Sudha ki muslim lund ki pyaas

सुहागरात के बाद का दिन ही था और मैं पहले ही दिन लेट थी , हालाँकि मैंने अलार्म लगाया था पर ना जाने किस हराम के जने ने बंद कर दिया। जल्दी जल्दी से नाह के तैयार हुई ही थी कि 3 बार पति की आवाज़ सुनाई दी। …. “सुधा……. अरे सुधा कहा रह गई हो “, सो मैं बाल सुखाये बिना ही बाहर आ गई। पर मुझे नहीं मालूम था की ये बहार रहना मेरा कितना लम्बा होने वाला था। सास के बताये सारे काम करते करते दिन के 4 बज चुके थे और अब तो हाथ पैर भी जवाब दे गए थे , और ये तो शयद और पहले की जवाब दे जाते अगर रात को थोड़ी मेहनत हुई होती पर पति देव तो 5 झटके भी सह नही पाए और अपने हतियार के साथ पसर गए। जब सारा काम करके मैं वापस कमरे में गई तो फ़ोन देखन एक होश आया और देखा तो माँ के 12 मिस कॉल थे। और अब तो मुझे भी ज़रूरत थी उनसे बात करने की। मैंने जल्दी से फ़ोन मिलाया और माँ ने भी ऐसे उठाया जैसे फ़ोन पे ही बैठी हो।

“माँ मर गई आज तो मैं “, मैंने करहाते हुए बोला।
“क्या हुआ मेरी लाडो “, माँ ने व्यंग करते हुए पुछा, इसे जैसे उनको पहले से ही पता हो की क्या होने वाला था मेरे साथ।
“माँ यार माजी ने सारा घर का काम मुझसे ही करवा दिया, बहु लाइ है या नौकरानी घर में”, मैंने हल्का सा मुह गुस्से में फूलते हुए कहा।
“अब बेटा जी आप उसको माँ जी बोलोगी तो तुम नौकरानी ही बनके रहोगी “, माँ ने हस्ते हुए कहा।
“मतलब मैं कुछ समझी नही” , मैंने उत्सुकता में पुछा।
“अरे आज तक तूने अपनी माँ को देखा तेरी दादी को माँ जी बोलते हुए”. माँ ने कहा।
“नही” मैंने धीरे से जवाब दिया।
“और तेरी माँ को देखा कभी काम करते हुए” माँ ने फिर पुछा।
“नही” मैं फिर हलके से ही जवाब दे पाई जैसे कुछ सोच रही हूँ।
“कभी देखा मैं उसके पैर दबा रही हूँ” माँ की आवाज़ थोड़ी घमंड में आई।
“नही” मगर मैं अभी भी वैसी ही हलकी आवाज़ में बोली।

“जानती ह क्यू,क्यूकि मैंने कभी उसको सास की तरह रखा ही नहीं , उसको हमेशा ही मैंने धमकाया है ताकि तेरे बाप को भी न पता चले और मुझे भी काम न करना पड़े” माँ ने धीमी आवाज़ मैं कहा ताकि न जाने कोण सुन रहा हो।
“अब तुझे भी यही सीखना होगा अगर घर पे राज़ करना है तो” माँ ने आखरी बात बोली।
“अच्छा अब ये सब छोर ये बता रात कैसी रही”, माँ ने उत्सुकता से पुछा।
“क्या बताऊ माँ 5 झटके बस , सोच भी सकती नही मैं की कोई मर्द 5 झटके में ही ढेर हो सकता है।” ये कहते हुए मैं थोड़ी निराश हुई जैसे अब हमेषा ही प्यासी रहने वाली हूँ।
“हाँ पगली क्यू नही हो सकता है, हो सकता है, पर फिर हम उसको मर्द नही नामर्द बोलते है, तेरे बाप के जैसा।”
माँ ने कहा और हम दोनों खिल खिला उठी।
अभी हसी के बाद सही से सांस आई ही थी सास की आवाज़ आगई।
“माँ मैं आपको थोड़ी देर बाद कॉल करती हु माँ जी बुला रही है”, मैंने हड़बड़ी में माँ से कहा।
“कौन बुला रही है”, माँ ने पुछा
“माँ जी…. बुढ़िया बुला रही है।” मैं कुछ खुलते हुए बोला।

