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पति का दोस्त

दोस्तो, मैं आप सब की प्यारी प्यारी प्रीति शर्मा!
आज मैं आपको अपने एक दीवाने की बात बताने जा रही हूँ। दरअसल ये दीवाना मेरे ही पति का दोस्त है, बहुत पुराना दोस्त है, हमारी शादी से इसका हमारे घर पर आना जाना है। अब कैसे मेरे और उसका संबंध बना, उसकी कहानी मैं आपको सुनाती हूँ।

बात हमारी शादी के समय की है, जब मैं शादी करके अपने पति के घर आई, तभी से मैं वसीम, अपने पति के जिगरी दोस्त को देख रही थी। हर काम में समार्ट, सभी काम फटाफट करता था। देखने में भी बड़ा अच्छा खासा था, कद काठी रंग रूप सब सुंदर था।

शादी के कुछ दिन बाद जब हम हनीमून पर गए तो तब बातों बातों में मैंने अपने पति से पूछा- ये वसीम ने शादी नहीं की?
तो मेरे पति ने उसकी बात बताई कि वो एक लड़की से बहुत प्यार करता था, उससे शादी भी करना चाहता था, मगर किन्हीं कारणों से उनकी शादी नहीं हो सकी, बस तभी से उसके वियोग में है। दरअसल वसीम एक बहुत ही प्यार करने वाला, ख्याल रखने वाला इंसान है, पर इस बेचारे का दिल ऐसा टूटा है कि अब ये किसी भी लड़की के पास तक नहीं जाता, न ही किसी को पास आने देता है। कोई गर्ल फ्रेंड नहीं, न शादी। बस अपनी उस मोहब्बत की याद में ही जीता है।

मुझे वसीम से बड़ी सुहानुभूति हुई। जब हम हनीमून से वापिस आए तो धीरे धीरे मेरी भी वसीम से अच्छी दोस्ती हो गई। और सच में वसीम था भी बहुत अच्छा दोस्त; ऐसा दोस्त जिस पर आप आँख बंद करके विश्वास कर सकते हो। मैं भी कई बार उसके साथ बाज़ार वगैरह गई, तो मैंने देखा वो मेरा बहुत ख्याल रखता। मेरे हसबेंड भी उस पर पूरा एतबार करते।
मैंने भी नोटिस किया कि उसकी नज़र गंदी नहीं थी। उसने कभी भी मेरे चेहरे या जिस्म को घूरने जैसी कोई हरकत नहीं की, गलत छूने की तो बात ही दूर की है।

धीरे धीरे मेरा भी विश्वास वसीम पर बनने लगा, और बनता ही चला गया। वो भी मुझे बहुत पसंद करता। खास बात ये के हम दोनों का जन्म का महीना भी एक ही था, वो तो मुझे अपनी बहुत अच्छी दोस्त तो मानता ही था, मेरा नाम लेकर ही मुझसे बात करता था।

हमारे घर में आने की उसको कोई रोक टोक नहीं थी, हम तीनों दोस्त आपस में बिल्कुल लड़कों की तरह बात कर लेते थे, यहाँ तक की हमने अपनी सेक्स और हनीमून की बातें भी उससे शेयर की थी।
वो भी कभी कभी बाजारू औरतों के पास जाता था, आखिर मर्द था, तो घंटी तो बजती थी। मगर मेरे साथ उसने कभी कोई हरकत नहीं की, अब तो मुझे ऐसा लगने लगा था कि वो मेरे पति का नहीं मेरा ही दोस्त है। मैं अक्सर उसे फोन करके अपने घर बुला लेती और वो भी अपनी दुकान छोड़ कर आ जाता, हम कितनी देर बातें करते, कुछ कुछ बना कर खाते पीते रहते।

शादी के बाद लोग एक से दो होते हैं, पर हम एक से तीन हो गए थे। आज़ादी उसको इतनी थी कि वो जब चाहे हमारे बेडरूम में आ जाता था। मैं कभी नाईटी में होती या नाइट ड्रेस में तो मुझे कभी कोई शर्म या दिक्कत नहीं होती थी क्योंकि वसीम कभी मेरे बदन को घूरता नहीं था।
हाँ इतना खयाल मैं भी रखती थी कि मेरे बदन का नंगापन उसे न दिखे।

अब मेरे पति तो सुबह जाते और रात को आते, वसीम जब उसका दिल करता या मेरा दिल करता तो मेरे पास होता। न जाने क्यों मुझे लगने लगा के वसीम मेरे दिल में मेरे पति से ज़्यादा जगह बनाता जा रहा है। मुझे उसके साथ रहना अपने पति के साथ रहने से ज़्यादा अच्छा लगने लगा, मैं भी उस से खुलने लगी थी।

हमारे घर में नॉन वेज नहीं बनता था, मगर बीयर या वाइन पी लेते थे, मैं भी पी लेती थी। हाँ व्हिस्की मैं नहीं पीती। मगर बीयर में भी तो हल्का नशा होता है। हमने बहुत बार बीयर पी और आपस में बहुत से बातें की, बकवास की, बकचोदी कितनी की, उसका तो कोई अंत ही नहीं।

बातचीत बढ़ते बढ़ते सेक्स की तरफ भी बढ़ी।
मैंने उसे साफ पूछा- तुम शादी कर लो, तुम्हारी लाइफ सेट हो जाएगी, कहाँ यहाँ वहाँ गंदगी में मुँह मारते फिरते हो।
वो बोला- नहीं प्रीति, सुमन का जाना मुझे इतना खाली कर गया कि उसे भरने में अभी बहुत वक़्त लगेगा, हाँ तुमने कहा, शादी कर लो, तो तुम्हारी बात मैं नहीं टालूँगा, शादी कर लूँगा, पर अभी नहीं। अभी तो मैं सिर्फ 26 साल का हूँ, 2-4 साल और ऐश कर लूँ, फिर शादी कर लूँगा।

मैंने बीयर का घूंट भर कर कहा- साले, तुझे रंडी के पास जाना ऐश लगती है?
वो बोला- अरे यार, ऐश का मतलब अपनी मर्ज़ी से सोना, अपनी मर्ज़ी से उठना, किसी की कोई बंदिश नहीं, सब काम अपने हिसाब से। बाकी जो जिस्म की जरूरत है तो वो तो कहीं भी पूरी कर लो।

मैंने कहा- तू न एक नंबर का कुत्ता है, साला हर जगह सूँघता फिरता है।
वो बोला- अच्छा जी मैं कुत्ता? कोई बात नहीं आने दो तेरे पति को, उस से कहूँगा, आज इसको कुतिया बना!
न जाने क्यों मेरे मुँह से निकल गया- क्यों तू नहीं बना सकता क्या?

