस बात पे हंसने लगा तो नीतू भी हंसने लगी। नीतू हल्के से मुस्कुराई और अपना मुँह उसके लंड के तरफ ले गयी।
सलीम को यह समझते देर नहीं लगी कि नीतू ओरल सेक्स में नई है और उसका पूरा लंड अभी अपने मुँह में नहीं ले सकती। नीतू अब लंड का टोपा और जरा सा लंड अपने मुख में लेकर चूसने लगी। एक लाजवाब हुस्न की परी उस काल विद्रूप राक्षस का लंड चूस रही है, यह अहसास ही उसको झड़ने के करीब ले जा रहा था।

नीतू भी आश्चर्य में थी, इसके पहले उसने किसी पर पुरुष को खुद को छूने भी नहीं दिया था पर अब… अब वह एक पराये मर्द का लंड ऐसे चूस रही थी, मानो आइसक्रीम चूस रही हो। नीतू अब उसके लंड पर जीभ घुमाने लगी। लंड बाहर निकालकर सलीम की तरफ देखते हुए लंड पर किस करने लगी, फिर अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके पूरे लंड को चाटती।

सलीम ने नीतू को अपने बॉल्स चाटने को बोला। नीतू अब एक नया अवर्णनीय अनुभव ले रही थी। वह अब ये पूरी तरह भूल गई थी कि वह एक शादीशुदा औरत थी, उसके साथ उसके बैड पर उसका पति नहीं एक पराये धर्म का आदमी था।
जैसे ही उसे याद आया कि वो किसी विधर्मीय गैर मर्द के साथ है, तो यह पाप करता सोचकर ही वह उत्तेजित हो गई थी।

यह सब होते हुए उनके बीच में कोई संभाषण नहीं हो रहा था; आ रही थी तो सिर्फ सिसकारियों की, तेज सांसों की, चूसने की, किस करने की, चाटने की आवाजें!
वासना में डूबे दो जिस्म एक दूजे को अपरमित सुख देने में व्यस्त थे।

सलीम ने अचानक अपना लंड उसके मुँह से निकाला तो नीतू ने नाराजगी जताते हुए सलीम की तरफ देखा।
तब सलीम पहली बार बोला- नीतू… जान, कुछ अलग ट्राय करते हैं!
नीतू ने सोचा कि आज रात को वह जो भी कर रही हैं वह सब उसके लिए नया है, तो अब यह आदमी और क्या नया करना चाहता है।

सलीम ने नीतू को पीठ के बल लिटाया और उसके स्तन चूसने शुरू कर दिए, दोनों स्तनों के बीच की जगह भी उसने चाट चाट के गीली कर दी। फिर अपने दोनों घुटने नीतू के दोनों साइड पे रख कर उसके ऊपर बैठ गया। उसने अपना लंड नीतू के स्तनों के बीच रखा और नीतू को अपने बूब्स उसके लंड पर दबाने को बोला जो उसने बिना कोई सवाल पूछे किया।

सलीम अब धीरे धीरे अपना लंड नीतू के बूब्स में अंदर बाहर करने लगा। उसका कड़क लंड नीतू की मुलायम त्वचा से घिसने के अहसास से उसके मुँह से सिसकारी निकल गयी और नीतू की ओर देखते हुए वह बोला- नीतू… इसे बूब जॉब बोलते हैं… तुम्हारे बूब्स है ही इतने सुंदर… कि मैं अपने आप को रोक ही नहीं पाया, तुम को अच्छा लग रहा है ना?

उसके सवाल पर शर्मा कर हल्के से मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया। आज रात वह ऐसी चीजें कर रही थी जो कि उसने अपने शादीशुदा जिंदगी में कभी नहीं की थी। अपने स्तनों के बीच एक कड़क मूसल उसको एक अलग ही अनुभूति दे रहा था, बीच बीच में सलीम उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियों से पकड़ के मसलता और खींचता।

सलीम का लंड अब उसकी ठोड़ी पर टकरा रहा था। नीतू ने अपना मुँह इस तरह से एडजस्ट किया और खोला कि उसके ठोड़ी पर टकरा रहा लंड डायरेक्ट उसके मुँह में आ जाये। जैसे ही सलीम का लंड नीतू की मुँह में घुसा, नीतू ने उसको अपने होठों में पकड़ा और उस पर अपनी जीभ घुमाई, सलीम के मुँह से सिसकारी बाहर निकली। उसके लंड से निकला प्रीकम नीतू की जबान पर लगा, उसको भी उसका नमकीन स्वाद अच्छा लगा। उसको अब और लंड का पानी चाहिए था, उसको अब सब पानी चाहिए था।