Chapter-2
अभी माँ के समझाए हुए कुछ घंटे ही नही बीते थे की सुधा का खून सास की आवाज़ बार बार सुनने पे ही खौलने लगा, और उसके मुंह से गालियाँ फूटने लगी थी। गालियाँ भी ऐसी के चुड़ैल से चुतिया औरत पे आ गयी थी और माँ जी का तो मादरचोद हो गया था। “साली ने नामर्द जना है और आर्डर तो एसे झाडती है जैसे कोई कसाई जैसे लंड वाला पैदा किया हो”, सुधा ने गुस्से में खीजते हुए कहा। और अपनी ब्रा पन्टी को बालकोनी से उठाया और अलमारी में रखा तभी उसके कानो में फिर से आवाज़ पड़ी।
” सुधा जरा यहाँ तो आना”, सास हाल से चिल्ला रही थी।
सुधा भी बोली, ” आरही हूँ कुतिया “, हलाकि ये आवाज़ उस तक पहुची नही होगी।
सुधा हाल में पहुची वहां सास सोफे पे बैठ के टीवी देख रही थी, उसने सुधा की तरफ बिना देखे ही आर्डर दिया,” बेटा ज़रा एक गिलास पानी ले आ और थोड़ी नमकीन भी”
सुधा भी रसोई की तरफ मुड़ते हुए बोली,” ये तो आप खुद भी ले के आ सकती थी मुझे रूम से बुलाने की क्या जरुरत थी।” और सब कुछ उसकी टेबल पे लाकर पटक दिया।
सास ने थोडा चिड़ते हुए बहु की तरफ देख और धीरे से बोली, “अभी से ही तेवर देखो इसके, न जाने आगे क्या क्या करेगी”, पर ये आवाज़ सुधा के कान तक पहुच चुकी थी।
और उसने उल्टा बोल दिया, “आगे देखती जा हरामजादी अभी तो ये सुधा दुर्गा बनी है, इस घर को कोठा और तुजे कोठे की नौकरानी ना बनाया तो। ”

सास और गुस्से से उबल उठी और सोफे से उठते हुए बोली, “क्या बोली अपनी औकात भूल गई इतनी जल्दी, सास हूँ मै तेरी अपनी ज़बान संभल के बात कर।”
लेकिन सुधा अब किस्से रुकने वाली थी, उसने सास को सोफे पे वापस धकेल दिया और बोली, ” कुतिया अभी जितना मिल रहा है खाले कौन जाने आगे क्या हो। ” और अपने कमरे में वापस चली गई।

मगर अब सुधा पूरे रंग में आ चुकी थी उसने अपने मइके से लाये हुए सूटकेस से cigeratte निकली और जला के बालकोनी में खड़ी हो गई।
” हरामजादो ने एक काम अच्छा किया है, अपना घर मुस्लिम इलाके में लिया”, सुधा ने मन ही मन सोचा ही था, की एक लड़का बगल के खाली प्लाट में मूतने आया, सुधा उससे टेढ़ी नज़र से देख रही थी, क्युकी उसको भी पता था पति तो ठंडा कर नही पाएगा किसी और से चुदना पड़ेगा।

उस लड़के ने टाँगे थोड़ी खोली और पायजामे का नाडा ढीला किया और अंदर के कच्चे को नीचे करते हुए अपना हतियार मुट्ठी में पकड़ के बहार निकला। सुधा का मुह खुला का खुला रह गया।ऐसा लग रहा था मानो एक काला नाग बाहर निकला हो, आधी जांघो तक लम्बा एकदम काल जिक्स भूरा टोपा दूर से ही दिख रहा था और वो खतना हुआ थे ये भी उसके टोपे की मोटाई से साफ़ पता चल रहा था। “हे राम, जो हतियार बैठा हुआ इतना लम्बा है वो खड़े होने पे कितना खूंखार होगा, भगवान भी किसी किसी को इतना लम्बा दे देता है और किसी को आधा भी नहीं देता, जैसे मेरा पति।”, सुधा मन ही मन सोच रही थी की उसको कपडे पे लगाने की एक पिन दिखाई दी , उसने उस पिन को उस लड़के की तरफ फेका, वो उसके बिलकुल पैरों में जाके गिरी, लड़के ने ऊपर देखा और हल्का सा शरमाया पर एक औरत की हवस के आगे आज तक कौन टिका है सो वो भी जोश में आ गया और लंड को दबाने लगा, और अपने टोपे को मुठी में रगड़ने लगा। सुधा ने झट से अपना मंगलसूत्र उतरा और उस लड़के फेक दिया। लड़का भी झट से उसका इशारा समझ गया और उसने मंगलसूत्र को लंड पे बांध लिया। अब तक उसका हतियार एक तोप में बदल चूका था और सुधा का संस्कारी पल्लू भी गिर चूका था।

अचानक सुधा को अपने पति प्रदीप की गाडी की दी, उसने लड़के को बोला,”कल मिलते हैं, मेरा पति आगया है अभी ।”
“तेरा नाम क्या है?”, उस लड़के ने पुछा।
“सुधा “, सुधा ने कहा, “और तुम्हारा ?”
“वसीम “, लड़का नीचे से चिल्ल्या।

“चुदाई वो कला है जिसे सीखने के लिए इंसान को नंगा होना ही पड़ता है। ”

chudai to abhi shuru hogi agle bhag mein

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4 Comments

  1. thanks for posting my story on this most loved platform of mine……..

  2. Aah yaar lulli khadi krdi sudha devi ne toh.Kaash sudha devi wasim maalik se apne namard pati ke samne chude agale bhaag me aur saas un dono ke liye maid wala kaam kre unke liys khana banaye.
    Kik- cuckpornlover

  3. Next part post kijiye

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