बस मेरी बात सुन कर वो तो सन्न और मैं भी सन्न!
ये क्या कह दिया मैंने! मैंने तो उसे सीधा सीधा सेक्स का न्योता दे डाला।

मैं पशोपश में थी कि अगर इस वक़्त ये उठ कर जोश में आकर मुझे पकड़ ले तो क्या होगा। अगर हम में सेक्स संबंध बन गए तो क्या ये मेरा इतना अच्छा दोस्त रह पाएगा। क्या मैं अपने पति से बेवफ़ाई कर पाऊँगी।
मैंने तो खुद को बाथरूम में बंद कर लिया और वो चला गया।

उसके बाद 2 दिन वो हमारे घर नहीं आया। फिर मेरे पति ने उसे फोन करके बुलाया। वो आया, मगर हम दोनों आपस में सहज नहीं थे। सिर्फ हल्की फुल्की सी बातचीत हुई। उसका तो पता नहीं मगर मैं खुद बहुत शर्मिंदा थी।

अगले दिन मैंने सोचा कि यार जो भी बकवास मैंने कर दी, मुझे उसके लिए अपने दोस्त से माफी मांगनी चाहिए।
मैंने फोन करके वसीम को बुलाया, वो थोड़ी देर में आ गया। थोड़ी सी औपचारिक बात चीत के बाद चाय पीते पीते मैंने कहा- वसीम यार, उस दिन के लिए सॉरी, मैं नशे में न जाने क्या कह गई, हालांकि मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, गलती से मुँह से निकल गया। सॉरी यार।

मैंने कहा तो वो बोला- उस दिन से मैं भी यही सोच रहा था, तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मेरी बहुत अच्छी दोस्त हो,, तुम पर मैं बहुत भरोसा करता हूँ, तुमसे प्यार करता हूँ। पर यार सच कहूँ, उस दिन तुमने जो भी कहा, मगर तुमने मेरे सोचने का नज़रिया ही बदल दिया है। पिछले दो दिनों में मेरे ख्यालों में तुम हमेशा बिना कपड़ों के ही आई हो। मैं बहुत कोशिश कर रहा हूँ, तुम्हारी इस इमेज को बदलने की पर नहीं। मुझे अब तुम कपड़ो में नज़र ही नहीं आती।

मैं सोचने लगी ‘हे भगवान ये मैंने क्या कर दिया। एक अच्छे भले दोस्त को खो दिया।’
मैंने वसीम से पूछा- वसीम, तो क्या हम अब अच्छे दोस्त नहीं रहे?
वो बोला- अच्छे दोस्त तो हम आज भी हैं, मैं आज भी तुमसे वैसे ही प्यार करता हूँ, पर ये मेरे ज़िंदगी में पहली बार हुआ है कि पिछले दो दिनों में मुझे सुमन की एक बार भी याद नहीं आई। मुझे उसके जाने का एक बार भी अफसोस नहीं हुआ। मुझे सिर्फ तुम ही तुम दिखी, और किसी तरफ मेरे ध्यान ही नहीं गया। अब तू बता मैं क्या करूँ। तुमने एक सेकंड में ही सुमन को मेरे दिल दिमाग से बाहर निकाल फेंका और खुद उसकी जगह बैठ गई।

मैंने हैरान होकर कहा- यह क्या कह रहे हो वसीम, मैं तुमको अपना बहुत अच्छा दोस्त मानती हूँ।
पर वसीम बोला- बेशक तुम मेरी दोस्त हो और हमेशा रहोगी, मगर आज मैं तुमसे कहना चाहता हूँ, आई लव यू प्रीति, तुम मुझसे प्यार करो या न करो। मैं तुमसे सारी ज़िंदगी प्यार करूंगा, शादी करूंगा, पर प्यार सिर्फ तुमसे, सिर्फ तुमसे और किसी से नहीं।

कह कर वसीम चला गया और मैं बैठ कर सोचने लगी ‘यार ये क्या नया पंगा पड़ गया मेरी जान को।’

वक़्त बीतता गया, वसीम का हमारे घर में आना जाना वैसे ही रहा, वही दोस्ती, वही हंसी मज़ाक। मगर अब वो पहले वाला दोस्त वसीम नहीं था, अब तो वो सिर्फ मेरा दीवाना वसीम था। मैंने उसको बहुत बार समझाया, मगर वो सिर्फ हर बार मुझे आई लव यू कह कर चुप करवा देता।
फिर मैंने भी सोचा कि चलो इसके दिमाग से प्यार का भूत उतारती हूँ। मैंने सोचा अगर मैं इसके प्यार को कुबूल कर लूँ, फिर देखती हूँ, ये आगे क्या करता है।

मैंने एक दिन उस से बात करते करते उसको कहा- वसीम, तुम मुझसे प्यार करते हो?
वो बोला- बेहद, बहुत, बेशुमार।
मैंने कहा- तो मैं भी तुमसे प्यार करने लगी हूँ।
वो बोला- अरे वाह, क्या बात करी।

मुझे लगा था कि वो खुशी से मुझे चूम लेगा, मगर उसने ऐसा कुछ नहीं किया। अब प्यार का इज़हार तो कर दिया, मगर उसके बाद मेरे मन में और भी बहुत से विचार आने लगे, मैं सोचने लगी किन अब जब ये मेरा बॉयफ्रेंड बन गया है, तो इसको भी अपनी जवानी का मज़ा दूँ, मगर वसीम को जैसे सिर्फ मेरे मन से ही प्यार था, मेरे तन से नहीं।