सलीम के स्तन चोदन की वजह से नीतू को सांसें ज़ोर से चल रही थी, वह अब फिर से झड़ने वाली थी, एक ही रात मैं तीसरी बार।
पर सलीम… वह तो थकने का नाम ही नहीं ले रहा था, वह एक लय में नीतू के स्तनों को चोद रहा था।

कुछ देर लगातार चोदने के बाद वह भी झड़ने के करीब आ गया था, उसका लंड भी थरथराने लगा; देखते ही देखते उसके लंड से पहली पिचकारी निकली… सीधा नीतू के गले के अंदर… उसके बाद की तीन चार पिचकारियां नीतू के जीभ, होठों पे गिरी।

इस अचानक घटना से नीतू का दम घुटने लगा, सलीम ने अपना लंड बाहर निकाला और बाकी की पिचकारियां नीतू के मुँह पे, आंखों पर, बालों पर छोड़ दी। गले में उतरे हुए वीर्य का स्वाद नीतू को बहुत अच्छा लगा।
जैसे जैसे सलीम का जोर कम होता गया वैसे वैसे वीर्य उसकी ठोड़ी, गले पर पड़ने लगा, जैसे मोतियों की माला!

मुँह में होठों पर पड़ा वीर्य नीतू चाट गयी और अपनी साफ जीभ सलीम को दिखाई।
दोनों ही एक दूसरे की तरफ देख कर हँसे।

फिर नीतू ने ग़ले पे, आँखों पर पड़ा वीर्य उंगलियों से इकट्ठा किया और अपने मुँह में डाला। सलीम ने भी गर्दन पे पड़ा वीर्य अपने मूसल लंड पे इकट्ठा किया और लंड नीतू की मुँह में डाल दिया। नीतू भी लत लगने जैसा उसका लंड चाट, चूस कर साफ कर दिया।

सलीम अब थक कर नीतू के शरीर पर लेट गया, दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा, दोनों की आंखों में समाधान साफ झलक रहा था। नीतू ने उसके गले में हाथ डालकर उसके होठों पर अपने होंठ रखे और चूमने लगी। सलीम भी उतने ही ज़ोरों से उसको प्रतिसाद दे रहा था।

सीधी साधी पतिव्रता नीतू के जिंदगी की यह भयावह रात अब उसके लिए स्वर्गीय सुख की अनुभूति दे रही थी।
उस थकने वाले अनुभव के बाद दोनों बातें कर रहे थे। कुछ घंटे पहले जो लड़की इस राक्षसी आदमी का चेहरा भी देखना नहीं चाहती थी, उसी आदमी के पास नंगी लेटकर इस तरह बातें कर रही थी कि जैसे जन्म जन्म की प्रेमिका हो।
सलीम को भी यह सब अच्छा लग रहा था, जिस तरह नीतू अपनी मर्जी से इस खेल में शामिल हो गई।

नीतू का विरोध देख कर पहले तो उसे लग रहा था कि पटा नहीं वह अपने मंसूबों में कामयाब भी हो पायेगा या नहीं… और उसके परिणामों का डर भी लग रहा था।
मगर अंत में वह एक शर्मीली परी को अपनी प्रेमिका बनाने में सफल हुआ था।

वे दोनों बातें कर रहे थे, बीच बीच में एक दूसरे को किस कर रहे थे। सलीम बीच में उसके निप्पल्स को चूसता, उनको काटता, उस पे नीतू दर्द से कराह उठती फिर उसको देख कर मुस्कुरा देती। नीतू के हाथ सलीम के पूरे बदन पर घूम रहे थे, खास कर उसके मूसल जैसे लंड पर और बड़े बॉल्स पर… वह अब उस लंड के प्यार में पड़ गयी थी, उसको अब समझ में आ गया था कि वो उससे अब दूर नहीं रह सकती।

नीतू का ध्यान अब घड़ी की तरफ गया, घड़ी में रात के 12:15 बज रहे थे। वह सोचने लगी नितिन का फ़ोन लगभग 10 बजे आया था, और उनकी कामक्रीड़ा तभी से ही शुरु हुई थी। मतलब दो घंटे तक चल रही थी, उसको यह देखकर धक्का लगा, शादी के बाद उसने जितना भी सेक्स किया था वह सब लगभग 10-15 मिनट चलता था, उसमें भी वो थक जाती थी। पर वह पिछले दो घंटे से फोरप्ले ही कर रही थी, अभी तक सलीम ने उसे चोदा भी नहीं था।
वह कितने समय चलेगा… चार घंटा?

उसको यह सोचते ही हँसी आ गयी.