मैं धीरे धीरे उसके सामने खुलना शुरू किया, बड़ी बेफिक्री से मैं उसके सामने झुक जाती, वो सिर्फ एक बार मेरे ब्लाउज़ में या टी शर्ट में झूलते मेरे बड़े बड़े मम्मों को देखता और अपना मुँह घुमा लेता.
और कोई मर्द होता तो दूसरी बार में ही मेरे मम्मे मसल देता, मगर ये तो सिर्फ बातें ही करता, खूब बातें करता, मगर कभी उसने मुझे छुआ नहीं।

मैं इतनी बेतकल्लुफ़ होती गई कि टी शर्ट लोअर से टी शर्ट पैन्टी पे आ गई और एक दिन तो मैंने जान बूझ कर नहाते हुये उससे तौलिया मांगा, और जब वो तौलिया देने आया, तो मैंने पूरा दरवाजा खोल कर उसे अपना पूरा नंगा बदन दिखा दिया।
मगर उसने सिर्फ एक बार मेरे नंगे बदन को देखा, तौलिया पकड़ाया और वापिस चला गया।

मेरी गांड जल गई। मुझे शुरू से अपने हुस्न और जवानी पर बहुत गुरूर रहा है, और ये तो मेरे जैसे एक खूबसूरत और जवान औरत को नंगी छोड़ कर चला गया।
नहा कर कपड़े पहन कर मैं बाहर आई तो सीधा रवि के पास गई, मैंने उस से पूछा- वसीम एक बात बताओ, तुम्हें कोई कमजोरी या बीमारी तो नहीं है?
वो बोला- बिल्कुल भी नहीं, एक दम फिट हूँ।

तो मैंने पूछा- तो फिर तुम एक खूबसूरत और नंगी औरत को कैसे नजरअंदाज कर सकते हो?
वो बोला- देख प्रीति, मैं तुमसे प्यार करता हूँ, तुम्हारे तन से नहीं, मन से प्यार करता हूँ। तुमने मेरा प्यार कबूल किया, मेरे लिए यही बहुत है, मुझे और तुमसे कुछ नहीं चाहिए।
मैंने कहा- मगर मुझे तो चाहिए।
वो बोला- बोलो क्या चाहिए?
मैंने कहा- ये भी बताने की ज़रूरत है, कोई बच्चा भी बता सकता है, मैं तुमसे क्या चाहती हूँ।
वो बोला- देख यार, तू अगर चाहती है कि मैं तुम्हारे साथ सेक्स करूँ, तो ये मैं नहीं कर सकता, मेरे उसूलों के खिलाफ है।
मैंने खीज कर कहा- साले तू चूतिया है, और कुछ नहीं, और गांड में ले ले अपने उसूल।
और मैं उठ कर जाने लगी.

तो उसने मेरी बाजू पकड़ कर मुझे फिर से बैठा लिया- देख तू मेरी दोस्त है, मुझे जो मर्ज़ी कह, मगर यार मेरा दिल नहीं मानता, तू बात कर और मैं तेरे लिए क्या कर सकता हूँ, तेरी हर इच्छा पूरी करूंगा।
मैंने पहले कुछ सोचा और फिर बोली- मेरी एक इच्छा है, बहुत समय से, अगर तू पूरी कर सके?
वो खुश हो कर बोला- तू बोल तो सही?
मैंने कहा- ये हम दोनों के बीच ही रहे!
वो बोला- कहने की ज़रूरत है कि मुझ पर विश्वास करो।

मैंने कहा- मुझे न …
वो उत्तेजित हो कर बोला- अरे बोल साली?
मैंने कहा- मुझे न किसी तगड़े बॉडी बिल्डर से सेक्स करना है, जिसकी ज़बरदस्त मसकुलर बॉडी हो, लंबा हो, चौड़ा हो, तगड़ा हो, और जिसका मस्त बड़ा सारा लंड हो और जो सच कहूँ तो मेरी माँ चोद के रख दे।
वो पहले मेरे चेहरे को देखता रहा, फिर बोला- बस?
मैंने कहा- बस मतलब? कर सकता है ये क्या?
वो बोला- मुझे तो बहुत से बॉडी बिल्डर जानते है, पता कर लेता हूँ, किसका लंड सबसे बड़ा है।

मैंने खुश हो कर उसके गाल को चूम लिया। उसने मेरे माथे को चूमा और चला गया।

अगले हफ्ते उसका फोन आया- अरे प्रीति सुन, अभी मिल सकती है क्या?
मैंने कहा- कहाँ?
वो बोला- बस घर से बाहर आ जा!

मैंने झट से कपड़े बदले और बाहर निकली। घर से थोड़ी ही दूर उसकी कार खड़ी थी मैं जाकर उसकी कार में बैठ गई।
वो बोला- बड़ा सज बन कर आई है, शादी करने जा रही है क्या?
मैंने कहा- नहीं लड़का देखने जा रही हूँ, अगर पसंद आ गया, तो सीधा सुहागरात मनाऊँगी।

वो हंस पड़ा और हम बातें करते करते एक माल के बाहर पहुंचे, गाड़ी को पार्किंग में लगा कर वो चला गया।
10 मिनट बाद वो आया, उसके साथ एक खूब हट्टा कट्टा मर्द भी था। मगर यह तो एक हब्शी था। कद करीब 6 फीट, बेहद काला और बदशक्ल, सांड जैसा लंबा चौड़ा बदन।
वो आकर कार में पीछे बैठ गया, मैं तो आगे बैठी थी।

वसीम भी बैठ गया और बोला- बोल, लड़का पसंद आया?
मैंने कहा- अरे ये तो मेरे मन की बात बूझ ली तुमने, मैंने बहुत सी फिल्मों में बड़े बड़े औजारों वाले हब्शी देखे थे, तब सोचती थी कि अगर मुझे कोई हब्शी मिल जाए तो क्या हो, पर आज तो तूने मेरे दिल का अरमान पूरा कर दिया, ऊपर से तो अच्छा ही हैं, असली चीज़ तो अंदर छुपी होती है।

वसीम बोला- तो जा कर पीछे बैठ और चेक कर ले।
“सच में?” मैंने पूछा.
और मैं गाड़ी से उतरी और पीछे की सीट पर बैठ गई, उसने मुझे हैलो कहा, मैंने भी उसे हैलो कहा।

मैंने उससे इंग्लिश में कहा- मेरे दोस्त ने मुझे कहा है कि आपकी पैन्ट में कुछ ऐसा छुपा है, जो मुझे डरा सकता है?
वो बोला- बिल्कुल, मेरी बहुत सी दोस्त मेरे औज़ार की मार से रो पड़ती हैं, और मुझसे हाथ जोड़ कर छोड़ने की विनती करती हैं। पर मैं कभी किसी को छोड़ता नहीं। जो मेरे पास आ गई, उसकी माँ चोद कर रख देता हूँ।

मैंने कहा- ओ के तो मुझे भी डराओ।

उसने थोड़ा सा एडजस्ट हो कर अपनी पैन्ट के हुक, बटन और ज़िप खोली और अपनी जीन्स घुटनों तक उतारी। उसकी चड्डी में ही जैसे कोई खीरा या मूली रखी हो, ऐसा लगा मुझे।

जब उसने अपनी चड्डी उतारी तो मैं सच में डर गई। करीब 9 इंच का मोटा लंड, जो एक तरफ सर फेंके सो रहा था। इतना बड़ा तो मेरे पति का पूरा खड़ा होने पर भी नहीं होता है।
मैंने पूछा- पूरा खड़ा होने पर ये कितना बड़ा हो जाता है?
वो बोला- इसे अपने हाथ में पकड़ो, इससे खेलो और खुद देख लो।

मैंने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और उसको आगे पीछे करने लगी, उसका काला टोपा बाहर निकाल कर देखा। इसमें कोई शक नहीं कि उसका लंड बड़ा दमदार था। मेरे सारे बदन में बहुत हलचल हो रही थी।
थोड़ा सा खेलने के बाद मैंने उसका लंड छोड़ दिया क्योंकि वो बिल्कुल भी खड़ा नहीं हुआ था।

मैंने वसीम से कहा- मुझे अच्छा लगा, पर अभी घर वापिस चलो, हम फिर किसी दिन इससे मिलेंगे।

मैं गाड़ी से नीचे उतरी तो वसीम भी नीचे उतरा और बोला- क्या हुआ, पसंद नहीं आया।
मैंने कहा- यार पसंद तो आया, पर साले का खड़ा ही नहीं हुआ।
मगर सच यह था कि मैं उसके लंड को सिर्फ छू कर ही इतनी गर्म हो चुकी थी कि मेरा अभी सेक्स करने को दिल कर रहा था, मगर अभी करती तो कैसे करती।
वसीम बोला- अरे जादू है क्या, जब तुम इससे प्यार करोगी, तो अपने आप खड़ा होगा, फिर देखना।
उसके बाद वसीम ने मुझे काफी समझाया.

वसीम की बातें सुन कर कहा- यार, मैं मरी जा रही हूँ, मेरा अभी इस से सेक्स करने को दिल कर रहा है। प्लीज मेरी मदद करो।
वसीम बोला- मैं जानता था, तू इसका लंड देख कर तड़प उठेगी, मैंने होटल में रूम बुक किया है, वहाँ चलते हैं, और तुम अपना पूर एंजॉय करना!
मैंने कहा- यार, मैं इसका चूस लूँ, मुझे सब्र नहीं हो रहा!
वो बोला- उसने तो पहले ही कहा है, जा चूस ले।

मैं फिर से कार में पीछे जा बैठी। वो अब भी अपना लंड बाहर निकाले बैठा था। मैंने उसका लंड फिर से अपने हाथ में पकड़ा तो उसने मेरे सर पकड़ कर नीचे को दबाया, मैंने अपना मुँह खोला और उसका लंड अपने मुँह में ले लिया। उसने भी अपने एक हाथ में मेरा मम्मा पकड़ा और धीरे धीरे दबाने लगा।

क्या मज़ा आया, इतना मोटा और लंबा लंड, जैसे कोई सपना हो। जैसे जैसे मैं चूसती गई, उसका लंड अकड़ता गया। और 2 मिनट बाद तो जैसे मेरे होंठ फट जाने की नौबत आ गई हो, इतना मोटा था कि मेरे मुँह में नहीं आ रहा था, और लंबाई तो करीब 11 इंच की होगी।

वसीम ने कार स्टार्ट की और हम चल पड़े, मैं भी उसका लंड छोड़ कर ठीक ठाक हो कर बैठ गई।
उस हब्शी ने मेरे गाल को छूकर कहा- क्या हम कुछ करने जा रहे हैं?
मैंने कहा- हाँ, हम एक होटल में जा रहे हैं। तुम्हारा नाम क्या है।
वो बोला- मेरा नाम रिचर्ड है, और तुम्हारा?
मैंने कहा- प्रीति।

कुछ देर बाद ही हम एक होटल के बाहर रुके। हम तीनों गाड़ी से उतर कर होटल के अंदर गए और फिर एक रूम में पहुंचे। पहले से ही एसी चल रहा था। कमरा ठीक ठाक सा ही था।

अंदर घुसते ही रिचर्ड ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया और लेजा कर बेड पर लेटा दिया, और अपने कपड़े उतारने लगा। एक मिनट में हो वो बिल्कुल नंगा हो गया।
क्या शानदार जिस्म का मालिक था वो। मैं तो उसे देखती ही रह गई। चौड़े कंधे, भरा हुआ सीना, मोटे बाजू, बिल्कुल पतली कमर, छोटा सा पेट, और नीचे मोटी मोटी जांघें और उन दो जांघों के बीच में झूलता उसका लंबा काला लंड।