सलीम उसकी तरफ देख रहा था उसने झट से पूछा- जानू… क्या सोच कर मुस्कुरा रही हो?
नीतू अपनी हंसी कंट्रोल करते हुए बोली- सलीम हम दो घंटे से यह सब कर रहे हैं, अभी तक आपने अपना का नाग मेरे बिल में डाला नहीं है। अगर आप ने वह किया तो क्या पूरी रात करोगे?
उस पे सलीम हंसते हुए बोला- हा हा हा… ऐसा ही होगा… मैं तुमको रातभर चोदने वाला हूँ, आज की रात ही नहीं कल का पूरा दिन… कल मैं आफिस को भी नहीं जाऊंगा… सलमा भी दो दिन नहीं आने वाली… तो बस दो दिन और दो रात बस तुम और मैं… सिर्फ चोदने का और चुदवाने का!

नीतू सलीम के प्रोग्राम पर मुस्कुराई, वह सोचने लगी कि इन दो दिन में सलीम उसके साथ क्या क्या करेगा, पर वो सब के लिए अब तैयार थी।

नीतू अब बाथरूम में गयी, कमोड पर बैठ कर सोचने लगी कि ऐसा क्या है इस आदमी में जिसके लिए उसने अपने नितिन को धोखा दिया… नितिन… हे भगवान… अमेरिका में अब दिन होगा… उसका फ़ोन भी आया होगा… फ़ोन तो हॉल में है।

वह नंगी ही बाथरूम से दौड़ती हुई हॉल में पहुँची, मोबाइल चेक किया तो उसकी जान में जान आयी, नितिन का एक भी मिस काल नहीं था, शायद काम में बिजी होगा; नहीं तो अभी तक तीन चार फ़ोन तो आ ही जाते।

सलीम भी उसकी भागदौड़ देखकर बैडरूम से हॉल में आ गया। नीतू ने फ़ोन नीचे रखा पीछे मुड़ कर सलीम कि तरफ देखा और मुस्कुराई।
सलीम बोला- भूख लगी है… कुछ खाने को है क्या?
नीतू भी अब टेंशन फ्री हो गयी थी, उसने प्यार से बोला- है ना… फल हैं, चलेगा? मुझे भी भूख लगी है.

“चलेगा, जो रेडी है वह लाओ, बनाने में टाइम वेस्ट नहीं करेंगे, वह टाइम तुम्हें चोदने में काम आएगा, और तुमको कैसे भूख लगी है, इतना जूस तो पिया तुमने अभी अभी!”
नीतू मुस्कुराते हुए दिखावटी गुस्सा दिखाते हुए किचन में जाने लगी।

सलीम नीतू के चलने पर हिलते हुए नितम्ब देख कर मन ही मन कुछ सोच कर मुस्कुराया, उसे अब दुनिया का सबसे भाग्यशाली आदमी होने का अहसास हो रहा था।

नीतू एक प्लेट में फल काट के लायी, सलीम तब तक सोफे पर बैठे टीवी देख रहा था।
नीतू के वहाँ आते ही उसने खींच कर नीतू को अपनी गोद में बिठा लिया। नीतू को यह अहसास हुआ कि वे दोनों हॉल में नंगे ही थे, यह और एक नया अनुभव था उसके लिए।

सलीम ने कटे सेब को अपने होठों में पकड़ा, फिर आगे झुकते हुए अपना मुँह नीतू के होंठों के करीब ले कर आया और नीतू के होठों पर रख दिया, दोनों के होंठ मिलते ही अपने आप खुल गए। सलीम ने सेब के टुकड़े को अपने मुँह से नीतू की मुँह में धकेल दिया।
नीतू को भी यह सब अच्छा लग रहा था, उसने ऐसे ही सारे फल खाए।

प्लेट्स किचन में रख कर नीतू फिर से हॉल में लौटी, सलीम ने हाथ से उसे अपने पास बैठने का इशारा किया तो नीतू सोफे पर उसके पास जाकर बैठ गई।

ऐसे ही थोड़ी देर टीवी देखने के बाद सलीम ने केबल पर लगी हुई पोर्न फिल्म चालू कर दी तो नीतू शर्मा गयी।
उसको शर्माते हुए देख कर सलीम हंसने लगा।

नीतू ने पहले कभी पोर्न फिल्म नहीं देखी थी। नितिन भी इतना रोमान्टिक नहीं था कि उनके साथ बैठ कर पोर्न फिल्म देखे। उसकी हमेशा से ही ऐसी फ़िल्म देखने चाहत थी और सलीम उसकी यह इच्छा भी पूरी कर रहा था।

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4 Comments

  1. story puri nahi huyi hai an thik se puri karo na kitna maja aa rha atha padhne me

  2. Mujhe bhi kisi muslim lund aise hi chudna hai

  3. Musalmani laude Ka maza Lena hai to contact me on [email protected]

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