मैं उठ गई और उठ कर उसके पास आई, मैंने उसके जिस्म पर हाथ फेरा, हर एक मसल बड़ी मेहनत से कसरत कर कर के बनाया हुआ, पत्थर जैसा सीना। मजबूत पट्ठे, जिन्हें मैंने छुआ तो लगा जैसे किसी लोहे को छू रही हूँ।

मैंने उसे कहा- रिच, तुम्हारा जिस्म बहुत खूबसूरत है।
वो बोला- तुम्हारा जिस्म भी बहुत खूबसूरत है।
मैंने हंस कर मज़ाक करते हुये कहा- और तुम्हारा लंड ये तो बहुत ही ज़बरदस्त है.
मैंने उसके लंड को अपने हाथों में पकड़ा और धीरे धीरे से सहलाया। उसके लंड में तनाव बढ़ने लगा। कार में तो मैंने उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूस कर खड़ा किया था, मगर इस बार मुझे उसका लंड चूस कर खड़ा करने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो अपने आप ही पूरा खड़ा हो गया।

रिचर्ड ने खुद आगे बढ़ कर मेरी शर्ट उतारी, मेरी ब्रा की हुक खोली, जिसे मैंने उतार दिया, और फिर उसने मेरी पैन्ट और चड्डी भी उतार दी। मैं पूरी तरह से बेशर्म हुई, बिना इस बात की परवाह किए कि मेरा और मेरे पति का सबसे अच्छा दोस्त वसीम भी वहीं खड़ा मुझे देख रहा है, मैं रिचर्ड से लिपट गई।

सबसे पहले हमे एक दूसरे को चूमा, खूब सारे एक दूसरे के होंठ चूसे, रिचर्ड तो मेरे गोरे गाल, गुलाबी होंठ सब चूस गया, मैंने भी उसके चेहरे की बदशक्ली की परवाह किए बिना उसका चेहरा चूमा भी और चाटा भी। मुझे बांहों में कसे हुये वो खड़ा था और उसका मोटा, काला लंबा लंड मेरे कलेजे तक लगा हुआ था।

मैंने एक बार नीचे देखा, उसका लंड बिल्कुल मेरे बूब्स के बराबर आ रहा था। मैंने कहा- रिचर्ड, जब तुम इसे अंदर डालोगे, तो क्या अंदर से भी ये यहाँ तक आ जाएगा?
वो बोला- हाँ बेबी, ये तुम्हारे फेफड़ों तक आ जाएगा।
मैं तो चीख पड़ी- हे राम, मैं तो मर जाऊँगी।
वो बोला- डरो मत, मेरे इस लंड को एक 18 साल की लड़की पूरा अपने अंदर ले चुकी है, मेरी गर्ल फ्रेंड की तो मैं गांड भी मारता हूँ, तुम्हें कुछ नहीं होगा, डरो मत मज़े लो।

मगर डर तो मेरे अंदर बैठ गया था। मैं सोचने लगी अगर ये मेरी गांड मारे तो मेरी चूत गांड फट कर सब एक हो जाए!
पर फिर भी।

रिचर्ड ने मुझे बेड पे लेटाया और पहले मेरे सारे नंगे बदन पर अपना हाथ फेर कर मुझे छू कर देखा।
“बहुत मुलायम बदन है तुम्हारा!” वो बोला।
मैं मुस्कुरा दी- थैंक्स, रिच।

उसने मेरे दोनों बूब्स अपने हाथों में हल्के से पकड़े और दोनों निपल्स को चूस कर देखा। गोरे गुलाबी चूचुकों को बेहद काले, मोटे और भद्दे से होंठों से चूसा उसने, मगर मुझे उसके मोटे मोटे होंठों में अपने छोटे छोटे निप्पल चुसवा का बड़ा मज़ा आया।

मेरे पति तो अक्सर काट लेते हैं, मगर इसने तो दाँत लगने ही नहीं दिये, बड़ी परफेकशन से मेरे मम्मे चूसे भी और दबाये भी। हर काम बड़े आराम से। मेरे मम्मे चूसने के बाद उसने, मेरे कंधे, बाजू, और हाथ भी चूमे, मेरी बगलों को सहलाया, चूमा। मुझे बहुत गुदगुदी हुई।
फिर मेरे पेट को भी चूमा, मेरी नाभि से नीचे मेरे पेडू को अपनी खुरदुरी जीभ से चाटा और कमर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक चाटा, मेरी जांघों को सहलाया।

वो बड़े प्यार से मेरे गोरे बदन के हर हिस्से को छू कर सहला कर देख रहा था। उसे मुझे छू कर मज़ा आ रहा था और मुझे इस तरह सहलाए जाने से मज़ा आ रहा था।
एक बात है कि पर पुरुष के स्पर्श में ही जादू होता है। अपना पति कितना भी बदन को सहलाए, वो मज़ा नहीं आता जो किसी पर पुरुष के छूने से आता है।
इस कहानी को पढ़ने वाले मर्द भी मेरी इस बात से सहमत होंगे कि उनकी पत्नी की छूने और किसी पराई औरत के छू जाने बहुत फर्क होता है। दूसरे हाथ से छूने का रोमांच ही कुछ और होता है।
फिर उसने मेरे दोनों घुटने पकड़ कर ऊपर को मोड़े तो मैंने भी अपनी टाँगें पूरी तरह से उसके आगे खोल दी।
मेरी चिकनी गुलाबी चूत को उसने बड़े प्यार से देखा, फिर अपने हाथ की उंगली से मेरी भग्नासा को छेड़ा, अपने हाथ से मेरी चूत की फांक खोली तो अंदर से गुलाबी चूत उसके सामने खुल गई।

मेरी तरफ देख कर उसने पूछा- मैं इसे चाट सकता हूँ?
मैं कहाँ मना करने वाली थी, दरअसल अब तो मैं मना करने की हालत में ही नहीं थी; मैंने हाँ में सर हिला दिया।

वो बेड पर थोड़ा पीछे को हट कर बैठ गया, झुक कर उसने पहले मेरी चूत और उसके आस सब जगह चूमा। फिर मेरी भग्नासा को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा। क्या लाजवाब स्वाद आया, अपने मुँह के अंदर ही जब उसने मेरी भग्नासा को अपनी जीभ से चाटा, और फिर उसने अपनी जीभ से मेरी चूत के सुराख को चाटा।
यह फीलिंग तो आउट ऑफ दिस वर्ल्ड थी। कितनी गुदगुदी, कितनी झुरझुरी सी हुई, उसकी जीभ के चाटने से!

मैंने उसका सर पकड़ लिया, उसने भी मेरे दोनों कूल्हे पकड़ लिए और पूरी से तरह से अपना मुँह मेरी दोनों जांघों के बीच में घुसा दिया और अपनी जीभ को मेरी चूत के दाने पे रगड़ने लगा। मेरी चूत तो मेरे पति भी चाटते हैं, और मैंने कुछ और लोगों से भी अपनी चूत चटवाई है, मगर इस हब्शी का चूत चाटना तो ऐसे था, जैसे कोई एक्सपर्ट हो, और अपने काम को बखूबी जानता हो।

नीचे से लेकर ऊपर तक, बाहर से लेकर तक अंदर जहां तक भी उसकी जीभ जा रही थी, वो मेरी चूत को चाट रहा था, और मैं बेड पे टाँगें फैलाये, उसका गंजा सर अपने हाथों में पकड़े बस- ऑफ, ऊँह, हुम्म आह…” ही कर पा रही थी।

बड़े ही लाजवाब तरीके से उसने मेरी चूत चाटी, बेशक मुझे बहुत ज़्यादा उत्तेजित किया, तड़पा डाला मुझे, मगर मुझे झड़ने नहीं दिया, जब भी मेरी तड़प बढ़ती, उसे पता लग जाता कि ये झड़ने वाली है, तो वो मेरी चूत चाटना छोड़ कर मेरी जांघों, कमर पेट पर किसिंग करना शुरू कर देता।
मैं तड़प रही थी, और वो जानता था कि मुझे कैसे और तड़पाना है।

जब मुझ से बर्दाश्त नहीं हुआ, तो मैंने उसे कहा- रिची, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा, मेरे ऊपर आओ, और चोदो मुझे।
वो शायद मेरी इसी बात का इंतज़ार कर रहा था। वो उठ कर मेरे ऊपर आया, उसका गधे जैसा लंबा लंड हवा में झूल रहा था। मुझे बेशक उसके लंड का आकार देख कर डर लग रहा था, पर मैं अब इसके लिए तैयार थी, मैंने सोचा कि अगर इसने ये पूरा लंड मेरे अंदर डाल दिया तो क्या होगा, मैं मर जाऊँगी, कोई परवाह नहीं अपने मन की इच्छा पूरी हो जाए बस, अगर मरना भी पड़ा तो कोई गम नहीं।

रिचर्ड ने मुझे कहा- मेरा लंड पकड़ो और अपनी चूत पर रखो।
मैंने उसका शानदार 11 इंच लंबा लंड अपने हाथ में पकड़ा और उसका टोपा अपनी चूत पर रखा।
“डालूँ?” उसने पूछा.
मैंने कहा- अब पूछो मत, बस चढ़ जाओ मेरे पे!

उसने हल्का सा ज़ोर लगाया और उसके लंड का टोपा मेरी चूत में ऐसे घुस गया कि पता ही नहीं चला। मगर उसका लंड अगर लंबा था तो मोटा भी था, मुझे उसका आधे से भी कम लंड लेकर ऐसा लगा जैसे मेरी संतुष्टि हो गई है। मगर रिचर्ड की संतुष्टि कब और कैसे होगी यह मुझे पता नहीं था, हाँ पर इतना मुझे लग रहा था के अगर ये लंबी पारी खेला, जैसा कि उसके मजबूत कसरती बदन को देख कर लग रहा था, मुझे मन में डर भी लग रहा था कि मेरी माँ चुदेगी आज फिर तो।

रिचर्ड ने थोड़ा सा और ज़ोर लगा कर अपना लंड और मेरी चूत में धकेलने की कोशिश की, मैंने उसके पेट पर हाथ रख कर उसे रोकने की कोशिश की। उसके पेट पे बनने वाले उसके सिक्स पैक एब्स भी बहुत सख्त थे।

मगर उस जानदार सांड के आगे मैं क्या कर सकती थी, मेरे रोकते रोकते उसने अपना थोड़ा सा लंड और मेरी चूत में घुसा दिया। मेरे मुँह से तो हल्की सी चीख ही निकल गई ‘आ…ह!
मेरी चीख सुनते ही रवि उठ कर आ गया.
“क्या हुआ प्रीति?” वो बोला। चिंता और डर उसके चेहरे पर भी दिख रहा था।

मैंने उसकी ओर देखा और बोली- कुछ नहीं, यार, बहुत बड़ा लंड है इसका तो! मैंने इतना बड़ा तो नहीं सोचा था। ये तो मुझे अंदर तक फाड़ देगा।
वसीम बोला- तुझे ही आग लगी थी साली हब्शी का लंड लेने की, अब ले मज़े।

मैंने उसकी और गुस्से से देखा कि मेरी हालत पर वो मज़े ले रहा है।

वो बोला- अगर दर्द ज़्यादा हो रहा है, तो बोलूँ इसे, निकाल लेगा।
मैंने कहा- नहीं, अब इतनी दूर आ गई हूँ, तो मंज़िल तक पहुँच कर ही दम लूँगी।
वसीम जाकर फिर से सोफ़े पर बैठ गया।

रिचर्ड बोला- और डालूँ या बस?
मैंने सोचा, इसका लंड एक 18 साल की लड़की ले सकती है तो मैं क्यों नहीं … मैंने कहा- नहीं, बस धीरे धीरे करो, मैंने आज पहली बार इतना बड़ा लंड लिया है।
रिचर्ड बोला- लिया क्यों है, तुमने तो देखा भी पहली बार होगा। इंडियन मर्दों के 5-6 इंच से ज़्यादा बड़ा होता ही नहीं।
मैंने कहा- हाँ, पर तुम आराम से करो, मुझे दर्द नहीं मज़ा चाहिए।
वो बोला- तो थोड़ा थोड़ा दर्द और साथ में थोड़ा थोड़ा मज़ा।

उसने और ज़ोर लगाया और अपना और लंड मेरी चूत में घुसेड़ा। मैंने सोचा नहीं था कि मैं इतना बड़ा लंड ले भी पाऊँगी, या नहीं, मगर वो ज़ोर लगता गया, और मैं ‘ऊह… आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ़्फ़… ऊई…हाय…” करती करती उसका करीब करीब सारा लंड ले गई।

जब उसका करीब सारा लंड मेरे अंदर घुस गया तो रिचर्ड बोला- देखो, तुम डर रही थी, देखो सारा अंदर घुस गया।
मैंने वसीम को बुलाया- अरे वसीम देख यार!
मुझे खुद पर यकीन नहीं हो रहा था, बेशक मुझे लग रहा था, जैसे मेरे पेट के अंदर तक कोई चीज़ घुसी पड़ी है। मैं पूरी तरह से उठ कर नहीं बैठ पा रही थी, मगर फिर भी मैंने देखा कि मेरी चूत के साथ उसकी कमर आ लगी थी, और उसका लंड मुझे दिखाई नहीं दे रहा था।

वसीम भी पास आया और देख कर बोला- तेरी माँ की, साली तू तो सारा गटक गई, कमीनी!
मैं बड़ी शांत सी हो कर लेट गई, मेरे चेहरे पर संतोष था।

फिर रिचर्ड ने चुदाई शुरू की। उसने थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से अंदर डाला। फिर थोड़ा और ज़्यादा बाहर निकाला और फिर और ज़्यादा अंदर डाला। आधा बाहर निकाला और फिर पूरा अंदर डाला। मुझे लगा जैसे मेरी चूत से लेकर मेरे सीने तक कोई लकड़ी का डंडा मेरे अंदर बाहर हो रहा है।
रिचर्ड ने फिर एक बार अपना पूरा लंड मेरी चूत से बाहर निकाला, कितना आराम मिला मुझे, जैसे मेरे पेट में कुछ भी न हो, बिल्कुल खाली हो। फिर रिची ने अपना लंड मेरे अंदर डाला, तो मैं फिर से पेट में भारीपन महसूस किया।
उसके बाद रिचर्ड ने अपना पूरा लंड मेरी चूत में नहीं डाला, सिर्फ आधे के करीब लंड को ही वो अंदर बाहर कर रहा था, और मुझे भी इसी से मज़ा आ गया। उसके लंड का सख्त टोपा मेरी चूत के अंदर पूरी तरह रगड़ खा कर जा रहा था और इस मेरे बदन में जैसे बिजली का करंट दौड़ रहा था।

5 मिनट की चुदाई ने मुझे झाड़ दिया, मेरी चूत ने भर भर के पानी छोड़ा। और जब मैं झड़ी तो मैंने रिचर्ड के काले मोटे होंठों से अपने गुलाबी होंठ लगा कर उसकी जीभ तक चूस डाली।
रिचर्ड बोला- हो गया तुम्हारा?
मैंने मुस्कुरा कर कहा- हाँ, हो गया, अब तुम भी कर लो।

वो बोला- मैं तो सुबह तक न पानी गिराऊँ।
मैंने कहाँ- वो कैसे?
वो बोला- मेरा होता ही नहीं है, अगर हो भी गया, तो मेरा लंड ढीला नहीं होता, मैं एक बार चोदने के बाद फिर से तैयार हो जाता हूँ, दूसरी चुदाई के लिए।
मैंने कहा- ये भगवान, तुम आदमी हो या हैवान?
वो मेरे निप्पल को मसल कर बोला- शैतान!
और हम दोनों हंस दिये।

मेरी एक बार में ही तसल्ली हो चुकी थी, मगर रिचर्ड अब भी धीरे धीरे लगा हुआ था। पहले मैं चुपचाप लेटी उसके झड़ने का या थकने का इंतज़ार कर रही थी। मगर अब जब एक शानदार मर्द आपके ऊपर हो, जो कभी आपके मम्मे मसले, कभी चूसे, कभी होंठ चूसे, कभी गाल चाटे और एक असाधारण आकार का लंड आपकी चूत में हो, और आपको पता हो कि दोबारा शायद आपको ये मौका न मिले, तो जो भी मज़ा आपको मिल रहा है, बस आज ही है, कल नहीं। तो आप भी कितनी देर तक शांत रह सकती हो।

बस थोड़ी ही देर में मैं फिर से गीली होने लगी। उसके शानदार लंड ने मुझे फिर से उत्तेजित करना शुरू कर दिया। मैंने फिर से उसके सीने को सहलाना, उसके कंधों और बाजुओं पर अपने नाखून गड़ाना शुरू कर दिये।
वो जान गया कि मैं फिर से गर्म हो चुकी हूँ, वो बोला- अपने आप लेकर देखो, कितना ले सकती हो।
मैंने कहा- क्यों नहीं।
वो मेरे से नीचे उतरा और बेड पे लेट गया।

मैं उठ कर उसकी कमर पर जा बैठी और उसका लंड अपने हाथ में पकड़ा और वसीम की और देखती हुये अपनी चूत में ले लिया।
वसीम भी मेरी तरफ देख रहा था।
मैंने वसीम से कहा- वसीम, इधर आना!

वो उठ कर मेरे पास आया।
मैंने उसे कस कर अपने गले से लगा लिया- तुम दुनिया के सबसे अच्छे दोस्त हो।
वो हंसा, और मेरे सर के बालों को बिखरा कर बोला- चल चल काम कर!
मैंने हैरान होकर उसकी ओर देखा।
वो बोला- अरे जो काम कर रही है, वो कर!
और वो फिर से सोफ़े पर जा कर बैठ गया।

मैंने कोशिश की मगर मैं उसका पूरा लंड अपने अंदर नहीं ले सकी। कुछ देर और उसी पोज में मैंने चुदाई की मगर मुझे ठीक नहीं लगा, दर्द सा हो रहा था, तो मैंने नीचे उतरना ही मुनासिब समझा।
मैं नीचे उतरी तो रिचर्ड ने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरे पीछे से आकर अपने लंड फिर से मेरी चूत में डाल दिया और बड़ी मजबूती से मेरे दोनों कंधे पकड़ लिए।

उसके बाद उसने वो मशीन चलाई चुदाई की के मेरे होश उड़ गए। इतनी निरंतरता थी उसकी चुदाई में, कितनी ताकत थी। मुझे तो ऐसा लगा जैसे किसी ने मुझे बहुत बड़े वाइब्रेटर पर बैठा दिया हो। मेरे मुँह से ऊहह … आह … जैसे शब्द निकलना भी बंद हो गया। मैं तो बस आ… आ… आ… आ… आ… आ…” कर रही थी और मेरा बदन धड़ धड़ धड़ धड़ हिल रहा था। ज़ोर उसका लग रहा था, पर थक मैं गई।

इतनी तेज़ चुदाई तो मेरी ज़िंदगी में कभी नहीं हुई, 3 मिनट से भी कम समय में मैं फिर से झड़ गई। और उसके बाद तो हर 3-4 मिनट के बाद मेरे 2-3 और स्खलन हो गए। मुझे लगा आज मैं पक्का मर जाऊँगी। यह दैत्य तो मुझे चोद चोद कर ही मार डालेगा।

मैंने अपना हाथ उठा उठा कर उसे एक दो बार रुकने का इशारा भी किया, मगर वो नहीं रुका, उसी स्पीड से वो मुझे चोदता रहा। अब तो मेरे झड़ना भी रुक गया, चूत ने पानी छोडना बंद कर दिया, जिसके चूत अंदर तक खुश्क हो गई, और इसी वजह से मेरी चूत में लंड की रवानगी, पहले तो मुश्किल, फिर दर्द भरी हो गई। साले ने अंदर छील कर रख दिया। मुझे याद नहीं उसने मुझे कितनी देर चोदा। मैं तो जैसे नीम बेहोशी में चली गई। मेरे साथ क्या हो रहा है, मैं कहाँ हूँ, मुझे सब भूल गया, मुझे कुछ चाहिए था, तो इस हालत से छुटकारा।

फिर रिचर्ड ने अपना लंड मेरी चूत से निकाला तो मैं इस्तेमाल किए हुये कोंडोम की तरह बेड पे गिर गई। ऐसा लग रहा था जैसे मैंने किसी बच्चे को जन्म दिया है। अंदर बाहर हर तरफ से मेरी चूत दर्द कर रही थी और मेरे जिस्म को तो जैसे उसने निचोड़ कर रख दिया था।
ताकतवर आदमी से चुदने के लिए औरत को भी ताकतवर होना चाहिए।
मैं कितनी देर लेटी रही।

रिचर्ड उठा और बाथरूम में जाकर नहाने लगा।
वसीम उठ कर मेरे पास आया, मुझसे पूछा- प्रीति ठीक हो तुम?
मैंने कहा- वसीम, मैं घर जाना चाहती हूँ।

उसने मुझे उठाया, मेरे बदन को साफ किया, मेरी चूत को भी नैपकिन से पौंछा, मैं उसे ही देख रही थी, कितना प्यार करता है, रवि मुझसे, कितनी केयर करता है। मुझे अच्छी तरह से पौंछ कर उसने खुद मुझे कपड़े पहनाए, मेरी ब्रा लगाई, पैन्टी पहनाई और मुझे पूरी तरह से कपड़े पहना कर मेरे बैग से ब्रुश निकाल कर मेरे बाल बनाए। मेरे होंठों पर लिपस्टिक लगाई और मेरे पाँव में सेंडिल पहनाई।

मुझे पूरी तरह से रेडी करके वो सहारा देकर मुझे नीचे गाड़ी तक लाया। मुझे गाड़ी में बैठा कर वो गाड़ी चलाने लगा।
मैंने वसीम से पूछा- वसीम, मैंने तो चलो अपने दिल की इच्छा पूरी की, एक हब्शी से सेक्स करके… तुम्हें क्या मिला।
वो बोला- मुझे एक सुकून मिला कि मैं अपनी दोस्त के किसी काम आ सका, उसके दिल की एक इच्छा पूरी कर पाया।
मैंने पूछा- इतना प्यार करते हो मुझसे?
वो बोला- इस से भी ज़्यादा।

मैंने कहा- अगर इतना ही प्यार करते हो तो तुमने मुझसे सेक्स क्यों नहीं किया, मुझे हासिल कर सकते थे, मैं इंकार भी नहीं करती।
वो बोला- तुमने इतना कह दिया, समझो मैंने सब कर लिया!
मैं हल्की सी हंसी हंस कर बोली- इतने पागल हो मेरे लिए!
वो बोला- पागल नहीं दीवाना … दीवाना हूँ तुम्हारा, जो भी तुम कहोगी, मैं तुम्हारे लिए करूंगा। तुम वैसे भी मेरी ही हो। शादी किसी और कर ली तो क्या, सेक्स किसी और कर लिया तो क्या, मैं जब चाहूँ तुम्हारा जिस्म हासिल कर सकता हूँ, क्योंकि तुम्हारा मन मेरे पास है।

मैंने कहा- तुम जैसा आशिक भी कभी कभी ही पैदा होता है।
वो मुस्कुरा दिया और गाड़ी को घर की तरफ मोड़ दिया।

3 thoughts on “पति का दोस्त

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